3 सितंबर 2026
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राजस्थान हाईकोर्ट का सरकार को नोटिस: 41 जिला प्रमुख पदों पर भी ओबीसी सीटें 5 ही क्यों?

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राजस्थान हाईकोर्ट का सरकार को नोटिस: 41 जिला प्रमुख पदों पर भी ओबीसी सीटें 5 ही क्यों?

सारांश

राजस्थान में जिला पुनर्गठन के बाद जिला प्रमुख पद 33 से बढ़कर 41 हो गए, लेकिन ओबीसी आरक्षित सीटें 5 पर ही अटकी हैं। हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा — यह असंगति क्यों? 8 सितंबर की सुनवाई अहम होगी।

मुख्य बातें

राजस्थान हाईकोर्ट ने 3 सितंबर 2026 को ओबीसी जिला प्रमुख आरक्षण मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया।
जिला प्रमुख पदों की संख्या 33 से बढ़कर 41 हुई, लेकिन ओबीसी आरक्षित पद 5 पर ही स्थिर हैं।
याचिकाकर्ता राधेराम गोदारा की माँग — 41 पदों पर ओबीसी सीटें 7 होनी चाहिए, 50% संवैधानिक सीमा के भीतर।
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को सरकार ने अब तक सार्वजनिक नहीं किया।
मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को जस्टिस अनूप ढांड की पीठ के समक्ष होगी।

राजस्थान हाईकोर्ट ने 3 सितंबर 2026 को आगामी पंचायती राज चुनावों में जिला प्रमुख पदों पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण की संख्या को चुनौती देने वाली याचिका पर राजस्थान सरकार से जवाब तलब किया है। जस्टिस अनूप ढांड की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।

मुख्य विवाद क्या है

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एक केंद्रीय सवाल उठाया: जब जिला प्रमुख पदों की कुल संख्या 33 से बढ़कर 41 हो गई है, तो ओबीसी के लिए आरक्षित पदों की संख्या 5 पर ही स्थिर क्यों है? 2020 में कुल 33 पदों में से 5 पद ओबीसी के लिए आरक्षित थे, जो कि लगभग 18 प्रतिशत आरक्षण था। अब जिलों के पुनर्गठन के बाद पद बढ़कर 41 हो जाने के बावजूद ओबीसी आरक्षण 5 पदों पर ही सीमित है — जो अनुपात में गिरकर लगभग 16 प्रतिशत रह गया है।

याचिकाकर्ता के तर्क

राधेराम गोदारा की ओर से अधिवक्ता अरविंद शर्मा और आनंद शर्मा ने दलील दी कि नए जिलों के गठन के बाद लागू नियमों के तहत ओबीसी आरक्षण की नए सिरे से गणना अनिवार्य थी। उनकी गणना के अनुसार 41 पदों में ओबीसी आरक्षित जिला प्रमुख पदों की संख्या 7 होनी चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि वे कुल आरक्षण को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत की संवैधानिक सीमा के भीतर रखते हुए आनुपातिक पुनर्गणना की माँग कर रहे हैं।

ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर सवाल

याचिका में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, सरकार ने आयोग की रिपोर्ट को अब तक सार्वजनिक नहीं किया है। याचिका में मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए यह भी कहा गया है कि सरकार स्वयं भी इस रिपोर्ट को पूरी तरह सटीक नहीं मानती। यह ऐसे समय में आया है जब पंचायती राज चुनावों की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं और आरक्षण की वैधता पर न्यायिक स्पष्टता की माँग बढ़ रही है।

कोर्ट का निर्देश और अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील को पंचायती राज विभाग का प्रतिनिधित्व कर रहे एडिशनल एडवोकेट जनरल और सरकारी वकील को याचिका की एक प्रति सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अभी तक इन दावों पर कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है। मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को निर्धारित है, जब सरकार को अपना पक्ष रखना होगा।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह मामला केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है — देशभर में जिला पुनर्गठन के बाद पंचायती राज संस्थाओं में ओबीसी आरक्षण की पुनर्गणना का सवाल कई राज्यों में उठ चुका है। 8 सितंबर की सुनवाई में सरकार का जवाब यह तय करेगा कि क्या आरक्षण की नए सिरे से गणना होगी या मौजूदा व्यवस्था बरकरार रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह तय करेगी कि पुनर्गठित जिलों में ओबीसी प्रतिनिधित्व की गणना का कानूनी ढाँचा क्या होगा।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान हाईकोर्ट ने ओबीसी जिला प्रमुख आरक्षण मामले में क्या आदेश दिया?
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है कि जिला प्रमुख पदों की संख्या 33 से 41 होने के बाद भी ओबीसी आरक्षित सीटें 5 पर क्यों स्थिर हैं। कोर्ट ने अभी कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है।
याचिकाकर्ता राधेराम गोदारा की मुख्य माँग क्या है?
याचिकाकर्ता की माँग है कि 41 जिला प्रमुख पदों पर ओबीसी आरक्षित सीटों की नए सिरे से गणना हो और संख्या 5 से बढ़ाकर 7 की जाए। यह गणना सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत की संवैधानिक सीमा के भीतर रखी जाए।
जिला प्रमुख पदों की संख्या 33 से 41 कैसे हुई?
राजस्थान में जिलों के पुनर्गठन और नए जिलों के गठन के बाद जिला प्रमुख पदों की कुल संख्या 33 से बढ़कर 41 हो गई। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस बदलाव के साथ ओबीसी आरक्षण की पुनर्गणना भी लागू नियमों के तहत अनिवार्य थी।
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को लेकर विवाद क्यों है?
याचिका के अनुसार, राजस्थान सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को अब तक सार्वजनिक नहीं किया है। मीडिया रिपोर्टों के हवाले से याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा है कि सरकार स्वयं इस रिपोर्ट को पूरी तरह सटीक नहीं मानती।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
राजस्थान हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को जस्टिस अनूप ढांड की पीठ के समक्ष होगी, जब राज्य सरकार को अपना पक्ष रखना होगा।
राष्ट्र प्रेस
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