5 नवंबर 2026
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हिमंता बिस्वा सरमा बोले — असम का सफर 'बंदूक की गोलियों से बुलेट ट्रेन' तक, नए युग की शुरुआत

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हिमंता बिस्वा सरमा बोले — असम का सफर 'बंदूक की गोलियों से बुलेट ट्रेन' तक, नए युग की शुरुआत

सारांश

हिमंता बिस्वा सरमा का 'बंदूक की गोलियों से बुलेट ट्रेन' वाला बयान सिर्फ एक रूपक नहीं — यह उस असम की कहानी है जो दशकों के उग्रवाद के बाद अब कनेक्टिविटी, शांति और विकास की नई इबारत लिखने की कोशिश में है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 5 नवंबर 2026 को सोशल मीडिया पर असम के बदलाव को 'बंदूक की गोलियों से बुलेट ट्रेन' तक का सफर बताया।
उन्होंने याद दिलाया कि कभी गुवाहाटी से नई दिल्ली तक का सफर 30 से 36 घंटे में तय होता था।
सरमा ने कहा कि यह बदलाव केवल परिवहन तक सीमित नहीं, बल्कि यह असम की 'पहचान और भविष्य का कायापलट' है।
राज्य सरकार बुनियादी ढाँचे, कनेक्टिविटी और शांति को असम के नए स्वरूप का मुख्य आधार मानती है।
पूर्वोत्तर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने के प्रयास सरकार की दीर्घकालिक प्राथमिकता बनी हुई है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 5 नवंबर 2026 को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि जो राज्य कभी बंदूक की गोलियों और हिंसा से दहशत में डूबा रहता था, वह आज विकास की 'बुलेट ट्रेन' की रफ्तार से आगे बढ़ने का सपना देख रहा है। उन्होंने इस परिवर्तन को असम की पहचान और भविष्य के 'कायापलट' के रूप में परिभाषित किया।

मुख्यमंत्री के शब्दों में बदलाव की तस्वीर

सरमा ने अपनी पोस्ट में कहा, 'जो असम कभी बंदूक की गोलियों की आवाज से कांप उठता था, वह आज विकास की बुलेट ट्रेन की रफ्तार से आगे बढ़ने का सपना देख रहा है।' उन्होंने इस बदलाव को केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि राज्य की संरचनात्मक पुनर्कल्पना बताया।

उन्होंने आगे कहा, 'बंदूक की गोलियों से बुलेट ट्रेन तक — डर और दहशत वाले अतीत को पीछे छोड़कर प्रगति के नए क्षितिज की ओर बढ़ना, यही नए असम का कभी न रुकने वाला सफर है।'

कनेक्टिविटी की पुरानी चुनौती और आज की स्थिति

मुख्यमंत्री ने उस दौर को भी याद किया जब गुवाहाटी से नई दिल्ली तक का सफर तय करने में 30 से 36 घंटे लग जाते थे। उन्होंने कहा, 'जो असम कभी दिल्ली पहुँचने के लिए 30-36 घंटे का लंबा सफर तय करता था, वह आज बेहतर कनेक्टिविटी, विकास और नई संभावनाओं की दहलीज पर खड़ा है।'

यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पूर्वोत्तर क्षेत्र में रेल, सड़क और वायु मार्गों के विस्तार पर जोर दे रही है। पूर्वोत्तर भारत को देश के शेष हिस्सों से जोड़ना मौजूदा सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।

हिंसा से शांति तक — असम का पृष्ठभूमि संदर्भ

गौरतलब है कि असम दशकों तक उग्रवाद और जातीय संघर्षों की आग में जलता रहा। ULFA (यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम) जैसे संगठनों के साथ दीर्घकालिक संघर्ष के बाद, राज्य में शांति प्रक्रिया को लेकर कई समझौते हुए। सरमा ने अपनी सरकार के कार्यकाल में इस शांति प्रक्रिया को एक नई गति देने का दावा किया है।

सरमा ने बार-बार यह रेखांकित किया है कि बेहतर बुनियादी ढाँचा, कनेक्टिविटी और स्थायी शांति — ये तीन स्तंभ असम के नए स्वरूप की नींव हैं।

व्यापक बदलाव की दिशा

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव केवल परिवहन बुनियादी ढाँचे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह असम की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान में एक व्यापक परिवर्तन को दर्शाता है। उन्होंने कहा, 'यह सिर्फ परिवहन में आया बदलाव नहीं है, बल्कि यह असम की पहचान और भविष्य का कायापलट है।'

राज्य सरकार पूर्वोत्तर क्षेत्र को देश के शेष भागों के साथ अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने के प्रयास जारी रखे हुए है, और आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में निवेश और पर्यटन को भी बढ़ावा देने की योजना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली कसौटी ज़मीन पर दिखने वाले परिणाम हैं। असम में शांति प्रक्रिया ने निश्चित रूप से प्रगति की है, परंतु कनेक्टिविटी की घोषणाएँ और वास्तविक बुनियादी ढाँचे का निर्माण — इन दोनों के बीच की खाई अभी भी बड़ी है। पूर्वोत्तर में निवेश के वादे बजट सत्रों में बार-बार दोहराए जाते हैं, लेकिन क्रियान्वयन की गति अपेक्षाओं से पीछे रहती है। 'बुलेट ट्रेन' का रूपक प्रेरक है, पर असम को वास्तव में उस रफ्तार तक पहुँचाने के लिए नीतिगत निरंतरता और पारदर्शी जवाबदेही की ज़रूरत होगी।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिमंता बिस्वा सरमा ने 'बंदूक की गोलियों से बुलेट ट्रेन' का बयान क्यों दिया?
सरमा ने यह बयान असम के हिंसक अतीत और वर्तमान विकास की आकांक्षाओं के बीच के अंतर को रेखांकित करने के लिए दिया। उनका उद्देश्य यह बताना था कि राज्य उग्रवाद के दौर से निकलकर कनेक्टिविटी और बुनियादी ढाँचे के नए युग में प्रवेश कर रहा है।
असम में कनेक्टिविटी को लेकर क्या बदलाव हुआ है?
मुख्यमंत्री के अनुसार, जहाँ पहले गुवाहाटी से नई दिल्ली तक का सफर 30 से 36 घंटे में होता था, वहीं अब बेहतर रेल और वायु संपर्क ने इस दूरी को काफी कम कर दिया है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी पर निवेश बढ़ा रही हैं।
असम का उग्रवाद से उबरने का सफर कैसा रहा है?
असम दशकों तक ULFA जैसे संगठनों के उग्रवाद और जातीय संघर्षों से जूझता रहा। वर्षों की शांति वार्ता और समझौतों के बाद स्थिति में सुधार आया है, जिसे सरमा सरकार अपने कार्यकाल की उपलब्धियों में गिनाती है।
सरमा के बयान का व्यापक अर्थ क्या है?
सरमा के अनुसार यह बदलाव सिर्फ परिवहन तक सीमित नहीं, बल्कि यह असम की सामाजिक और आर्थिक पहचान का कायापलट है। उन्होंने बुनियादी ढाँचे, शांति और कनेक्टिविटी को इस परिवर्तन के तीन मुख्य आधार बताया।
पूर्वोत्तर भारत को देश से जोड़ने की सरकार की क्या योजना है?
राज्य और केंद्र सरकार पूर्वोत्तर क्षेत्र को रेल, सड़क और वायुमार्ग के माध्यम से शेष भारत से अधिक मजबूती से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इस क्षेत्र में निवेश और पर्यटन को बढ़ावा देना भी दीर्घकालिक लक्ष्यों में शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
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