किसान सारथी प्लेटफॉर्म से जुड़े 2.95 करोड़ किसान, 4,767 आईसीएआर वैज्ञानिक दे रहे डिजिटल कृषि परामर्श
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 29 जून 2026 को जानकारी दी कि किसान सारथी डिजिटल कृषि परामर्श प्लेटफॉर्म पर अब तक 2.95 करोड़ किसान पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें 56.16 लाख महिला लाभार्थी भी शामिल हैं। इस प्लेटफॉर्म से 4,767 आईसीएआर वैज्ञानिक और 113 आईसीएआर संस्थान जुड़े हुए हैं, जो देश भर के किसानों को वैज्ञानिक कृषि सलाह उपलब्ध करा रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
जुलाई 2021 में शुरू किए गए इस एकीकृत डिजिटल कृषि-सलाहकार मंच पर अब तक 19.21 लाख प्रश्नों का समाधान किया जा चुका है। इसके साथ ही 351 कृषि उत्पादों से संबंधित 21,900 कृषि सलाह भी जारी की गई हैं। यह आँकड़े दर्शाते हैं कि प्लेटफॉर्म ने अपने चार वर्षों में कृषि ज्ञान के प्रसार में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
पंजीकरण के माध्यमों की बात करें तो 2.89 करोड़ किसानों ने अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) जाकर पंजीकरण कराया। इसके अलावा 5.35 लाख किसान कॉल सेंटर के माध्यम से, 21,517 मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए, 2,416 वेब पोर्टल के माध्यम से और 39,193 कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए पंजीकृत हुए।
प्लेटफॉर्म की पहुँच और विस्तार
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, किसान सारथी की सेवाएं देश के 37 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, 768 जिलों और 6.63 लाख गाँवों तक पहुँच चुकी हैं। यह प्लेटफॉर्म 13 क्षेत्रीय भाषाओं में विशेषज्ञों से लाइव बातचीत की सुविधा देता है, जिससे किसान अपनी स्थानीय भाषा में प्रश्न पूछ सकते हैं और उसी भाषा में सलाह प्राप्त कर सकते हैं।
यह प्लेटफॉर्म इंटरैक्टिव इन्फॉर्मेशन डिसेमिनेशन सिस्टम (आईआईडीएस) का उपयोग करता है, जिससे किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच दो-तरफा संवाद संभव होता है। सभी प्रमुख अनाज, दलहन, तिलहन, बागवानी, बागान और चारा फसलों के अलावा पशुपालन, पोल्ट्री और मत्स्य पालन से जुड़ी जानकारी भी इस पर उपलब्ध है।
संस्थागत ढाँचा और साझेदारी
यह प्लेटफॉर्म इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की संयुक्त पहल है। इसे भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान और डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन ने विकसित और लागू किया है। गौरतलब है कि यह प्लेटफॉर्म किसान कॉल सेंटर, कॉमन सर्विस सेंटर, भारत मौसम विज्ञान विभाग, माईस्कीम और भाषिनी जैसी राष्ट्रीय सेवाओं से भी एकीकृत है।
इस एकीकरण के ज़रिए किसानों को 610 सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलती है, जिनमें 102 योजनाएँ केंद्र सरकार की हैं। सरकार के अनुसार, इन सभी संस्थानों के एक साथ जुड़ने से देश भर में कृषि सलाह का एक मज़बूत राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार हुआ है।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत की कृषि क्षेत्र में डिजिटल समावेश की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। छोटे और सीमांत किसानों को अब विशेषज्ञ सलाह के लिए शहरों की ओर नहीं जाना पड़ता — वे अपनी मातृभाषा में, अपने गाँव से ही वैज्ञानिक परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। प्लेटफॉर्म पर मौसम अपडेट और सरकारी योजनाओं की जानकारी की सुविधा इसे एक बहुआयामी कृषि सहायता केंद्र बनाती है।
क्या होगा आगे
सरकार का कहना है कि ज्ञान साझा करने की प्रक्रिया को और मज़बूत करने के साथ-साथ कृषि अनुसंधान के व्यावहारिक उपयोग को बढ़ावा देना इस प्लेटफॉर्म का अगला लक्ष्य है। किसान सारथी के विस्तार से उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में और अधिक किसान वैज्ञानिक खेती की ओर प्रेरित होंगे और फसल उत्पादकता में सुधार आएगा।