मोदी ने नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ा: सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित PM, एनडीए में जश्न
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं — एक ऐसा मील का पत्थर जिसने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं को उत्साह से भर दिया है। पटना से लेकर जम्मू-कश्मीर तक, गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं ने इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री की जनस्वीकृति और लगातार जनादेश का प्रमाण बताया।
जदयू और बिहार सरकार की प्रतिक्रिया
जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद देवेशचंद्र ठाकुर ने कहा कि यह एनडीए और समस्त देशवासियों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमारे एनडीए के नेता हैं और पूरे देश के नेता हैं। अगर उन्होंने सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद का कार्यकाल संभाला है, तो इससे साफ है कि पूरे देश ने उन्हें उस तरह का समर्थन दिया है। देश उनके काम को पसंद कर रहा है।'
बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने भी मोदी को बधाई देते हुए इसे पूरे एनडीए परिवार के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा, 'वे लोकप्रिय प्रधानमंत्री हैं और उन्होंने रिकॉर्ड बनाया है। यह पूरे एनडीए के लिए गौरव की बात है।'
केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेताओं की राय
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि विपक्ष को प्रधानमंत्री मोदी के कामकाज के तरीके को गंभीरता से समझना चाहिए और उसे अपनाने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'वे विकास में विश्वास रखते हैं और 2014, 2019 तथा 2024 के चुनावों में लोगों ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को वोट दिया, क्योंकि देश का आम नागरिक विकास चाहता है।'
जम्मू-कश्मीर भाजपा के महासचिव अशोक कौल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पद पर 12 साल पूरे कर लिए हैं। उन्होंने कहा कि इन वर्षों में मोदी सरकार ने भरोसे, विकास और जन-कल्याण के लिए काम किया है। स्वच्छता अभियान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह पीएम मोदी का एक लोकप्रिय कार्यक्रम रहा है और स्वयं प्रधानमंत्री इन अभियानों में भाग लेते रहे हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ
गौरतलब है कि इससे पहले देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू सबसे लंबे समय तक — 1947 से 1964 तक — प्रधानमंत्री पद पर रहे थे। मोदी ने 2014 में पहली बार पदभार संभाला था और तब से लगातार तीन बार बहुमत हासिल कर इस पद पर बने हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब एनडीए गठबंधन अपनी राजनीतिक एकजुटता को और मज़बूत करने में लगा है।
आगे की राह
एनडीए नेताओं की इस एकसुर प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि गठबंधन इस उपलब्धि को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मील के पत्थर का असर आगामी राज्य चुनावों के प्रचार अभियानों पर भी देखने को मिल सकता है।