हिमंता बिस्वा सरमा बोले — असम का सफर 'बंदूक की गोलियों से बुलेट ट्रेन' तक, नए युग की शुरुआत
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 5 नवंबर 2026 को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि जो राज्य कभी बंदूक की गोलियों और हिंसा से दहशत में डूबा रहता था, वह आज विकास की 'बुलेट ट्रेन' की रफ्तार से आगे बढ़ने का सपना देख रहा है। उन्होंने इस परिवर्तन को असम की पहचान और भविष्य के 'कायापलट' के रूप में परिभाषित किया।
मुख्यमंत्री के शब्दों में बदलाव की तस्वीर
सरमा ने अपनी पोस्ट में कहा, 'जो असम कभी बंदूक की गोलियों की आवाज से कांप उठता था, वह आज विकास की बुलेट ट्रेन की रफ्तार से आगे बढ़ने का सपना देख रहा है।' उन्होंने इस बदलाव को केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि राज्य की संरचनात्मक पुनर्कल्पना बताया।
उन्होंने आगे कहा, 'बंदूक की गोलियों से बुलेट ट्रेन तक — डर और दहशत वाले अतीत को पीछे छोड़कर प्रगति के नए क्षितिज की ओर बढ़ना, यही नए असम का कभी न रुकने वाला सफर है।'
कनेक्टिविटी की पुरानी चुनौती और आज की स्थिति
मुख्यमंत्री ने उस दौर को भी याद किया जब गुवाहाटी से नई दिल्ली तक का सफर तय करने में 30 से 36 घंटे लग जाते थे। उन्होंने कहा, 'जो असम कभी दिल्ली पहुँचने के लिए 30-36 घंटे का लंबा सफर तय करता था, वह आज बेहतर कनेक्टिविटी, विकास और नई संभावनाओं की दहलीज पर खड़ा है।'
यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पूर्वोत्तर क्षेत्र में रेल, सड़क और वायु मार्गों के विस्तार पर जोर दे रही है। पूर्वोत्तर भारत को देश के शेष हिस्सों से जोड़ना मौजूदा सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।
हिंसा से शांति तक — असम का पृष्ठभूमि संदर्भ
गौरतलब है कि असम दशकों तक उग्रवाद और जातीय संघर्षों की आग में जलता रहा। ULFA (यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम) जैसे संगठनों के साथ दीर्घकालिक संघर्ष के बाद, राज्य में शांति प्रक्रिया को लेकर कई समझौते हुए। सरमा ने अपनी सरकार के कार्यकाल में इस शांति प्रक्रिया को एक नई गति देने का दावा किया है।
सरमा ने बार-बार यह रेखांकित किया है कि बेहतर बुनियादी ढाँचा, कनेक्टिविटी और स्थायी शांति — ये तीन स्तंभ असम के नए स्वरूप की नींव हैं।
व्यापक बदलाव की दिशा
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव केवल परिवहन बुनियादी ढाँचे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह असम की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान में एक व्यापक परिवर्तन को दर्शाता है। उन्होंने कहा, 'यह सिर्फ परिवहन में आया बदलाव नहीं है, बल्कि यह असम की पहचान और भविष्य का कायापलट है।'
राज्य सरकार पूर्वोत्तर क्षेत्र को देश के शेष भागों के साथ अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने के प्रयास जारी रखे हुए है, और आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में निवेश और पर्यटन को भी बढ़ावा देने की योजना है।