हिमाचल प्रदेश के मंदिरों में चढ़ावा प्रबंधन के लिए नई एसओपी जारी, 30 दिन में अनुपालन अनिवार्य
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश सरकार ने 11 जुलाई 2026 को राज्य के सरकारी प्रबंधन वाले मंदिरों में चढ़ावे की सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की। भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा जारी इस एसओपी में दानपात्र प्रबंधन, सीसीटीवी निगरानी, वित्तीय लेखांकन और कर्मचारी सत्यापन से जुड़े कड़े प्रावधान शामिल हैं। सभी संबंधित मंदिर प्रबंधनों को 30 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट सरकार को सौंपना अनिवार्य किया गया है।
दानपात्र प्रबंधन के नए नियम
एसओपी के तहत सभी दानपात्र (हुंडी) छेड़छाड़-रोधी होंगे और प्रत्येक को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी। डबल लॉक या मल्टी-की प्रणाली लागू होगी और दानपात्र खोलने-बंद करने की हर प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। दानपात्र केवल पूर्व निर्धारित तिथियों पर ही खोले जाएंगे, जिसमें मंदिर अधिकारियों, जिला प्रशासन के प्रतिनिधियों, लेखा अधिकारियों, मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्यों और स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति अनिवार्य होगी।
सीसीटीवी निगरानी और वीडियो रिकॉर्डिंग
मंदिर परिसरों में उच्च गुणवत्ता वाले नाइट विजन और ऑडियो रिकॉर्डिंग से लैस सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं। ये कैमरे प्रवेश-निकास द्वार, गर्भगृह, दानपात्र, गिनती कक्ष और स्ट्रॉन्ग रूम को कवर करेंगे। चढ़ावे की गिनती की पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी निगरानी में होगी और सभी फुटेज कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखनी होगी।
वित्तीय प्रबंधन के सख्त प्रावधान
मंदिरों में प्राप्त नकद चढ़ावा एक कार्य दिवस के भीतर अधिकृत बैंक खाते में जमा करना होगा। मंदिर परिसर में बड़ी मात्रा में नकदी रखने पर रोक रहेगी, जब तक पूर्व लिखित अनुमति न हो। श्रद्धालुओं को यूपीआई, क्यूआर कोड और ऑनलाइन बैंकिंग के माध्यम से डिजिटल दान देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। मंदिरों के आभूषणों और कीमती वस्तुओं का हर तीन महीने में भौतिक सत्यापन और वर्ष में एक बार सरकार द्वारा नामित एजेंसियों से ऑडिट कराया जाएगा।
कर्मचारी सत्यापन और जवाबदेही
नकदी और कीमती सामान संभालने वाले कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य होगा और समय-समय पर उनकी जिम्मेदारियाँ बदली जाएंगी। संवेदनशील स्थानों पर प्रवेश के लिए सख्त नियंत्रण व्यवस्था लागू की जाएगी। भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के निदेशक को राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा सभी जिला उपायुक्तों को अपने अधिकार क्षेत्र के अन्य मंदिरों में भी इसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था लागू कराने के निर्देश दिए गए हैं।
उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एसओपी का पालन न करने या लापरवाही बरतने पर कार्यकारी अधिकारियों और मंदिर प्रबंधन समितियों के विरुद्ध कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। यह कदम ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में मंदिर संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर पारदर्शिता की माँग बढ़ती जा रही है। आगे देखना होगा कि राज्य के सभी मंदिर प्रबंधन निर्धारित समयसीमा में अनुपालन सुनिश्चित कर पाते हैं या नहीं।