गुर्जर समाज की आबादी ओबीसी रिपोर्ट में 32 लाख दिखाई, बैंसला बोले — असली संख्या 80-90 लाख; अलग आरक्षण की माँग
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के महासचिव बच्चू सिंह बैंसला ने 11 अगस्त 2026 को जयपुर में आरोप लगाया कि ओबीसी आयोग ने राजस्थान में गुर्जर समुदाय की आबादी मात्र 32 लाख दर्शाई है, जबकि वास्तविक संख्या 80 से 90 लाख के बीच है। उन्होंने सरकारी दस्तावेजों में इस कथित गड़बड़ी को तत्काल सुधारने की माँग करते हुए आगामी पंचायत और नगर निकाय चुनावों में गुर्जर समाज को अलग आरक्षण दिए जाने की भी माँग उठाई।
मुख्य घटनाक्रम
बैंसला ने बताया कि अखिल भारतीय गुर्जर महासभा की स्थापना 1908 में हुई थी — यह संगठन देश की आज़ादी से भी पुराना है और जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी तथा असम से गुजरात तक सक्रिय है। उनके साथ संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रामप्रसाद धावाई भी उपस्थित थे, जिन्होंने 28 जनवरी 2023 को भीलवाड़ा के आसींद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच साझा किया था। इस अवसर पर महासभा की महिला इकाई में नई नियुक्तियाँ भी की गईं।
पन्नाधाय की जाति को लेकर आपत्ति
बैंसला ने राजस्थान की ऐतिहासिक वीरांगना पन्नाधाय की जाति के सरकारी उल्लेख पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उनके अनुसार, 'भारत नारी रत्न' नामक पुस्तक में पन्नाधाय की जाति का गलत उल्लेख किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पन्नाधाय की प्रतिमा का उद्घाटन कर चुके हैं और राष्ट्रपति, राज्यपाल सहित वरिष्ठ प्रशासकों को उनके बारे में जानकारी है, तो फिर प्रकाशित दस्तावेज़ में यह त्रुटि कैसे रह गई।
ओबीसी आयोग के आँकड़ों पर सवाल
बैंसला ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्णय के दबाव में जल्दबाज़ी में तैयार रिपोर्ट में समाजों की आबादी के आँकड़े गलत दर्शाए गए। उनके अनुसार, एक ओर आयोग स्वयं 9 प्रतिशत हिस्सेदारी की बात करता है — जो राजस्थान की कुल आबादी के हिसाब से 80-90 लाख बनती है — और दूसरी ओर रिपोर्ट में संख्या केवल 32 लाख लिखी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समस्या केवल गुर्जर समाज तक सीमित नहीं है; उन्हें जानकारी मिली है कि अन्य समुदायों के साथ भी ऐसा हुआ है।
चेतावनी और आगे की माँगें
बैंसला ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की त्रुटियाँ जारी रहीं तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि यदि यह जानबूझकर किया गया है तो यह और भी संगीन मामला है, और यदि अनजाने में हुआ है तो ऐसे लोगों को आयोग की ज़िम्मेदारी नहीं सौंपी जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने माँग की कि आने वाले पंचायत और नगर निकाय चुनावों में गुर्जर समाज को अलग से आरक्षण दिया जाए। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियाँ तेज़ हो रही हैं और ओबीसी आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है।