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विजाग में डेटा सेंटरों से पानी संकट नहीं: CM चंद्रबाबू नायडू ने पोलावरम कैनाल से किया गोदावरी जल का उद्घाटन

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विजाग में डेटा सेंटरों से पानी संकट नहीं: CM चंद्रबाबू नायडू ने पोलावरम कैनाल से किया गोदावरी जल का उद्घाटन

सारांश

विशाखापत्तनम में डेटा सेंटर बनेंगे, पर पानी नहीं जाएगा — CM चंद्रबाबू नायडू ने पोलावरम कैनाल उद्घाटन पर यह दावा किया। 500 टीएमसी की क्षमता के मुकाबले डेटा सेंटरों को चाहिए सिर्फ 5 टीएमसी। ₹4,192 करोड़ की इस परियोजना से 9.23 लाख लोगों को पेयजल और 2.87 लाख एकड़ को सिंचाई मिलेगी।

मुख्य बातें

CM चंद्रबाबू नायडू ने 2 सितंबर 2026 को कहा कि विशाखापत्तनम के डेटा सेंटरों से पानी की कोई कमी नहीं होगी।
पोलावरम नहर से 500 टीएमसी तक पानी लाने की क्षमता; सभी पाँच डेटा सेंटरों को मिलाकर केवल 5 टीएमसी की जरूरत।
पोलावरम लेफ्ट मेन कैनाल पर अब तक ₹4,192 करोड़ खर्च; शेष कार्य के लिए ₹800 करोड़ और आवंटित।
लेफ्ट कैनाल से 2.87 लाख एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई और 9.23 लाख लोगों को पेयजल की योजना।
विशाखापत्तनम व अनाकापल्ली जिलों में 23.44 टीएमसी पानी डायवर्ट करने की योजना।
नायडू ने वाईएसआरसीपी पर डेटा सेंटर-जल विवाद पर भ्रामक प्रचार करने का आरोप लगाया।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 2 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि विशाखापत्तनम में प्रस्तावित डेटा सेंटरों के निर्माण से क्षेत्र में पानी की कोई कमी नहीं होगी। पोलावरम लेफ्ट मेन कैनाल के उद्घाटन और अनाकापल्ली में गोदावरी का पानी छोड़े जाने के अवसर पर उन्होंने यह आश्वासन दिया। नायडू ने विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) पर इस मुद्दे पर भ्रामक प्रचार करने का आरोप भी लगाया।

पानी की उपलब्धता पर मुख्यमंत्री का स्पष्टीकरण

मुख्यमंत्री नायडू ने कहा कि सरकार पोलावरम नहर के माध्यम से गोदावरी से विशाखापत्तनम तक 500 टीएमसी तक पानी लाने में सक्षम है, जबकि सभी पाँच प्रस्तावित डेटा सेंटरों को मिलाकर केवल 5 टीएमसी पानी की आवश्यकता होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस क्षेत्र में अब 50, 100 या 500 टीएमसी तक पानी पहुँचाने की क्षमता विकसित हो चुकी है।

उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट के उद्घाटन के बाद पोलावरम नहर से प्रारंभिक रूप से 2 टीएमसी पानी लाया जाएगा, लेकिन यह कोई अंतिम सीमा नहीं है। एक बार पोलावरम परियोजना पूर्ण होने और पानी गुरुत्वाकर्षण से बहने लगने के बाद विशाखापत्तनम में जल संकट की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी।

पोलावरम लेफ्ट कैनाल: निर्माण और खर्च

मुख्यमंत्री ने बताया कि पोलावरम लेफ्ट कैनाल के निर्माण पर अब तक ₹4,192 करोड़ व्यय किए जा चुके हैं और शेष कार्य के लिए अतिरिक्त ₹800 करोड़ खर्च किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि येलेरू कैनाल पर साइफन तथा पम्पा, तांडव और वराह नदियों पर एक्वाडक्ट का निर्माण पूरा हो चुका है। तल्लापालेम में भूमि विवाद सुलझा लिया गया है और विस्थापित परिवारों का पुनर्वास भी संपन्न हुआ है।

अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि विशाखापत्तनम और अनाकापल्ली जिलों में औद्योगिक, पेयजल और सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने के लिए 23.44 टीएमसी पानी को डायवर्ट करने की योजना तैयार की गई है।

आम जनता और किसानों पर असर

सरकार की योजना के अनुसार, लेफ्ट कैनाल में छोड़े गए पानी से पूर्वी गोदावरी, काकीनाडा, कोनासीमा और अनाकापल्ली जिलों में 2.87 लाख एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई और 9.23 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोदावरी का पानी उत्तरी आंध्र तक पहुँच गया है और इस क्षेत्र की बंजर ज़मीन अब उपजाऊ कृषि भूमि में तब्दील होगी।

उन्होंने पायकाराओपेटा क्रॉस रेगुलेटर पर 'जल आरती' कर गोदावरी के पानी का पारंपरिक स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि अगले वर्ष गोदावरी का जल सिम्हाचलम में भगवान वराह नरसिम्हा के चरणों में और अरासावल्ली में श्री सूर्यनारायण स्वामी तक पहुँचाया जाएगा, और इसे आगे वमसाधारा तक ले जाने की भी योजना है।

विपक्ष पर आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री नायडू ने आरोप लगाया कि वाईएसआरसीपी डेटा सेंटरों और पानी की कमी को लेकर भ्रामक प्रचार कर रही है और राज्य में हो रहे विकास कार्यों का श्रेय लेने का प्रयास कर रही है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे इस परियोजना के दीर्घकालिक लाभों को समझें और भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें।

क्या होगा आगे

पोलावरम परियोजना के पूर्ण होने के बाद गुरुत्वाकर्षण-आधारित जल प्रवाह से विशाखापत्तनम और उत्तरी आंध्र के जिलों में जल आपूर्ति स्थायी रूप से सुनिश्चित होने की उम्मीद है। गोदावरी नदी — जो अपनी तीन सहायक नदियों गौतमी, वशिष्ठ और वैनतेय के माध्यम से समुद्र तक पहुँचती है — अब पोलावरम लेफ्ट कैनाल के जरिए अनाकापल्ली तक पहुँच चुकी है, जो इस क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक जल-प्रबंधन उपलब्धि मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि पोलावरम परियोजना — जो दशकों से निर्माणाधीन है — कब तक पूरी तरह चालू होगी और क्या डेटा सेंटरों की समय-सीमा उस पूर्णता से मेल खाती है। गौरतलब है कि पोलावरम को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा मिलने के बाद भी इसकी समय-सीमाएँ बार-बार खिसकती रही हैं। विपक्ष की चिंताएँ भले ही राजनीति से प्रेरित हों, परंतु जल-वितरण की प्राथमिकता — कृषि बनाम उद्योग — एक वैध नीतिगत प्रश्न है जिसका उत्तर केवल क्षमता के आँकड़ों से नहीं, बल्कि बाध्यकारी जल-आवंटन नीति से मिलना चाहिए।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विशाखापत्तनम के डेटा सेंटरों को कितना पानी चाहिए और सरकार कहाँ से देगी?
मुख्यमंत्री नायडू के अनुसार, सभी पाँच प्रस्तावित डेटा सेंटरों को मिलाकर लगभग 5 टीएमसी पानी की आवश्यकता होगी। यह पानी पोलावरम नहर के माध्यम से गोदावरी नदी से लाया जाएगा, जिसकी क्षमता 500 टीएमसी तक है।
पोलावरम लेफ्ट मेन कैनाल परियोजना पर कितना खर्च हुआ है?
पोलावरम लेफ्ट मेन कैनाल के निर्माण पर अब तक ₹4,192 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। शेष कार्य पूरा करने के लिए अतिरिक्त ₹800 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
पोलावरम कैनाल से किन जिलों को फायदा होगा?
पूर्वी गोदावरी, काकीनाडा, कोनासीमा और अनाकापल्ली जिलों में 2.87 लाख एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई और 9.23 लाख लोगों को पेयजल मिलने की योजना है। विशाखापत्तनम और अनाकापल्ली जिलों में औद्योगिक जरूरतों के लिए 23.44 टीएमसी पानी डायवर्ट करने की भी योजना है।
वाईएसआरसीपी ने डेटा सेंटर और पानी के मुद्दे पर क्या आरोप लगाए हैं?
वाईएसआरसीपी ने आरोप लगाया है कि डेटा सेंटरों के कारण विशाखापत्तनम में पानी की कमी होगी। मुख्यमंत्री नायडू ने इन आरोपों को भ्रामक बताते हुए खारिज किया और कहा कि विपक्षी पार्टी राज्य के विकास कार्यों का श्रेय लेने की कोशिश कर रही है।
CM चंद्रबाबू नायडू ने गोदावरी जल को आगे कहाँ तक पहुँचाने की योजना बताई?
नायडू ने कहा कि अगले वर्ष गोदावरी का पानी सिम्हाचलम में भगवान वराह नरसिम्हा के चरणों में और अरासावल्ली में श्री सूर्यनारायण स्वामी तक पहुँचाया जाएगा। इसके अलावा गोदावरी जल को वमसाधारा तक विस्तारित करने की भी योजना है।
राष्ट्र प्रेस
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