राजस्थान हाईकोर्ट का सरकार को नोटिस: 41 जिला प्रमुख पदों पर भी ओबीसी सीटें 5 ही क्यों?
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान हाईकोर्ट ने 3 सितंबर 2026 को आगामी पंचायती राज चुनावों में जिला प्रमुख पदों पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण की संख्या को चुनौती देने वाली याचिका पर राजस्थान सरकार से जवाब तलब किया है। जस्टिस अनूप ढांड की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।
मुख्य विवाद क्या है
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एक केंद्रीय सवाल उठाया: जब जिला प्रमुख पदों की कुल संख्या 33 से बढ़कर 41 हो गई है, तो ओबीसी के लिए आरक्षित पदों की संख्या 5 पर ही स्थिर क्यों है? 2020 में कुल 33 पदों में से 5 पद ओबीसी के लिए आरक्षित थे, जो कि लगभग 18 प्रतिशत आरक्षण था। अब जिलों के पुनर्गठन के बाद पद बढ़कर 41 हो जाने के बावजूद ओबीसी आरक्षण 5 पदों पर ही सीमित है — जो अनुपात में गिरकर लगभग 16 प्रतिशत रह गया है।
याचिकाकर्ता के तर्क
राधेराम गोदारा की ओर से अधिवक्ता अरविंद शर्मा और आनंद शर्मा ने दलील दी कि नए जिलों के गठन के बाद लागू नियमों के तहत ओबीसी आरक्षण की नए सिरे से गणना अनिवार्य थी। उनकी गणना के अनुसार 41 पदों में ओबीसी आरक्षित जिला प्रमुख पदों की संख्या 7 होनी चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि वे कुल आरक्षण को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत की संवैधानिक सीमा के भीतर रखते हुए आनुपातिक पुनर्गणना की माँग कर रहे हैं।
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर सवाल
याचिका में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, सरकार ने आयोग की रिपोर्ट को अब तक सार्वजनिक नहीं किया है। याचिका में मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए यह भी कहा गया है कि सरकार स्वयं भी इस रिपोर्ट को पूरी तरह सटीक नहीं मानती। यह ऐसे समय में आया है जब पंचायती राज चुनावों की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं और आरक्षण की वैधता पर न्यायिक स्पष्टता की माँग बढ़ रही है।
कोर्ट का निर्देश और अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील को पंचायती राज विभाग का प्रतिनिधित्व कर रहे एडिशनल एडवोकेट जनरल और सरकारी वकील को याचिका की एक प्रति सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अभी तक इन दावों पर कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है। मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को निर्धारित है, जब सरकार को अपना पक्ष रखना होगा।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह मामला केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है — देशभर में जिला पुनर्गठन के बाद पंचायती राज संस्थाओं में ओबीसी आरक्षण की पुनर्गणना का सवाल कई राज्यों में उठ चुका है। 8 सितंबर की सुनवाई में सरकार का जवाब यह तय करेगा कि क्या आरक्षण की नए सिरे से गणना होगी या मौजूदा व्यवस्था बरकरार रहेगी।