हरदीप सिंह पुरी बोले — PM मोदी अद्वितीय नेता, नेहरू से लंबा कार्यकाल पूरा कर रचा इतिहास
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 10 जून 2026 को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से अधिक लंबा कार्यकाल पूरा कर ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। पुरी ने कहा कि मोदी के 12 वर्षों के नेतृत्व में उन्होंने विकास परियोजनाओं की निगरानी व्यक्तिगत स्तर पर की, जो उन्हें अन्य नेताओं से अलग करती है।
मंत्री पुरी का व्यक्तिगत अनुभव
हरदीप पुरी ने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल में मैं नौ वर्षों से उनकी टीम का हिस्सा रहा हूं। मैंने भारत में कई प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया है और अन्य देशों के राजनीतिक नेतृत्व को भी करीब से देखा है। आज तक मैंने ऐसा कोई व्यक्ति नहीं देखा, जिसके पास प्रधानमंत्री मोदी जैसा व्यापक ज्ञान हो।' उन्होंने विकास से जुड़े विषयों पर मोदी की समझ और मार्गदर्शन क्षमता को 'अद्वितीय' बताया।
गुजरात से राष्ट्रीय नीतियों तक की यात्रा
मंत्री ने उदाहरण देते हुए बताया कि वर्ष 2014 में शुरू की गई कई केंद्रीय योजनाओं की नींव मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए पहले ही रख दी थी। स्वच्छता अभियान और शहरी विकास से जुड़ी पहलें गुजरात में छोटे स्तर पर लागू की गई थीं, जिन्हें बाद में राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार दिया गया। पुरी ने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय से 'विकसित भारत' की दिशा में तेज़ी लाने का विचार मोदी का मौलिक दृष्टिकोण रहा है।
परियोजना निगरानी की अनूठी व्यवस्था
पुरी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी पहले ऐसे नेता हैं जिन्होंने वरिष्ठ स्तर पर स्वयं परियोजनाओं की निगरानी की व्यवस्था को मजबूत किया। हर महीने होने वाली प्रगति समीक्षा बैठकों में वे विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों के साथ बैठकर परियोजनाओं की समीक्षा करते हैं। यदि किसी क्षेत्र में विशेषज्ञता की कमी दिखे, तो वे उद्योग जगत के विशेषज्ञों से सहयोग लेने की सलाह देते हैं।
ऊर्जा और खनन क्षेत्र में बड़े बदलाव
ऊर्जा क्षेत्र में हुए कार्यों का उल्लेख करते हुए पुरी ने बताया कि प्राकृतिक गैस, एलपीजी उपभोक्ताओं को पाइप्ड गैस नेटवर्क से जोड़ने और अन्वेषण एवं उत्पादन नीति में बदलाव के लिए उद्योग जगत के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया गया। खनन क्षेत्र में उन्होंने बताया कि देश के सेडिमेंटरी बेसिन के लगभग 35 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से करीब 10 लाख वर्ग किलोमीटर में पहले अन्वेषण की अनुमति नहीं थी। रक्षा मंत्रालय, नौसेना, तटरक्षक बल और DRDO की आपत्तियों के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत रुचि से नीतिगत बदलाव संभव हो सके।
ड्रोन नीति और तकनीकी दूरदर्शिता
मंत्री ने ड्रोन तकनीक का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब वे नागरिक उड्डयन मंत्रालय से जुड़े थे, तब सुरक्षा एजेंसियों ने ड्रोन संचालन की अनुमति देने पर आशंकाएँ जताई थीं। बावजूद इसके, मोदी के नेतृत्व में भारत ने ड्रोन क्षेत्र में आगे बढ़ने का निर्णय लिया। यह घटनाक्रम इस बात का प्रतीक है कि मोदी सरकार तकनीकी नवाचार को नौकरशाही बाधाओं से ऊपर रखती है।