29 अक्टूबर 2026
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गुजरात में सीबीजी संयंत्रों को राहत: जीपीसीबी से अलग NOC और सहमति दस्तावेज़ की अनिवार्यता खत्म

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गुजरात में सीबीजी संयंत्रों को राहत: जीपीसीबी से अलग NOC और सहमति दस्तावेज़ की अनिवार्यता खत्म

सारांश

गुजरात में सीबीजी और बायो-सीएनजी संयंत्रों के लिए बड़ी प्रशासनिक राहत — जीपीसीबी ने 28 अक्टूबर को अधिसूचना जारी कर अलग NOC, सीटीई और सीटीओ की अनिवार्यता खत्म की। 'व्हाइट कैटेगरी' के तहत 768 औद्योगिक गतिविधियों की सूची में सूचीबद्ध पात्र संयंत्र अब स्व-घोषणा से ही आगे बढ़ सकेंगे।

मुख्य बातें

गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जीपीसीबी) ने 28 अक्टूबर 2026 को पात्र सीबीजी और बायो-सीएनजी संयंत्रों को अलग सीटीई, सीटीओ और एनओसी से छूट देने की अधिसूचना जारी की।
यह छूट केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के संशोधित 'व्हाइट कैटेगरी' वर्गीकरण को राज्य स्तर पर लागू करने के लिए दी गई है।
पात्र सीबीजी संयंत्र संशोधित सूची में क्रमांक 763 और 768 पर सूचीबद्ध हैं; सूची में कुल 768 औद्योगिक गतिविधियाँ शामिल हैं।
छूट के बावजूद संयंत्रों को पर्यावरण अनुपालन दायित्व और जीपीसीबी को स्व-घोषणा देने की ज़िम्मेदारी बनी रहेगी।
सरकारी विभागों और पंजीकरण प्राधिकरणों को अब गोबर्धन पोर्टल समेत अन्य प्रक्रियाओं में अलग जीपीसीबी दस्तावेज़ माँगने की आवश्यकता नहीं होगी।

गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जीपीसीबी) ने 28 अक्टूबर 2026 को एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी कर राज्य के पात्र कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) और बायो-सीएनजी संयंत्रों को बड़ी प्रशासनिक राहत दी है — अब इन्हें जीपीसीबी से अलग से स्थापना की सहमति (सीटीई), संचालन की सहमति (सीटीओ) या अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेने की ज़रूरत नहीं होगी। यह कदम नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और मंजूरी में होने वाली देरी को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

अधिसूचना की पृष्ठभूमि

यह अधिसूचना केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा लागू संशोधित 'व्हाइट कैटेगरी' वर्गीकरण को राज्य स्तर पर कार्यान्वित करने के लिए जारी की गई है। इससे पहले 23 अक्टूबर को जीपीसीबी ने एक परिपत्र जारी किया था, जिसमें 768 औद्योगिक गतिविधियों और उत्पादों की संशोधित 'व्हाइट कैटेगरी' सूची प्रकाशित की गई थी। गौरतलब है कि पात्र सीबीजी संयंत्रों को इस सूची में क्रमांक 763 और 768 पर सूचीबद्ध किया गया है।

इसके अलावा, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 12 नवंबर 2024 को जारी अधिसूचना जीएसआर 703(ई) भी इस व्यवस्था का आधार है, जिसके तहत 'व्हाइट कैटेगरी' इकाइयों को निर्धारित तरीके से राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सूचित करना और स्व-घोषणा प्रस्तुत करना अनिवार्य है।

किन संयंत्रों को मिलेगी छूट

यह छूट उन्हीं संयंत्रों पर लागू होगी जो निर्दिष्ट कच्चे माल का उपयोग करते हैं और जीपीसीबी द्वारा तय निर्धारित शर्तों को पूरा करते हैं। छूट प्राप्त संयंत्रों को सीटीई और सीटीओ के लिए अलग से आवेदन नहीं करना होगा, हालाँकि उन्हें अपने पर्यावरणीय अनुपालन दायित्वों से मुक्ति नहीं मिलेगी। इन इकाइयों को जीपीसीबी को अनिवार्य अधिसूचना देनी होगी और लागू पर्यावरण कानूनों के अनुपालन की पुष्टि करते हुए स्व-घोषणा पत्र प्रस्तुत करना होगा।

सरकारी विभागों और एजेंसियों पर असर

जीपीसीबी की अधिसूचना में उन मामलों का विशेष उल्लेख है जहाँ सरकारी विभागों और प्राधिकरणों ने गोबर्धन एकीकृत पंजीकरण पोर्टल पर पंजीकरण के दौरान या अनुदान व अनुमति के आवेदनों पर कार्रवाई करते समय सीबीजी और बायो-सीएनजी परियोजना आवेदकों से सीटीई, सीटीओ या एनओसी की माँग की थी।

अब जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, सरकारी विभागों, पंजीकरण प्राधिकरणों और अन्य एजेंसियों को 'व्हाइट कैटेगरी' छूट के अंतर्गत आने वाले पात्र संयंत्रों के लिए जीपीसीबी से अलग दस्तावेज़ माँगने की आवश्यकता नहीं है। वे जीपीसीबी को प्रस्तुत अनिवार्य अधिसूचना के आधार पर आवेदन प्रक्रिया आगे बढ़ा सकते हैं।

आम जनता और उद्योग पर असर

इस राहत से सीबीजी परियोजनाओं में पत्राचार और प्रक्रियात्मक विलंब में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। विशेष रूप से वे परियोजनाएँ लाभान्वित होंगी जो सरकारी योजनाओं के तहत पंजीकरण, अनुमति और वित्तीय सहायता के लिए आवेदन कर रही हैं। यह कदम ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें जैव-ऊर्जा क्षेत्र को गति देने के लिए 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' को प्राथमिकता दे रही हैं।

संशोधित 'व्हाइट कैटेगरी' सूची और नवीनतम अधिसूचना जीपीसीबी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। आगे उद्यमियों और परियोजना प्रमोटरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे निर्धारित शर्तों के अनुरूप अपना अनुपालन ढाँचा तैयार रखें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी — क्या सरकारी विभाग और पंजीकरण एजेंसियाँ वास्तव में अब अलग दस्तावेज़ माँगना बंद करेंगी? भारत में 'व्हाइट कैटेगरी' छूट की घोषणाएँ अक्सर ज़मीनी स्तर पर अफसरशाही की जड़ता से टकराती रही हैं। दूसरी बात यह है कि पर्यावरणीय अनुपालन की ज़िम्मेदारी स्व-घोषणा पर छोड़ना तभी कारगर होगा जब तीसरे पक्ष की जाँच की कोई व्यवस्था हो — अन्यथा यह छूट, अनुपालन नहीं, बल्कि निगरानी की खाई बन सकती है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात में सीबीजी संयंत्रों को किस दस्तावेज़ से छूट मिली है?
जीपीसीबी की 28 अक्टूबर 2026 की अधिसूचना के तहत पात्र सीबीजी और बायो-सीएनजी संयंत्रों को अब जीपीसीबी से अलग सीटीई (स्थापना की सहमति), सीटीओ (संचालन की सहमति) और एनओसी लेने की ज़रूरत नहीं होगी। यह छूट केवल उन्हीं संयंत्रों पर लागू होगी जो निर्दिष्ट कच्चे माल और शर्तों को पूरा करते हैं।
'व्हाइट कैटेगरी' वर्गीकरण क्या है और इसका सीबीजी संयंत्रों से क्या संबंध है?
'व्हाइट कैटेगरी' केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का वह वर्गीकरण है जिसमें न्यूनतम प्रदूषण जोखिम वाली औद्योगिक गतिविधियाँ शामिल होती हैं। पात्र सीबीजी संयंत्र इस संशोधित सूची में क्रमांक 763 और 768 पर हैं, जिससे उन्हें सहमति दस्तावेज़ों से छूट मिलती है।
क्या छूट मिलने के बाद भी पर्यावरण नियमों का पालन ज़रूरी है?
हाँ, सीटीई और सीटीओ से छूट का अर्थ पर्यावरणीय दायित्वों से मुक्ति नहीं है। पात्र संयंत्रों को जीपीसीबी को अनिवार्य अधिसूचना देनी होगी और लागू पर्यावरण कानूनों के अनुपालन की पुष्टि करते हुए स्व-घोषणा पत्र प्रस्तुत करना होगा, जैसा कि मंत्रालय की जीएसआर 703(ई) अधिसूचना में निर्धारित है।
गोबर्धन पोर्टल पर पंजीकरण के लिए अब क्या दस्तावेज़ चाहिए?
गोबर्धन एकीकृत पंजीकरण पोर्टल सहित अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में पंजीकरण प्राधिकरणों को अब पात्र 'व्हाइट कैटेगरी' संयंत्रों से अलग जीपीसीबी दस्तावेज़ माँगने की ज़रूरत नहीं है। जीपीसीबी को प्रस्तुत अनिवार्य अधिसूचना के आधार पर आवेदन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।
यह अधिसूचना कहाँ उपलब्ध है और किन परियोजनाओं को सबसे अधिक फायदा होगा?
संशोधित 'व्हाइट कैटेगरी' सूची और अधिसूचना जीपीसीबी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। सरकारी योजनाओं के तहत पंजीकरण, अनुमति और वित्तीय सहायता के लिए आवेदन करने वाली नई सीबीजी और बायो-सीएनजी परियोजनाओं को इससे सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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