हेमंत सोरेन बोकारो के कसमार में चाय-पकौड़ी टपरी पर पहुंचे, साधारण वेशभूषा में पत्नी कल्पना के साथ
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को अपनी पत्नी और गांडेय विधानसभा क्षेत्र की विधायक कल्पना सोरेन के साथ बोकारो जिले के कसमार कस्बे में एक रोड-साइड चाय-पकौड़ी की दुकान पर अचानक पहुँचे। धारीदार लोअर, सादी टीशर्ट, कंधे पर गमछा और पैरों में साधारण स्लीपर पहने, बिना किसी भारी सुरक्षा काफिले के उनकी यह अनौपचारिक उपस्थिति स्थानीय लोगों के लिए पूरी तरह अप्रत्याशित थी।
कसमार के तीनकोनिया चौक पर क्या हुआ
कसमार के तीनकोनिया चौक पर मुख्यमंत्री की गाड़ी ने दुकानदार कुणाल जायसवाल की छोटी चाय-पकौड़ी की दुकान के सामने अचानक रुककर सबको चौंका दिया। सोरेन दंपती ने वहाँ करीब 10 मिनट बिताए, गरमा-गरम पकौड़ियाँ खाईं और स्वयं अपने हाथों से वहाँ मौजूद ग्रामीणों को पकौड़ियाँ परोसीं। सूबे के सर्वोच्च पदाधिकारी को इस बेतकल्लुफ़ अंदाज़ में अपने बीच देखकर स्थानीय लोग रोमांचित हो उठे।
पैतृक गाँव से लौटते हुए किया दौरा
कसमार, मुख्यमंत्री सोरेन के पैतृक गाँव नेमरा से करीब 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सोरेन अपनी माँ के निधन के बाद अंतिम संस्कार और उससे जुड़े कार्यक्रमों के सिलसिले में पिछले 12 दिनों से पैतृक गाँव में थे। कसमार का यह दौरा उनकी रांची वापसी के दौरान हुआ।
निर्माणाधीन सड़क का औचक निरीक्षण
अनौपचारिक चाय-पकौड़ी विराम के बाद मुख्यमंत्री ने वापसी मार्ग पर बहुप्रतीक्षित कसमार-बरलंगा सड़क का औचक निरीक्षण किया। गौरतलब है कि बरलंगा-नेमरा वाया कसमार सड़क के दो-लेन चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण को झारखंड कैबिनेट ने वर्ष 2021 में मंजूरी दी थी। इस सड़क और इसके अंतर्गत बनने वाले पुल-पुलियों के पूर्ण होने पर गोला, बरलंगा और आसपास के हजारों ग्रामीणों की आवाजाही सुलभ होगी तथा उनके समय की उल्लेखनीय बचत होगी।
सेवाती घाटी में अधिकारियों से चर्चा
सड़क निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री सेवाती घाटी भी पहुँचे और वहाँ की वस्तुस्थिति का जायजा लिया। जैसे ही इस अघोषित दौरे की सूचना प्रशासन को मिली, बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा तत्काल वहाँ पहुँचे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ क्षेत्र के विकास कार्यों की प्रगति, निर्माण परियोजनाओं की स्थिति और आवश्यक सुधारों पर विस्तार से चर्चा की।
आम जनता पर असर और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब राजनेताओं और जनता के बीच दूरी को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं। बिना प्रोटोकॉल के इस तरह की जनसंपर्क-शैली स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक जवाबदेही का संकेत देती है। कसमार-बरलंगा सड़क परियोजना की प्रगति की समीक्षा के साथ यह दौरा संकेत देता है कि मुख्यमंत्री कार्यालय क्षेत्रीय विकास कार्यों पर सीधी नज़र रखने का इरादा रखता है।