हेमंत सोरेन खुद कार चलाकर पहुंचे जोन्हा फॉल, कल्पना सोरेन भी साथ; बोले- झारखंड प्रकृति का अनुपम उपहार
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रविवार, 28 जून को मॉनसून की हरियाली के बीच एक अनौपचारिक अंदाज़ में लोगों का दिल जीत लिया। वह स्वयं कार चलाकर राजधानी रांची से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल जोन्हा फॉल पहुँचे और वहाँ की प्राकृतिक छटा का आनंद लिया। उनके साथ उनकी पत्नी एवं गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन भी थीं।
मुख्यमंत्री का अनौपचारिक दौरा
सफर के दौरान हेमंत सोरेन ने ड्राइविंग करते और गुनगुनाते हुए अपने वीडियो व तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं, जो तेज़ी से वायरल हो गईं। जोन्हा फॉल पहुँचकर उन्होंने कुछ समय प्राकृतिक वातावरण के बीच बिताया, स्थानीय फलों का स्वाद लिया और वहाँ मौजूद आम लोगों से सहजता से बातचीत की। यह उनके सहज और ज़मीन से जुड़े व्यक्तित्व की एक और झलक थी।
मुख्यमंत्री के अपने शब्द
अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'आज रांची शहर से कुछ ही दूरी पर स्थित जोन्हा फॉल की हरी-भरी वादियों के बीच कुछ पल बिताने का अवसर मिला। इस बीच वहाँ फलों का भी आनंद लिया और स्थानीय लोगों से बातचीत भी हुई।'
उन्होंने आगे लिखा कि 'बहती निर्मल जलधारा, घने जंगलों की हरियाली और पहाड़ों का शांत सौंदर्य बार-बार यह एहसास कराता है कि झारखंड प्रकृति का अनुपम उपहार है। यह हमारी साझी धरोहर है, जिसे सहेजना और संरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।'
झारखंड पर्यटन का संदेश
जोन्हा फॉल से मुख्यमंत्री ने एक रील भी साझा की, जिसके पार्श्व में क्षेत्रीय गीत 'हमर सोना झारखंड, हमर हीरा झारखंड' बज रहा था। वीडियो में वह मुस्कुराते हुए लोगों से पूछते नज़र आए — 'कैसा लग रहा है... ये जंगल... ये वादियाँ... ये हमारा झारखंड!' रील के साथ उन्होंने लिखा, 'यहाँ जंगल जीवन हैं, झरने संगीत हैं, हरियाली की गोद में बसता झारखंड अद्वितीय है।' उन्होंने राज्य के हर कोने से पर्यटकों का स्वागत करते हुए कहा कि झारखंड में प्रकृति अपने अलग-अलग रंगों में आपका स्वागत करती है।
हेमंत सोरेन की यह शैली नई नहीं
गौरतलब है कि हेमंत सोरेन पहले भी कई अवसरों पर खुद कार चलाकर राज्य के विभिन्न स्थानों का दौरा करते और रास्ते में आम नागरिकों से सहजता से मिलते-जुलते देखे गए हैं। यह शैली उन्हें एक ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में स्थापित करती है जो प्रोटोकॉल से परे जाकर आम जनता से जुड़ता है। मॉनसून के मौसम में यह दौरा झारखंड के प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने का एक अनौपचारिक लेकिन प्रभावी प्रयास भी माना जा रहा है।