11 अगस्त 2026
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गुर्जर समाज की आबादी ओबीसी रिपोर्ट में 32 लाख दिखाई, बैंसला बोले — असली संख्या 80-90 लाख; अलग आरक्षण की माँग

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गुर्जर समाज की आबादी ओबीसी रिपोर्ट में 32 लाख दिखाई, बैंसला बोले — असली संख्या 80-90 लाख; अलग आरक्षण की माँग

सारांश

ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में गुर्जर समाज की आबादी 32 लाख दर्ज की गई, जबकि महासभा का दावा है कि असली संख्या 80-90 लाख है। बच्चू सिंह बैंसला ने इसे 'बर्दाश्त से बाहर' बताते हुए आँकड़ों की समीक्षा और निकाय चुनावों में अलग आरक्षण की माँग उठाई है।

मुख्य बातें

अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के महासचिव बच्चू सिंह बैंसला ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में गुर्जर समाज की आबादी 32 लाख दर्शाए जाने को गलत बताया।
बैंसला के अनुसार राजस्थान में गुर्जर समाज की वास्तविक संख्या 80 से 90 लाख है, जो आयोग द्वारा स्वीकृत 9 प्रतिशत हिस्सेदारी से भी मेल खाती है।
'भारत नारी रत्न' पुस्तक में वीरांगना पन्नाधाय की जाति के गलत उल्लेख पर भी आपत्ति जताई गई।
महासभा ने आगामी पंचायत और नगर निकाय चुनावों में गुर्जर समाज को अलग आरक्षण दिए जाने की माँग की।
संगठन की स्थापना 1908 में हुई थी और यह देश की आज़ादी से पूर्व से सक्रिय है।

अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के महासचिव बच्चू सिंह बैंसला ने 11 अगस्त 2026 को जयपुर में आरोप लगाया कि ओबीसी आयोग ने राजस्थान में गुर्जर समुदाय की आबादी मात्र 32 लाख दर्शाई है, जबकि वास्तविक संख्या 80 से 90 लाख के बीच है। उन्होंने सरकारी दस्तावेजों में इस कथित गड़बड़ी को तत्काल सुधारने की माँग करते हुए आगामी पंचायत और नगर निकाय चुनावों में गुर्जर समाज को अलग आरक्षण दिए जाने की भी माँग उठाई।

मुख्य घटनाक्रम

बैंसला ने बताया कि अखिल भारतीय गुर्जर महासभा की स्थापना 1908 में हुई थी — यह संगठन देश की आज़ादी से भी पुराना है और जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी तथा असम से गुजरात तक सक्रिय है। उनके साथ संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रामप्रसाद धावाई भी उपस्थित थे, जिन्होंने 28 जनवरी 2023 को भीलवाड़ा के आसींद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच साझा किया था। इस अवसर पर महासभा की महिला इकाई में नई नियुक्तियाँ भी की गईं।

पन्नाधाय की जाति को लेकर आपत्ति

बैंसला ने राजस्थान की ऐतिहासिक वीरांगना पन्नाधाय की जाति के सरकारी उल्लेख पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उनके अनुसार, 'भारत नारी रत्न' नामक पुस्तक में पन्नाधाय की जाति का गलत उल्लेख किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पन्नाधाय की प्रतिमा का उद्घाटन कर चुके हैं और राष्ट्रपति, राज्यपाल सहित वरिष्ठ प्रशासकों को उनके बारे में जानकारी है, तो फिर प्रकाशित दस्तावेज़ में यह त्रुटि कैसे रह गई।

ओबीसी आयोग के आँकड़ों पर सवाल

बैंसला ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्णय के दबाव में जल्दबाज़ी में तैयार रिपोर्ट में समाजों की आबादी के आँकड़े गलत दर्शाए गए। उनके अनुसार, एक ओर आयोग स्वयं 9 प्रतिशत हिस्सेदारी की बात करता है — जो राजस्थान की कुल आबादी के हिसाब से 80-90 लाख बनती है — और दूसरी ओर रिपोर्ट में संख्या केवल 32 लाख लिखी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समस्या केवल गुर्जर समाज तक सीमित नहीं है; उन्हें जानकारी मिली है कि अन्य समुदायों के साथ भी ऐसा हुआ है।

चेतावनी और आगे की माँगें

बैंसला ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की त्रुटियाँ जारी रहीं तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि यदि यह जानबूझकर किया गया है तो यह और भी संगीन मामला है, और यदि अनजाने में हुआ है तो ऐसे लोगों को आयोग की ज़िम्मेदारी नहीं सौंपी जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने माँग की कि आने वाले पंचायत और नगर निकाय चुनावों में गुर्जर समाज को अलग से आरक्षण दिया जाए। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियाँ तेज़ हो रही हैं और ओबीसी आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो त्रुटि का असर सीधे राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय पर पड़ता है। गुर्जर महासभा की माँग तकनीकी सुधार से आगे बढ़कर आगामी निकाय चुनावों में अलग आरक्षण तक पहुँच गई है, जो इसे एक चुनावी मुद्दे का रूप देती है। सरकार यदि समय रहते आँकड़ों की स्वतंत्र समीक्षा नहीं कराती, तो यह विवाद व्यापक ओबीसी गठबंधन की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिल भारतीय गुर्जर महासभा ने ओबीसी आयोग पर क्या आरोप लगाया है?
महासभा के महासचिव बच्चू सिंह बैंसला ने आरोप लगाया है कि ओबीसी आयोग ने राजस्थान में गुर्जर समाज की आबादी मात्र 32 लाख दर्शाई है, जबकि वास्तविक संख्या 80 से 90 लाख के बीच है। उनके अनुसार यह रिपोर्ट हाईकोर्ट के दबाव में जल्दबाज़ी में तैयार की गई।
गुर्जर समाज पंचायत और नगर निकाय चुनावों में अलग आरक्षण क्यों माँग रहा है?
बैंसला का तर्क है कि जब तक सरकारी रिपोर्टों में समाज की सही आबादी दर्ज नहीं होती, तब तक मौजूदा आरक्षण ढाँचे में समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा। इसीलिए आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में अलग आरक्षण की माँग उठाई गई है।
पन्नाधाय की जाति को लेकर विवाद क्या है?
'भारत नारी रत्न' पुस्तक में राजस्थान की ऐतिहासिक वीरांगना पन्नाधाय की जाति का गलत उल्लेख किए जाने का आरोप है। बैंसला ने सवाल उठाया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा उनकी प्रतिमा का उद्घाटन होने के बावजूद यह त्रुटि कैसे बनी रही।
अखिल भारतीय गुर्जर महासभा कितनी पुरानी संस्था है?
महासभा की स्थापना 1908 में हुई थी, यानी यह देश की आज़ादी से भी पहले की संस्था है। संगठन जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी और असम से गुजरात तक सक्रिय बताया जाता है।
क्या यह आँकड़ों की समस्या केवल गुर्जर समाज तक सीमित है?
बैंसला के अनुसार नहीं — उन्होंने कहा कि अन्य समुदायों के साथ भी इसी तरह की गड़बड़ी हुई है। उन्होंने इसे हर समाज का गंभीर विषय बताते हुए व्यापक समीक्षा की माँग की।
राष्ट्र प्रेस
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