हरसिमरत बादल ने अमित शाह से पंजाब के 11 पेपर लीक मामलों की CBI जांच की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
शिरोमणि अकाली दल (SAD) की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने 29 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से पंजाब में परीक्षा पेपर लीक के 11 मामलों की केंद्रीय जांच के आदेश देने की माँग की। उन्होंने कहा कि इस करोड़ों रुपये के घोटाले में दोषियों को सज़ा दिलाई जाए और उन 5 लाख छात्रों को न्याय मिले, जिनका भविष्य बार-बार हुए पेपर लीक की भेंट चढ़ गया है।
मुख्य आरोप और माँगें
हरसिमरत बादल ने अपने बयान में आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (AAP) की पंजाब सरकार पेपर लीक की जांच में कोई रुचि नहीं रखती, क्योंकि जांच की आँच सीधे उनके अपने मंत्रियों तक पहुँच सकती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और पंजाब अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (PSSSB) — तीनों के कामकाज में गंभीर खामियाँ उजागर हो चुकी हैं, फिर भी किसी भी प्रमुख अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हुई।
अकाली नेता ने स्पष्ट रूप से कहा कि न तो शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस को हटाया गया, न स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह को, और न ही मुख्यमंत्री ने PSSSB के प्रभारी मंत्री के रूप में अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी स्वीकार की है।
सरकार पर मामला दबाने का आरोप
हरसिमरत बादल ने गृह मंत्री को अवगत कराया कि AAP सरकार सख्त कार्रवाई करने की बजाय मामले को दबाने की कोशिश कर रही है और सार्वजनिक रूप से दावा कर रही है कि राज्य में कोई पेपर लीक हुआ ही नहीं। यह तब है जब खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 13 मार्च 2023 को स्वीकार किया था कि पंजाब स्टेट टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (PSTET) का पेपर लीक हो गया था।
इसके अलावा, सरकार ने स्वयं माना है कि फार्मेसी ऑफिसर परीक्षा के आयोजन में एक संगठित माफिया ने उम्मीदवारों से प्रति व्यक्ति ₹13 लाख वसूल कर उन्हें ब्लूटूथ डिवाइस के ज़रिये परीक्षा के दौरान उत्तर बताए — फिर भी सरकार ने इसे 'पेपर लीक' मानने से इनकार किया।
न्यायालय का हस्तक्षेप
पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियों के मामले पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय तक पहुँच चुके हैं। उच्च न्यायालय ने कई मामलों में भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाई है, जिनमें एक्साइज इंस्पेक्टरों की भर्ती परीक्षा भी शामिल है। आलोचकों का कहना है कि न्यायालय के बार-बार हस्तक्षेप से यह स्पष्ट होता है कि राज्य की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता गहरे संकट में है।
आम जनता और छात्रों पर असर
हरसिमरत बादल ने कहा कि परीक्षा प्रणाली की पवित्रता समाप्त होने से पंजाब के लोगों का AAP सरकार की भर्ती परीक्षाएँ निष्पक्ष रूप से आयोजित करने की क्षमता पर से भरोसा पूरी तरह उठ गया है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि दोषियों को सज़ा न मिलना एक पूरी पीढ़ी के साथ अन्याय है, जिसने सरकारी नौकरी के लिए वर्षों की मेहनत की।
आगे क्या होगा
अकाली दल की इस माँग के बाद अब सभी की निगाहें केंद्रीय गृह मंत्रालय की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि केंद्र जांच के आदेश देता है, तो यह पंजाब की AAP सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक मुश्किल बन सकता है। राज्य में अगले चुनावी चक्र को देखते हुए यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रंग लेने की संभावना है।