दिल्ली विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता बोले — युवा सोच ही लोकतंत्र की असली ताकत
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने 27 अगस्त 2026 को कहा कि युवा पीढ़ी की सोच और जागरूकता ही भारतीय लोकतंत्र के भविष्य को दिशा देने वाली सबसे बड़ी शक्ति है। दिल्ली विधानसभा में आयोजित 'यूथ आउटरीच इनिशिएटिव' के दौरान उन्होंने छात्रों से सीधा संवाद किया और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया।
रक्षाबंधन पर विधानसभा में भावनात्मक पल
रक्षाबंधन के अवसर पर विभिन्न विद्यालयों से आई छात्राओं ने स्पीकर विजेंद्र गुप्ता की कलाई पर राखी बांधी। इस भावनात्मक क्षण का स्वागत करते हुए गुप्ता ने कहा कि राखी का धागा केवल सुरक्षा का प्रतीक नहीं है — यह लोकतांत्रिक संस्थानों और आने वाली पीढ़ी के बीच एक मजबूत, जागरूक और जिम्मेदार भारत बनाने का दृढ़ संकल्प है। उन्होंने सभी छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य और सफलता की कामना की।
मिरांडा हाउस, सत्यवती और लक्ष्मीबाई कॉलेज के छात्रों से संवाद
दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस, सत्यवती कॉलेज और लक्ष्मीबाई कॉलेज के छात्र 'यूथ आउटरीच इनिशिएटिव' के तहत विधानसभा दौरे पर आए। स्पीकर ने बताया कि इन छात्रों की जिज्ञासा और उत्साह से यह स्पष्ट था कि वे लोकतांत्रिक संस्थाओं और एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका को गहराई से समझना चाहते हैं। यह संवाद ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रहा।
विधायी प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी
कार्यक्रम में छात्रों को दिल्ली विधानसभा की लोकतांत्रिक शासन में भूमिका के बारे में विस्तार से बताया गया। कानून कैसे बनते हैं, उन पर किस प्रकार बहस होती है और वे कैसे पारित होते हैं — इन सभी विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी गई। सत्र के दौरान एक रोचक शॉर्ट फिल्म भी दिखाई गई।
ऐतिहासिक कॉफी टेबल बुक और असेंबली चैंबर का भ्रमण
छात्रों को 'एक शताब्दी यात्रा' नामक विशेष कॉफी टेबल बुक भेंट की गई, जिसमें विधायी इतिहास की एक सदी का दस्तावेजीकरण है। इसके बाद उन्हें असेंबली हाउस के चैंबर का गाइडेड टूर कराया गया, ताकि वे स्थानीय शासन की कार्यप्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से देख सकें।
स्पीकर का युवाओं को संदेश
स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि एक जीवंत लोकतांत्रिक समाज की नींव जागरूक, सूचित और सक्रिय युवाओं पर टिकी होती है। उनके अनुसार, जब युवा नागरिक लोकतांत्रिक संस्थानों को प्रत्यक्ष रूप से काम करते देखते हैं, तो वे अपनी स्वाभाविक ऊर्जा को सार्थक नागरिक भागीदारी, जवाबदेही और जनसेवा में बदल सकते हैं। उन्होंने छात्रों को उच्च नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने और शिक्षा में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया।