10 अगस्त 2026
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राजस्थान ओबीसी सर्वे रिपोर्ट जारी: 3.63 करोड़ आबादी, जाट-गुर्जर सबसे बड़े समुदाय

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राजस्थान ओबीसी सर्वे रिपोर्ट जारी: 3.63 करोड़ आबादी, जाट-गुर्जर सबसे बड़े समुदाय

सारांश

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों से पहले ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आई — और इसने साफ कर दिया कि 3.63 करोड़ की ओबीसी आबादी के भीतर असमानता कितनी गहरी है। जाट-गुर्जर जैसे समुदाय 78% सरकारी नौकरियाँ रखते हैं, जबकि 18 समुदायों के 100 से कम सरकारी कर्मचारी हैं।

मुख्य बातें

राजस्थान अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने 10 अगस्त 2026 को 92 ओबीसी समुदायों पर आधारित विस्तृत सर्वे रिपोर्ट जारी की।
राजस्थान की कुल ओबीसी आबादी 3.63 करोड़ से अधिक; जाट और जाट सिख सबसे बड़ा समूह ( 20.14% )।
शीर्ष सात समुदाय मिलकर ओबीसी आबादी का 55.14 प्रतिशत हिस्सा हैं।
3.92 लाख ओबीसी सरकारी कर्मचारियों में से 78% केवल जाट, गुर्जर, सैनी और यादव समुदाय से; 18 समुदायों के 100 से कम सरकारी कर्मचारी।
लगभग 12.50 लाख ओबीसी लोग स्वरोजगार में; कुम्हार-कुमावत (1.24 लाख) सबसे आगे।
रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय के 'ट्रिपल टेस्ट' फ्रेमवर्क पर आधारित; स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण का कानूनी आधार बनेगी।

राजस्थान सरकार ने 10 अगस्त 2026 को आगामी पंचायती राज और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले राजस्थान अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग की विस्तृत सर्वेक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी है। रिटायर्ड जस्टिस मदनलाल भाटी की अध्यक्षता में तैयार इस रिपोर्ट में 92 ओबीसी समुदायों का सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विश्लेषण किया गया है, जिसमें 'सबसे पिछड़े वर्गों' (एमबीसी) की श्रेणी के पाँच समुदाय भी शामिल हैं।

आबादी का ढाँचा

रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में कुल ओबीसी आबादी 3.63 करोड़ से अधिक है। इसमें पुरुष आबादी 1,87,50,094 (52.23 प्रतिशत) और महिला आबादी 1,71,05,082 (47.76 प्रतिशत) है। लिंगानुपात प्रति 1,000 पुरुषों पर 914 महिलाएँ दर्ज किया गया है।

आबादी के हिसाब से शीर्ष सात समुदाय मिलकर कुल ओबीसी जनसंख्या का 55.14 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। जाट और जाट सिख समुदाय सबसे बड़ा समूह है जिसकी हिस्सेदारी 20.14 प्रतिशत है। इसके बाद गुर्जर (9.11 प्रतिशत), कुम्हार और कुमावत (8.36 प्रतिशत), तथा माली, सैनी और बागवान (7.80 प्रतिशत) आते हैं। जांगिड़/सुथार की हिस्सेदारी 3.49 प्रतिशत, यादव/अहीर की 3.22 प्रतिशत और मेव समुदाय की 3.02 प्रतिशत है।

सरकारी नौकरियों में असमान प्रतिनिधित्व

सर्वे में सरकारी सेवाओं में गहरी असमानता उजागर हुई है। राजस्थान में कुल 3.92 लाख ओबीसी सरकारी कर्मचारी हैं, जिनमें से जाट, गुर्जर, सैनी और यादव समुदाय मिलकर लगभग 78 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। दूसरी ओर, 18 ओबीसी समुदायों में से प्रत्येक के सरकारी सेवा में 100 से भी कम सदस्य हैं।

यह आँकड़ा इस बात को रेखांकित करता है कि ओबीसी श्रेणी के भीतर ही प्रतिनिधित्व की खाई कितनी गहरी है। रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि जाँच केवल आबादी के आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक भागीदारी के संदर्भ में भी होनी चाहिए।

स्वरोजगार और श्रम भागीदारी

रिपोर्ट के अनुसार, ओबीसी समुदायों के लगभग 12.50 लाख लोग स्वरोजगार में लगे हैं। प्रमुख समुदायों में कुम्हार-कुमावत (1.24 लाख), जाट (1.21 लाख), माली-सैनी (1.15 लाख) और जांगिड़ (85,114) शामिल हैं। दिहाड़ी मजदूरी और श्रम क्षेत्र में भी कुम्हार-कुमावत और सैनी समुदायों की उल्लेखनीय भागीदारी दर्ज की गई है।

सुप्रीम कोर्ट के 'ट्रिपल टेस्ट' से जुड़ाव

यह रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय के 'ट्रिपल टेस्ट' फ्रेमवर्क के अनुसार तैयार की गई है। आयोग के निष्कर्ष राजस्थान की पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण निर्धारित करने के लिए कानूनी आधार बनाने में सहायक होंगे। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण के लिए अनुभवजन्य डेटा की अनिवार्यता पहले ही स्पष्ट कर दी है।

आगे की राह

अधिकारियों के अनुसार, आयोग के निष्कर्षों का आरक्षण प्रक्रिया और जमीनी स्तर पर समावेशी प्रतिनिधित्व को मजबूत करने पर सीधा असर पड़ेगा। रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि जिन समुदायों की राजनीतिक और आर्थिक भागीदारी ऐतिहासिक रूप से कम रही है, उन्हें लक्षित नीतिगत हस्तक्षेप की जरूरत है। अब सरकार के सामने चुनौती यह है कि इस डेटा को समयबद्ध और न्यायसंगत आरक्षण नीति में कैसे बदला जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि आर्थिक और सामाजिक स्तर पर गहरे विभाजित 92 समुदायों का समूह है। जब जाट, गुर्जर जैसे प्रभावशाली समुदाय 78% सरकारी नौकरियाँ रखते हों और 18 समुदायों के 100 से कम सरकारी कर्मचारी हों, तो एकसमान आरक्षण नीति वास्तव में कमजोर समुदायों की मदद कम और पहले से स्थापित समुदायों को लाभ अधिक पहुँचाती है। असली परीक्षा यह है कि सरकार इस डेटा का उपयोग उप-वर्गीकरण की दिशा में करती है या इसे केवल चुनावी वैधता के लिए इस्तेमाल करती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान ओबीसी सर्वे रिपोर्ट 2026 क्या है?
यह रिटायर्ड जस्टिस मदनलाल भाटी की अध्यक्षता वाले राजस्थान अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग द्वारा 92 ओबीसी समुदायों पर किया गया व्यापक सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सर्वेक्षण है। इसे 10 अगस्त 2026 को पंचायती राज और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले जारी किया गया।
राजस्थान में ओबीसी की कुल आबादी कितनी है?
आयोग की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में कुल ओबीसी आबादी 3.63 करोड़ से अधिक है, जिसमें पुरुष 1,87,50,094 (52.23%) और महिलाएँ 1,71,05,082 (47.76%) हैं। लिंगानुपात प्रति 1,000 पुरुषों पर 914 महिलाएँ है।
राजस्थान में ओबीसी सरकारी नौकरियों में कौन से समुदाय सबसे आगे हैं?
सर्वे के अनुसार राजस्थान में 3.92 लाख ओबीसी सरकारी कर्मचारियों में से लगभग 78% केवल जाट, गुर्जर, सैनी और यादव समुदाय से हैं। दूसरी ओर, 18 ओबीसी समुदायों में से प्रत्येक के सरकारी सेवा में 100 से भी कम सदस्य हैं।
यह रिपोर्ट पंचायत और निकाय चुनावों से क्यों जुड़ी है?
सर्वोच्च न्यायालय के 'ट्रिपल टेस्ट' फ्रेमवर्क के तहत स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण देने के लिए अनुभवजन्य डेटा अनिवार्य है। यह रिपोर्ट उसी कानूनी आवश्यकता को पूरा करती है और आगामी पंचायती राज तथा शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण का आधार बनेगी।
ओबीसी समुदायों में स्वरोजगार की स्थिति कैसी है?
रिपोर्ट के अनुसार लगभग 12.50 लाख ओबीसी लोग स्वरोजगार में लगे हैं। इनमें कुम्हार-कुमावत (1.24 लाख), जाट (1.21 लाख), माली-सैनी (1.15 लाख) और जांगिड़ (85,114) प्रमुख हैं।
राष्ट्र प्रेस
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