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हरियाणा एग्रीस्टैक: 96% गांवों की जियो-रेफरेंसिंग पूरी, 11.58 लाख किसान पंजीकृत

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हरियाणा एग्रीस्टैक: 96% गांवों की जियो-रेफरेंसिंग पूरी, 11.58 लाख किसान पंजीकृत

सारांश

हरियाणा ने एग्रीस्टैक के तहत 96% गांवों की जियो-रेफरेंसिंग पूरी कर ली है और 1.75 करोड़ भू-खंडों का डिजिटल मानचित्रण हो चुका है। 11.58 लाख किसानों के पंजीकरण के साथ राज्य एक केंद्रीकृत कृषि डेटाबेस की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है — जो सरकारी योजनाओं की सटीक डिलीवरी की दिशा में बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

हरियाणा के 7,100 गांवों में से 6,808 गांवों ( 95.89% ) की जियो-रेफरेंसिंग पूरी; शेष 2 महीनों में कवर होंगे।
1.75 करोड़ कृषि भू-खंडों का डिजिटल मानचित्रण और 11.58 लाख से अधिक किसानों का पंजीकरण हुआ।
8.32 लाख किसान पहचान दस्तावेज तैयार; कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के ज़रिए पंजीकरण में तेज़ी।
खरीफ 2026 डिजिटल फसल सर्वेक्षण अगस्त में शुरू होगा; 23 जिलों में 6,500 सर्वेक्षक तैनात होंगे।
PM-किसान से बाहर के किसानों को भी रजिस्ट्री में शामिल किया जाएगा।

हरियाणा ने एग्रीस्टैक कार्यक्रम के तहत राज्य के 7,100 गांवों में से 6,808 गांवों — यानी 95.89 प्रतिशत — की जियो-रेफरेंसिंग (भू-संदर्भन) पूरी कर ली है और 1.75 करोड़ कृषि भू-खंडों का डिजिटल मानचित्रण किया जा चुका है। इसके साथ ही 11.58 लाख से अधिक किसानों का पंजीकरण हो चुका है और 8.32 लाख किसान पहचान दस्तावेज तैयार किए गए हैं। शेष गांवों को अगले दो महीनों के भीतर कवर किए जाने की उम्मीद है।

स्टीयरिंग कमेटी की समीक्षा बैठक

यह जानकारी 18 जून 2026 को मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आयोजित स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में सामने आई। बैठक में राज्य के कृषि डिजिटलीकरण की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई और आगामी खरीफ 2026 डिजिटल फसल सर्वेक्षण की तैयारियों पर भी चर्चा हुई।

मुख्य सचिव रस्तोगी ने कहा कि एग्रीस्टैक पहल किसानों के रिकॉर्ड, भूमि स्वामित्व संबंधी जानकारी और फसल से जुड़े आंकड़ों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकीकृत कर पारदर्शी और डेटा-आधारित कृषि प्रशासन की नींव तैयार कर रही है। उनके अनुसार, यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होने के बाद सरकारी योजनाओं का लाभ तेज़ी से किसानों तक पहुँचाने, दोहराव कम करने और कल्याणकारी योजनाओं को सही लाभार्थियों तक पहुँचाने में सहायक होगी।

किसान रजिस्ट्री और पंजीकरण की रफ्तार

वित्तायुक्त (राजस्व) सुमिता मिश्रा ने बताया कि किसान रजिस्ट्री के तहत पंजीकरण प्रक्रिया को राज्यभर के कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से तेज़ किया जा रहा है। इन केंद्रों के सक्रिय होने से आने वाले दिनों में नामांकन की गति और बढ़ने की संभावना है।

अधिकारियों ने बताया कि राजस्व विभाग के डेटाबेस में उपलब्ध करीब 1.75 करोड़ किसान रिकॉर्ड का उपयोग किसान रजिस्ट्री का दायरा बढ़ाने के लिए किया जाएगा। गौरतलब है कि इसमें उन किसानों को भी शामिल किया जाएगा जो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-किसान) योजना के लाभार्थी नहीं हैं — यह एक महत्वपूर्ण विस्तार है जो बड़ी संख्या में छूटे हुए कृषक परिवारों को डिजिटल दायरे में लाएगा।

खरीफ 2026 डिजिटल फसल सर्वेक्षण की तैयारी

बैठक में खरीफ 2026 डिजिटल फसल सर्वेक्षण की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। यह सर्वेक्षण राज्य के 23 जिलों में सभी जियो-रेफरेंस किए गए भूखंडों को कवर करेगा। इस अभियान में लगभग 6,500 सर्वेक्षक शामिल होंगे और इसकी शुरुआत अगस्त 2026 में होने की संभावना है। यह डिजिटल मैपिंग प्रस्तावित डिजिटल फसल सर्वेक्षण और प्रमाणित किसान रजिस्ट्री तैयार करने के लिए महत्वपूर्ण आधार मानी जा रही है।

अधिकारियों को निर्देश और आगे की राह

मुख्य सचिव रस्तोगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित सत्यापन मामलों का शीघ्र निपटारा किया जाए और मिशन मोड में सभी भूमि रिकॉर्ड को मौजूदा तथा नए किसान पहचान पत्रों से जोड़कर किसान रजिस्ट्री को पूर्ण रूप दिया जाए। उन्होंने जिला स्तर पर मज़बूत निगरानी और नियमित समीक्षा बैठकों की आवश्यकता पर भी बल दिया।

मुख्य सचिव के अनुसार, भूमि रिकॉर्ड, फसल संबंधी आंकड़ों और किसान डेटाबेस के एकीकरण से कृषि क्षेत्र के लिए एक मज़बूत और भरोसेमंद डिजिटल ढाँचा तैयार होगा, जिससे तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर बेहतर नीतिगत निर्णय लेने में मदद मिलेगी। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार भी राष्ट्रीय स्तर पर एग्रीस्टैक के विस्तार पर जोर दे रही है और हरियाणा की यह प्रगति अन्य राज्यों के लिए एक मानक स्थापित कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा डेटा की गुणवत्ता और उसके उपयोग में होगी — न कि केवल कवरेज के आँकड़ों में। भारत में कृषि डेटाबेस की ऐतिहासिक समस्या यह रही है कि रिकॉर्ड बनते हैं, पर अपडेट नहीं होते। PM-किसान से बाहर के किसानों को शामिल करने का निर्णय सही दिशा में है, लेकिन यह भी देखना होगा कि भूमि विवादों और बँटाईदार किसानों जैसी जटिलताओं को यह डिजिटल ढाँचा कैसे संभालता है। खरीफ 2026 सर्वेक्षण इस पूरी कवायद की पहली वास्तविक परीक्षा होगी।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरियाणा का एग्रीस्टैक कार्यक्रम क्या है?
एग्रीस्टैक एक केंद्र-प्रायोजित डिजिटल कृषि पहल है जो किसानों के रिकॉर्ड, भूमि स्वामित्व डेटा और फसल आंकड़ों को एक ही प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करती है। हरियाणा में इसके तहत गांवों की जियो-रेफरेंसिंग, किसान पंजीकरण और डिजिटल फसल सर्वेक्षण शामिल हैं।
हरियाणा में अब तक कितने गांवों की जियो-रेफरेंसिंग हो चुकी है?
18 जून 2026 तक राज्य के 7,100 गांवों में से 6,808 गांवों — यानी 95.89 प्रतिशत — की जियो-रेफरेंसिंग पूरी हो चुकी है। शेष गांवों को अगले दो महीनों के भीतर कवर किए जाने की उम्मीद है।
खरीफ 2026 डिजिटल फसल सर्वेक्षण कब और कैसे होगा?
यह सर्वेक्षण अगस्त 2026 में शुरू होने की संभावना है और राज्य के 23 जिलों में सभी जियो-रेफरेंस किए गए भूखंडों को कवर करेगा। इसमें लगभग 6,500 सर्वेक्षक तैनात किए जाएंगे।
क्या PM-किसान से बाहर के किसान भी इस रजिस्ट्री में शामिल होंगे?
हाँ, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि राजस्व विभाग के 1.75 करोड़ किसान रिकॉर्ड का उपयोग करते हुए उन किसानों को भी रजिस्ट्री में शामिल किया जाएगा जो PM-किसान योजना के लाभार्थी नहीं हैं। इससे डिजिटल कवरेज का दायरा काफी बढ़ेगा।
इस डिजिटल मैपिंग से किसानों को क्या फायदा होगा?
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के अनुसार, एकीकृत डिजिटल ढाँचा सरकारी योजनाओं का लाभ तेज़ी से और सही लाभार्थियों तक पहुँचाने, दोहराव कम करने और डेटा-आधारित नीति निर्माण में सहायक होगा। किसान पहचान दस्तावेज से पात्रता सत्यापन भी आसान होगा।
राष्ट्र प्रेस
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