बारा भंगाल में रात बिताने वाले पहले CM बने सुक्खू, ₹1,500 मासिक सहायता समेत 6 बड़ी घोषणाएं
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू 27 जून 2026 को हेलीकॉप्टर से कांगड़ा जिले के बारा भंगाल पहुंचे — यह राज्य का सबसे दूरदराज गांव है, जो समुद्र तल से 2,800 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर बसा है। वहां रात बिताकर सुक्खू ऐसा करने वाले हिमाचल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बन गए; इससे पहले कोई भी मुख्यमंत्री इस गांव में ठहरा नहीं था।
ऐतिहासिक दौरा: 2011 के बाद पहली बार
गौरतलब है कि 2011 के बाद किसी मुख्यमंत्री ने बारा भंगाल का दौरा नहीं किया था। धौलाधार और पीर पंजाल पर्वतमालाओं के बीच बसे इस गांव में लगभग 500 मतदाता हैं, जिनकी आजीविका मुख्यतः भेड़ और मवेशी पालन पर निर्भर है। यहां के निवासियों की खानाबदोश जीवनशैली और भौगोलिक दुर्गमता इस क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से काफी हद तक दूर रखती आई है।
सुक्खू ने बारा भंगाल पहुंचने से पहले हाल की प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का हवाई सर्वेक्षण भी किया। शाम को उन्होंने स्थानीय निवासियों से सीधे मिलकर उनकी परेशानियां सुनीं।
मुख्य घोषणाएं
स्थानीय विधायक किशोरी लाल के साथ मिलकर मुख्यमंत्री ने छह प्रमुख घोषणाएं कीं:
पहली: बारा भंगाल की सभी पात्र महिलाओं को 'इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना' के तहत प्रतिमाह ₹1,500 की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
दूसरी: इलाके में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जनरेटर सेट स्थापित किए जाएंगे।
तीसरी: स्कूल जाने वाले बच्चों को पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। पास के स्कूलों को नोडल स्कूल बनाया जाएगा, ताकि बारा भंगाल के बच्चे बीर और आसपास के क्षेत्रों में शिक्षा ग्रहण कर सकें।
चौथी: अधिकारियों को बारा भंगाल को इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की व्यापक योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।
पाँचवीं: इलाके में प्राकृतिक खेती से उगाई गई राजमा के लिए राज्य सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्रदान करेगी। कृषि विभाग को निर्देश दिया गया कि स्थानीय किसानों को प्राकृतिक खेती की पहल से जोड़ा जाए।
छठी: सरकार क्षेत्र के भेड़ पालकों से सीधे मटन खरीदेगी, जिससे उन्हें उचित मूल्य मिल सके।
आम जनता पर असर
ये घोषणाएं उस समुदाय के लिए विशेष महत्व रखती हैं जो दशकों से बुनियादी सुविधाओं — बिजली, शिक्षा और बाज़ार तक पहुंच — के अभाव में जीवन बिता रहा है। धौलाधार वन्यजीव अभयारण्य का हिस्सा होने के कारण यहां विकास कार्यों पर पर्यावरणीय प्रतिबंध भी रहे हैं, जिससे इको-टूरिज्म का विकल्प यहां के लिए सबसे व्यावहारिक माना जा रहा है।
क्या होगा आगे
मुख्यमंत्री ने निवासियों को आश्वस्त किया कि सरकार उनके जीवन को सुगम बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। अब देखना यह होगा कि इन घोषणाओं को ज़मीनी स्तर पर लागू करने की समयसीमा और क्रियान्वयन तंत्र क्या होगा — विशेषकर इस क्षेत्र की भौगोलिक दुर्गमता को देखते हुए।