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पोलावरम 'प्रचार' पर जगन का चंद्रबाबू को जवाब: 41.15 मीटर पर रुका पानी, 45.72 मीटर FRL का सवाल

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पोलावरम 'प्रचार' पर जगन का चंद्रबाबू को जवाब: 41.15 मीटर पर रुका पानी, 45.72 मीटर FRL का सवाल

सारांश

जगन मोहन रेड्डी ने एक्स पर चंद्रबाबू नायडू पर सीधा हमला बोला — पुरुषोत्तमपट्टनम के पुराने पंपों से आ रहे 3,500 क्यूसेक पानी को पोलावरम की उपलब्धि बताना 'प्रचार' है। 45.72 मीटर FRL बनाम 41.15 मीटर की असली लड़ाई में आंध्र की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना का भविष्य दाँव पर है।

मुख्य बातें

वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 3 सितंबर को एक्स पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर पोलावरम परियोजना के नाम पर 'प्रचार' का आरोप लगाया।
पुरुषोत्तमपट्टनम परियोजना के पुराने पंपों से 3,500 क्यूसेक पानी पोलावरम लेफ्ट मेन कैनाल में छोड़ा जा रहा है, जिसे सरकार पोलावरम की उपलब्धि बता रही है।
पोलावरम का निर्धारित FRL 45.72 मीटर है, लेकिन कथित तौर पर पानी का भंडारण 41.15 मीटर तक ही सीमित है।
जगन का दावा है कि लेफ्ट मेन कैनाल के 79% बड़े कार्य वाईएस राजशेखर रेड्डी के कार्यकाल में पूरे हो चुके थे।
उत्तरांध्र सुजला श्रवंती परियोजना के लिए 2009 में ₹7,214.10 करोड़ और 2022 में संशोधित ₹17,050.20 करोड़ की मंजूरी दी गई थी।
जगन ने चंद्रबाबू से परियोजना को 45.72 मीटर FRL तक पूरा करने और विस्थापितों के पुनर्वास पैकेज पर स्थिति स्पष्ट करने की माँग की।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 3 सितंबर को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर आरोप लगाया कि उनकी सरकार पुरुषोत्तमपट्टनम परियोजना के पहले से स्थापित पंपों के ज़रिए गोदावरी का पानी पोलावरम लेफ्ट मेन कैनाल में प्रवाहित कर इसे पोलावरम परियोजना की उपलब्धि के रूप में प्रचारित कर रही है। जगन का कहना है कि यह पानी पोलावरम जलाशय से गुरुत्वाकर्षण द्वारा नहीं, बल्कि पुरानी लिफ्ट व्यवस्था से आ रहा है — और इसे नई सफलता बताना भ्रामक है।

प्रचार बनाम हकीकत: पुरुषोत्तमपट्टनम पंपों का विवाद

जगन मोहन रेड्डी ने अपने एक्स पोस्ट में स्पष्ट किया कि पुरुषोत्तमपट्टनम से लगभग 3,500 क्यूसेक पानी पंप किया जा रहा है और इसके लिए उपयोग में लाई जा रही व्यवस्था नई नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि यदि पानी पोलावरम जलाशय से गुरुत्वाकर्षण के ज़रिए नहीं आ रहा, तो इसे पोलावरम परियोजना की उपलब्धि बताकर प्रचार क्यों किया जा रहा है। उनके अनुसार, यह आम जनता को गुमराह करने की कोशिश है।

गौरतलब है कि पोलावरम परियोजना का निर्धारित फुल रिजर्वायर लेवल (FRL) 45.72 मीटर है, जबकि जगन के अनुसार अभी पानी के भंडारण को 41.15 मीटर तक ही सीमित रखा जा रहा है। उन्होंने पूछा कि इस स्थिति में परियोजना अपनी पूरी क्षमता के साथ कैसे संचालित होगी।

2014-19 के कार्यकाल पर गंभीर आरोप

जगन ने 2014 से 2019 के बीच चंद्रबाबू नायडू की सरकार के कार्यकाल में पोलावरम परियोजना के क्रियान्वयन पर कथित गलत योजना, कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उनका दावा है कि उस दौरान स्पिलवे और कॉफ़रडैम का काम पूरा किए बिना ही डायफ्राम वॉल का निर्माण शुरू कर दिया गया था।

जगन के अनुसार, बाढ़ के दौरान अधूरे स्पिलवे और कॉफ़रडैम के कारण नदी के पानी का प्रबंधन ठीक से नहीं हो पाया, जिससे पानी परियोजना के संवेदनशील हिस्सों तक पहुँचा और मुख्य बांध की नींव तथा डायफ्राम वॉल को नुकसान पहुँचने का दावा उन्होंने किया।

वाईएसआर के कार्यकाल की विरासत और जगन सरकार का दावा

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पोलावरम लेफ्ट मेन कैनाल से जुड़े लगभग 79 प्रतिशत बड़े कार्य उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी के कार्यकाल में ही पूरे हो चुके थे। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार इसी पुराने ढाँचे का उपयोग कर अपनी उपलब्धि का प्रचार कर रही है।

जगन ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने सत्ता में आने के बाद पहले अप्रोच चैनल, स्पिल चैनल, स्पिलवे और कॉफ़रडैम से जुड़े कार्यों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित किया और इसके बाद मुख्य बांध के कठिन कार्यों को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया।

उत्तरांध्र सुजला श्रवंती: ₹17,050 करोड़ की परियोजना पर सवाल

जगन ने अपने बयान में उत्तरांध्र सुजला श्रवंती परियोजना का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि वाईएस राजशेखर रेड्डी सरकार ने वर्ष 2009 में इस परियोजना के लिए ₹7,214.10 करोड़ की प्रशासनिक मंजूरी दी थी, और उनकी सरकार ने वर्ष 2022 में संशोधित अनुमानित लागत ₹17,050.20 करोड़ करते हुए नई प्रशासनिक मंजूरी दी।

जगन ने आरोप लगाया कि चंद्रबाबू नायडू सरकार ने सत्ता में आने के बाद इस परियोजना को प्राथमिकता नहीं दी और उत्तरी आंध्र के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता केवल भाषणों तक सीमित दिखाई देती है। उनके अनुसार, केवल पुरुषोत्तमपट्टनम पंपों के ज़रिए पानी उपलब्ध कराना उत्तरांध्र के विकास और सिंचाई के लिए पर्याप्त नहीं है।

जगन की माँग: ड्रामा बंद, निर्माण पर ध्यान

पूर्व मुख्यमंत्री ने चंद्रबाबू नायडू से पोलावरम परियोजना को लेकर 'ड्रामा' बंद करने और निर्माण कार्य पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की। उन्होंने माँग की कि परियोजना को निर्धारित 45.72 मीटर FRL तक पूरा किया जाए, ताकि दाईं और बाईं मुख्य नहरों के माध्यम से गुरुत्वाकर्षण आधारित सिंचाई एवं जलापूर्ति संभव हो सके।

जगन का तर्क है कि ऐसा होने पर पुरुषोत्तमपट्टनम और पुष्करा जैसी लिफ्ट योजनाओं पर निर्भरता कम होगी और विस्थापित परिवारों के पुनर्वास पैकेज भुगतान सहित केंद्र से मिलने वाली वित्तीय सहायता की स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए। यह टकराव आंध्र प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना को लेकर राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह है कि 45.72 मीटर FRL का लक्ष्य कब और कैसे हासिल होगा। विस्थापित परिवारों के पुनर्वास, केंद्रीय वित्तपोषण की अनिश्चितता और निर्माण की धीमी गति — ये तीनों मुद्दे किसी एक सरकार की देन नहीं हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है वह यह है कि 41.15 मीटर बनाम 45.72 मीटर का अंतर केवल तकनीकी नहीं, बल्कि लाखों किसानों की सिंचाई और पेयजल का सीधा सवाल है — और इस पर दोनों दलों को जवाबदेही से नहीं बचना चाहिए।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जगन मोहन रेड्डी ने पोलावरम परियोजना पर चंद्रबाबू नायडू पर क्या आरोप लगाए?
जगन मोहन रेड्डी ने आरोप लगाया कि चंद्रबाबू नायडू सरकार पुरुषोत्तमपट्टनम परियोजना के पुराने पंपों से 3,500 क्यूसेक पानी पोलावरम लेफ्ट मेन कैनाल में छोड़कर इसे पोलावरम परियोजना की उपलब्धि बताकर प्रचार कर रही है। उनके अनुसार यह पानी पोलावरम जलाशय से गुरुत्वाकर्षण द्वारा नहीं आ रहा, इसलिए इसे परियोजना की सफलता कहना भ्रामक है।
पोलावरम परियोजना का FRL विवाद क्या है?
पोलावरम परियोजना का निर्धारित फुल रिजर्वायर लेवल (FRL) 45.72 मीटर है, लेकिन जगन के अनुसार अभी पानी का भंडारण 41.15 मीटर तक ही सीमित रखा जा रहा है। इस अंतर के कारण परियोजना अपनी पूरी क्षमता के अनुरूप सिंचाई और जलापूर्ति नहीं कर पा रही।
उत्तरांध्र सुजला श्रवंती परियोजना क्या है और इसकी लागत कितनी है?
उत्तरांध्र सुजला श्रवंती परियोजना उत्तरी आंध्र प्रदेश के विकास और सिंचाई के लिए बनाई गई एक सिंचाई योजना है। वाईएस राजशेखर रेड्डी सरकार ने 2009 में ₹7,214.10 करोड़ की प्रशासनिक मंजूरी दी थी, जिसे जगन सरकार ने 2022 में संशोधित कर ₹17,050.20 करोड़ किया।
2014-19 में पोलावरम परियोजना के क्रियान्वयन पर जगन के क्या आरोप हैं?
जगन ने आरोप लगाया कि 2014-19 के चंद्रबाबू नायडू कार्यकाल में स्पिलवे और कॉफ़रडैम का काम पूरा किए बिना डायफ्राम वॉल का निर्माण शुरू किया गया। उनके अनुसार इससे बाढ़ के दौरान मुख्य बांध की नींव और डायफ्राम वॉल को नुकसान पहुँचा।
पोलावरम परियोजना के पूरा होने पर क्या फायदे होंगे?
जगन के अनुसार, परियोजना को 45.72 मीटर FRL तक पूरा होने पर दाईं और बाईं मुख्य नहरों के ज़रिए गुरुत्वाकर्षण आधारित सिंचाई और जलापूर्ति संभव हो सकेगी। इससे पुरुषोत्तमपट्टनम और पुष्करा जैसी लिफ्ट योजनाओं पर निर्भरता कम होगी और व्यापक क्षेत्र को लाभ मिलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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