26 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

हिमाचल CM सुक्खू का भाजपा पर हमला: ₹60,000 करोड़ बर्बाद, महिलाओं को ₹1,500 मासिक पेंशन का ऐलान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
हिमाचल CM सुक्खू का भाजपा पर हमला: ₹60,000 करोड़ बर्बाद, महिलाओं को ₹1,500 मासिक पेंशन का ऐलान

सारांश

मंडी की जनसभा में CM सुक्खू ने BJP पर ₹60,000 करोड़ बर्बादी का आरोप दागा और जवाब में कई बड़े दाँव खेले — महिलाओं को ₹1,500 मासिक पेंशन, दूध खरीद मूल्य दोगुने से अधिक, और सुखी परिवार योजना का विस्तार। यह भाषण राजनीतिक हमले और कल्याणकारी लोकलुभावनवाद का मिला-जुला पैकेज था।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 26 सितंबर 2026 को मंडी के बल्ह विधानसभा क्षेत्र में BJP की पूर्ववर्ती सरकार पर ₹60,000 करोड़ के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने पर केंद्र ने हिमाचल को ₹1,600 करोड़ की सहायता रोकी — सुक्खू का दावा।
21 वर्ष से अधिक आयु की सभी पात्र महिलाओं को ₹1,500 मासिक पेंशन देने की घोषणा।
गाय के दूध का खरीद मूल्य ₹32 से बढ़ाकर ₹61 प्रति लीटर , भैंस का ₹71 प्रति लीटर किया गया।
सुखी परिवार योजना में आय सीमा ₹50,000 से बढ़ाकर ₹75,000 ; मनरेगा की अनिवार्य शर्त हटाई जाएगी।
किशाऊ परियोजना से ₹3,000 करोड़ बचाने और भविष्य में ₹1,200–1,500 करोड़ वार्षिक राजस्व का दावा।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 26 सितंबर 2026 को मंडी जिले के बल्ह विधानसभा क्षेत्र में एक बड़ी जनसभा में पूर्व भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कई महत्वपूर्ण कल्याणकारी घोषणाएँ कीं। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP के 'डबल इंजन' मॉडल ने राज्य को कर्ज के दलदल में धकेला और करोड़ों रुपए के सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया। 21 वर्ष से अधिक आयु की सभी पात्र महिलाओं को ₹1,500 मासिक पेंशन देने की घोषणा इस सभा की सबसे बड़ी खबर रही।

BJP सरकार पर क्या आरोप लगाए

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि पूर्ववर्ती BJP सरकार के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश को वस्तु एवं सेवा कर (GST) मुआवजे और राजस्व घाटा अनुदान (RDG) के रूप में लगभग ₹60,000 करोड़ मिले, किंतु इन निधियों का राज्य के विकास में समुचित उपयोग नहीं हुआ। उनके अनुसार, यही कारण है कि राज्य आज वित्तीय दबाव में है।

सुक्खू ने यह भी कहा कि उनकी सरकार को केंद्र से लगभग ₹1,600 करोड़ की वित्तीय सहायता इसलिए रोकी गई, क्योंकि कांग्रेस सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल की थी। उन्होंने इसे एक सोचा-समझा राजनीतिक दबाव बताया।

सरकार की उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ

सुक्खू ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने लगभग 45 महीने पहले सत्ता संभाली और तब से प्राकृतिक आपदाओं और राजनीतिक चुनौतियों — दोनों से मोर्चा लिया है। आपदा के दौरान राज्य के अपने संसाधनों से लगभग 23,000 क्षतिग्रस्त घरों का पुनर्निर्माण कराया गया। उन्होंने कहा कि जनता के सहयोग से कांग्रेस विधायकों की संख्या फिर से 40 हो गई है।

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना का उल्लेख करते हुए सुक्खू ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने राज्य के हितों की रक्षा कर ₹3,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ टाला। उन्होंने उत्तराखंड की स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि यह परियोजना भविष्य में प्रतिवर्ष ₹1,200 करोड़ से ₹1,500 करोड़ तक राजस्व दे सकती है।

दुग्ध क्षेत्र में बड़ा बदलाव

मुख्यमंत्री ने दूध खरीद मूल्य में किए गए सुधारों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि BJP सरकार के कार्यकाल में दूध ₹32 प्रति लीटर की दर से खरीदा जाता था, जबकि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने गाय के दूध का खरीद मूल्य बढ़ाकर ₹61 प्रति लीटर और भैंस के दूध का ₹71 प्रति लीटर कर दिया है। उन्होंने वादा किया कि इसमें आगे और वृद्धि की जाएगी, जो पशुपालकों के लिए एक बड़ी राहत होगी।

नई कल्याणकारी घोषणाएँ

सुक्खू ने मुख्यमंत्री सुखी परिवार योजना के पात्रता मानदंडों में बदलाव की घोषणा की। अब मनरेगा के तहत एक दिन काम करने की अनिवार्य शर्त हटाई जाएगी और पारिवारिक आय की सीमा ₹50,000 से बढ़ाकर ₹75,000 कर दी जाएगी, जिससे अधिक परिवार इस योजना के दायरे में आ सकेंगे।

इसके अलावा, 21 वर्ष से अधिक आयु की सभी पात्र महिलाओं को ₹1,500 मासिक पेंशन दी जाएगी। अनाथ बच्चों और विधवाओं के लिए भी विशेष कल्याण उपाय लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। सुक्खू ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और आम जनता को उनके अधिकार दिलाने के लिए संकल्पबद्ध है।

आगे की राह

गौरतलब है कि ये घोषणाएँ ऐसे समय में आई हैं जब हिमाचल प्रदेश में विधानसभा सत्र और स्थानीय चुनाव की सरगर्मियाँ तेज हो रही हैं। इन कदमों का असर न केवल राज्य के वित्तीय ढाँचे पर, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ना तय है। इन घोषणाओं के क्रियान्वयन की समयसीमा और वित्तीय स्रोत सरकार की विश्वसनीयता की असली परीक्षा होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ की बर्बादी का आरोप लगाते हुए खुद कई खर्चीली घोषणाएँ करना उस राज्य की विडंबना को उजागर करता है जो पहले से ही गहरे वित्तीय संकट में है। ₹1,500 मासिक पेंशन और दूध मूल्य वृद्धि जैसे कदम जमीनी स्तर पर राहत देने वाले हैं, लेकिन सवाल यह है कि बिना केंद्रीय सहयोग और सीमित राजस्व आधार वाले राज्य के बजट पर इनका बोझ कैसे उठाया जाएगा। किशाऊ परियोजना से ₹1,500 करोड़ वार्षिक राजस्व के दावे की समयसीमा और विश्वसनीयता अभी सत्यापित नहीं है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है, वह यह है कि OPS बहाली और केंद्रीय सहायता के बीच का टकराव हिमाचल के राजकोषीय भविष्य पर एक दीर्घकालिक छाया डाल रहा है।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM सुक्खू ने भाजपा की पूर्व सरकार पर क्या आरोप लगाए?
सुक्खू ने आरोप लगाया कि BJP सरकार के कार्यकाल में GST मुआवजे और राजस्व घाटा अनुदान के रूप में मिले लगभग ₹60,000 करोड़ का सही उपयोग नहीं हुआ, जिससे राज्य कर्ज के जाल में फँस गया। उन्होंने BJP के 'डबल इंजन' मॉडल को राज्य की वित्तीय बदहाली का जिम्मेदार ठहराया।
हिमाचल प्रदेश में महिलाओं को ₹1,500 पेंशन कब से मिलेगी?
CM सुक्खू ने 26 सितंबर 2026 को मंडी में घोषणा की कि 21 वर्ष से अधिक आयु की सभी पात्र महिलाओं को ₹1,500 मासिक पेंशन दी जाएगी। क्रियान्वयन की सटीक तारीख और पात्रता विवरण सरकार द्वारा अभी स्पष्ट किया जाना बाकी है।
मुख्यमंत्री सुखी परिवार योजना में क्या बदलाव होंगे?
योजना के तहत अब मनरेगा में एक दिन काम करने की अनिवार्य शर्त हटाई जाएगी और पारिवारिक आय की सीमा ₹50,000 से बढ़ाकर ₹75,000 की जाएगी। इससे अधिक परिवार इस योजना का लाभ उठा सकेंगे।
हिमाचल में दूध का खरीद मूल्य अब कितना है?
सुक्खू सरकार ने गाय के दूध का खरीद मूल्य ₹32 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹61 प्रति लीटर और भैंस के दूध का ₹71 प्रति लीटर कर दिया है। CM ने कहा कि भविष्य में इसमें और वृद्धि की जाएगी।
केंद्र ने हिमाचल को ₹1,600 करोड़ की सहायता क्यों रोकी?
CM सुक्खू के अनुसार, जब उनकी सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल की, तो केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश की लगभग ₹1,600 करोड़ की वित्तीय सहायता रोक दी। यह दावा सुक्खू का अपना पक्ष है; केंद्र सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले