14 सितंबर 2026
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हिमाचल सरकार केंद्र के बिना एक दिन न चले: BJP सांसद सिकंदर कुमार का पलटवार, ₹1 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट का दावा

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हिमाचल सरकार केंद्र के बिना एक दिन न चले: BJP सांसद सिकंदर कुमार का पलटवार, ₹1 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट का दावा

सारांश

BJP सांसद सिकंदर कुमार का बयान महज पलटवार नहीं — यह हिमाचल में केंद्र-राज्य वित्तीय संघर्ष की उस लंबी लड़ाई का नया अध्याय है जिसमें कांग्रेस राज्य को 'पीड़ित' और BJP केंद्र को 'दाता' के रूप में पेश कर रही है। ₹1 लाख करोड़ का दावा और कांग्रेस के 35 साल के शासन पर सवाल — चुनावी ज़मीन तैयार हो रही है।

मुख्य बातें

BJP राज्यसभा सांसद सिकंदर कुमार ने 14 सितंबर 2026 को लाहौल-स्पीति में हिमाचल की कांग्रेस सरकार पर पलटवार किया।
उनका दावा — केंद्र का समर्थन हटे तो हिमाचल सरकार एक दिन भी काम नहीं कर पाएगी।
विगत 10 वर्षों में केंद्र ने हिमाचल में ₹1 लाख करोड़ से अधिक की परियोजनाएँ स्वीकृत कीं — सांसद का दावा।
सड़क, रेल, स्वास्थ्य, शिक्षा और आपदा राहत में केंद्र के सहयोग को 'अभूतपूर्व' बताया।
कांग्रेस के 35 वर्षों के प्रदेश शासन और 55-60 वर्षों के केंद्र शासन पर विकास परियोजनाओं को लेकर सवाल उठाए।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद सिकंदर कुमार ने 14 सितंबर 2026 को लाहौल-स्पीति में हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार अपना समर्थन वापस ले ले, तो राज्य सरकार एक दिन भी सुचारू रूप से काम नहीं कर पाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि विगत 10 वर्षों में केंद्र ने हिमाचल में ₹1 लाख करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को स्वीकृति दी है।

सियासी पृष्ठभूमि

हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पिछले कई महीनों से केंद्र पर पर्याप्त वित्तीय सहायता न देने का आरोप लगाती आ रही है। सांसद सिकंदर कुमार के अनुसार यह विवाद लगभग एक वर्ष पुराना है और कांग्रेस इसे राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है।

यह ऐसे समय में आया है जब हिमाचल प्रदेश वित्तीय संकट और बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा है। केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध पर यह बहस राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रासंगिक है, जहाँ कई विपक्ष-शासित राज्य केंद्र पर भेदभाव का आरोप लगाते हैं।

सांसद के मुख्य दावे

सांसद सिकंदर कुमार ने कहा, 'अगर केंद्र सरकार अपना समर्थन बंद कर दे, तो राज्य सरकार एक दिन भी काम नहीं कर पाएगी। किस मुद्दे पर केंद्र सरकार ने राज्य का साथ नहीं दिया? हर मामले में — जिसमें हमारे राज्य को प्रभावित करने वाली आपदा भी शामिल है — केंद्र ने मदद की है।'

उन्होंने दावा किया कि बीते 10 वर्षों में सड़क, रेल, स्वास्थ्य और शिक्षा — प्रत्येक क्षेत्र में 'अभूतपूर्व और अकल्पनीय' कार्य हुए हैं। उनके अनुसार, 'केंद्र ने हिमाचल प्रदेश में हालात और विकास की दिशा, दोनों को बदल दिया है।'

कांग्रेस के दशकों के शासन पर निशाना

सिकंदर कुमार ने कांग्रेस के शासनकाल को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने सवाल किया, 'जब प्रदेश में 35 वर्ष कांग्रेस ने राज किया और केंद्र में भी 55 से 60 वर्ष इन्होंने राज किया — जब दोनों जगह कांग्रेस की सरकार थी — तो मुझे एक हजार रुपये का कोई प्रोजेक्ट बता दें जो केंद्र की तत्कालीन सरकार ने प्रदेश को दिया हो।'

गौरतलब है कि यह बयान भाजपा की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह कांग्रेस के ऐतिहासिक शासन को 'विकास-विरोधी' बताती है। हालाँकि, कांग्रेस की ओर से इन आँकड़ों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

आपदा राहत में केंद्र की भूमिका

सांसद ने यह भी रेखांकित किया कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी केंद्र ने हिमाचल का साथ दिया — चाहे वह आर्थिक पैकेज हो या राहत सामग्री। उनका कहना था कि राज्य सरकार को आरोप लगाने की बजाय केंद्र के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करना चाहिए।

आगे क्या

केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों पर यह बयानबाज़ी आने वाले समय में और तेज़ हो सकती है, क्योंकि हिमाचल प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले दोनों पक्ष एक-दूसरे पर जवाबदेही का बोझ डालने में लगे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, केंद्र-राज्य वित्तीय विवाद का दीर्घकालिक समाधान वित्त आयोग की सिफारिशों और राजकोषीय संघवाद के ढाँचे में ही निहित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ₹1 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट के दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है — यह एकतरफा आँकड़ा है जिसे सरकारी ऑडिट या संसदीय दस्तावेजों से मिलाना ज़रूरी है। केंद्र-राज्य वित्तीय विवाद में 'दाता बनाम शिकायतकर्ता' की यह कथा हिमाचल तक सीमित नहीं — यही पैटर्न तेलंगाना, केरल और पश्चिम बंगाल में भी दिखता है, जहाँ विपक्ष-शासित राज्य केंद्र पर भेदभाव का आरोप लगाते हैं। असली सवाल यह है कि क्या स्वीकृत परियोजनाओं का धन वास्तव में ज़मीन पर पहुँचा, या महज घोषणाओं तक सिमटा रहा — और यही जाँच दोनों पक्षों के दावों की विश्वसनीयता तय करेगी।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BJP सांसद सिकंदर कुमार ने हिमाचल सरकार पर क्या आरोप लगाए?
सिकंदर कुमार ने कहा कि यदि केंद्र सरकार अपना समर्थन वापस ले ले, तो हिमाचल की कांग्रेस सरकार एक दिन भी काम नहीं कर पाएगी। उन्होंने राज्य सरकार के केंद्र पर वित्तीय उपेक्षा के आरोपों को निराधार बताया।
हिमाचल प्रदेश में केंद्र-राज्य वित्तीय विवाद क्या है?
हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार कई महीनों से आरोप लगा रही है कि केंद्र से उसे पर्याप्त वित्तीय सहायता नहीं मिल रही। BJP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पिछले 10 वर्षों में ₹1 लाख करोड़ से अधिक की केंद्रीय परियोजनाओं का दावा किया है।
सिकंदर कुमार ने कांग्रेस के शासनकाल पर क्या सवाल उठाए?
उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस ने प्रदेश में 35 वर्ष और केंद्र में 55-60 वर्ष शासन किया, उस दौरान हिमाचल को एक भी बड़ी परियोजना नहीं मिली। यह दावा कांग्रेस के 'केंद्र-उपेक्षा' के आरोप के जवाब में था।
क्या केंद्र ने हिमाचल में आपदा राहत में सहायता दी है?
सांसद सिकंदर कुमार के अनुसार, प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी केंद्र ने हिमाचल को आर्थिक पैकेज और राहत सामग्री दोनों उपलब्ध कराई हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को आरोप लगाने की बजाय केंद्र के सहयोग का आभार व्यक्त करना चाहिए।
हिमाचल प्रदेश में BJP और कांग्रेस के बीच यह विवाद कब से चल रहा है?
सांसद सिकंदर कुमार के अनुसार यह विवाद लगभग एक वर्ष पुराना है। कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद से केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों पर बयानबाज़ी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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