5 नवंबर 2026
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पैकेटबंद स्नैक्स खरीदने से पहले लेबल पलटें: शुगर, सोडियम और सैचुरेटेड फैट जरूर जाँचें

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पैकेटबंद स्नैक्स खरीदने से पहले लेबल पलटें: शुगर, सोडियम और सैचुरेटेड फैट जरूर जाँचें

सारांश

चिप्स, बिस्कुट और नमकीन के रंगीन पैकेट के 'हेल्दी' दावे भ्रामक हो सकते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ़ कहा — पैकेट पलटें और शुगर, सोडियम व सैचुरेटेड फैट की मात्रा जाँचें। यही तीन संख्याएँ आपकी सेहत का असली फैसला करती हैं।

मुख्य बातें

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 5 नवंबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के फूड लेबल पढ़ने की अपील की।
पैकेट के सामने लिखे 'हेल्दी', 'लो फैट', 'नेचुरल' जैसे दावे खाद्य पदार्थ की पूरी जानकारी नहीं देते — सच्चाई पीछे के लेबल में होती है।
अत्यधिक शुगर का सेवन वज़न वृद्धि, दाँतों की समस्याओं और टाइप-2 डायबिटीज़ का जोखिम बढ़ाता है।
अधिक सोडियम से उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों का खतरा; WHO की प्रतिदिन 2,000 मिलीग्राम से कम की सीमा।
अधिक सैचुरेटेड फैट से LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल) बढ़ता है, जो हृदय रोगों से जुड़ा है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 5 नवंबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर भारतीयों को सचेत किया कि पैकेटबंद खाद्य पदार्थ खरीदते समय पैकेट के पीछे दिए गए फूड लेबल में शुगर, सोडियम और सैचुरेटेड फैट की मात्रा अवश्य जाँचनी चाहिए। मंत्रालय के अनुसार, आकर्षक पैकेजिंग और 'हेल्दी', 'लो फैट' या 'शुगर फ्री' जैसे दावे किसी उत्पाद की पूरी सच्चाई नहीं बताते — असल जानकारी पैकेट के पिछले हिस्से में दर्ज पोषण-संबंधी विवरण में होती है।

आकर्षक दावों के पीछे की असलियत

बाज़ार में उपलब्ध चिप्स, बिस्कुट, नमकीन, इंस्टेंट नूडल्स और अन्य पैक्ड स्नैक्स की पैकेजिंग प्रायः उपभोक्ता को लुभाने के लिए तैयार की जाती है। पैकेट के सामने बड़े अक्षरों में लिखे दावे — जैसे 'नेचुरल', 'मल्टीग्रेन' या 'शुगर फ्री' — अक्सर भ्रामक हो सकते हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) के दिशानिर्देशों के तहत प्रत्येक पैकेटबंद उत्पाद पर पोषण-संबंधी जानकारी देना अनिवार्य है, और उपभोक्ताओं को उसी का उपयोग करना चाहिए।

शुगर: छिपी हुई मिठास का खतरा

पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में अतिरिक्त शुगर की मात्रा अक्सर उत्पाद के स्वाद से अधिक होती है। फ्लेवर्ड ड्रिंक्स, बिस्कुट और कई नमकीन स्नैक्स में भी चीनी मिलाई जाती है, जो तुरंत महसूस नहीं होती। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक शुगर का सेवन वज़न वृद्धि, दाँतों की समस्याओं और टाइप-2 डायबिटीज़ के जोखिम को बढ़ाता है। इसलिए लेबल पर 'Total Sugars' या 'Added Sugars' की मात्रा देखना ज़रूरी है।

सोडियम: हृदय और रक्तचाप का शत्रु

चिप्स, नमकीन, इंस्टेंट नूडल्स और प्रोसेस्ड फूड में सोडियम की मात्रा सामान्यतः अधिक होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एक वयस्क को प्रतिदिन 2,000 मिलीग्राम से कम सोडियम लेना चाहिए। जरूरत से अधिक सोडियम का सेवन उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) और हृदय रोगों के खतरे को बढ़ा सकता है। एक छोटे पैकेट में ही दैनिक अनुशंसित मात्रा का बड़ा हिस्सा हो सकता है।

सैचुरेटेड फैट: कोलेस्ट्रॉल और दिल की बीमारियाँ

पैकेटबंद स्नैक्स में अक्सर सैचुरेटेड फैट अधिक मात्रा में होता है, जो शरीर में LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल) का स्तर बढ़ाता है। यह हृदय रोगों और धमनियों के अवरुद्ध होने के जोखिम से जुड़ा है। मंत्रालय की सलाह है कि ऐसे उत्पाद चुनें जिनमें सैचुरेटेड फैट की मात्रा न्यूनतम हो। ट्रांस फैट से पूरी तरह परहेज़ करना श्रेयस्कर है।

स्मार्ट खरीदारी की आदत: आगे की राह

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की यह पहल ऐसे समय में आई है जब भारत में पैकेटबंद खाद्य पदार्थों की खपत तेज़ी से बढ़ रही है और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ — जैसे मधुमेह और हृदय रोग — राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं। उपभोक्ताओं से आग्रह है कि वे फूड लेबल पढ़ने की आदत डालें, सर्विंग साइज़ पर ध्यान दें और तुलनात्मक रूप से कम शुगर, सोडियम एवं सैचुरेटेड फैट वाले विकल्प चुनें। जागरूक उपभोक्ता ही दीर्घकालिक स्वास्थ्य की नींव रखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल नीतिगत है — भारत में फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग (FOPL) को अनिवार्य बनाने की माँग वर्षों से लंबित है। FSSAI ने 'हेल्थ स्टार रेटिंग' जैसे प्रस्ताव पर विचार किया, लेकिन खाद्य उद्योग के दबाव में प्रगति धीमी रही। जब तक पैकेट के सामने स्पष्ट चेतावनी लेबल अनिवार्य नहीं होता, उपभोक्ता शिक्षा अकेले पर्याप्त नहीं होगी — खासकर उन करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए जो पोषण-संबंधी जटिल जानकारी को समझने में सक्षम नहीं हैं।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पैकेटबंद स्नैक्स का फूड लेबल पढ़ना क्यों ज़रूरी है?
फूड लेबल में उत्पाद की वास्तविक पोषण-संबंधी जानकारी होती है, जो पैकेट के सामने लिखे दावों से अलग हो सकती है। 'हेल्दी' या 'लो फैट' लिखा होने के बावजूद उत्पाद में शुगर, सोडियम या सैचुरेटेड फैट अधिक मात्रा में हो सकता है।
पैकेटबंद खाने में शुगर की अधिकता से क्या नुकसान होता है?
अत्यधिक शुगर के सेवन से वज़न बढ़ना, दाँतों की समस्याएँ और टाइप-2 डायबिटीज़ का जोखिम बढ़ता है। बिस्कुट, फ्लेवर्ड ड्रिंक्स और नमकीन स्नैक्स में भी छिपी हुई शुगर हो सकती है जो स्वाद से पहचान नहीं आती।
प्रतिदिन कितना सोडियम लेना सुरक्षित माना जाता है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार एक वयस्क को प्रतिदिन 2,000 मिलीग्राम से कम सोडियम लेना चाहिए। चिप्स, नमकीन और इंस्टेंट नूडल्स के एक छोटे पैकेट में ही इस सीमा का बड़ा हिस्सा हो सकता है।
सैचुरेटेड फैट सेहत के लिए कैसे हानिकारक है?
सैचुरेटेड फैट का अधिक सेवन शरीर में LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ाता है, जिससे हृदय रोगों और धमनियों के अवरुद्ध होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए पैकेट पर सैचुरेटेड फैट की मात्रा जाँच कर कम फैट वाले विकल्प चुनने चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने पैकेटबंद फूड को लेकर क्या सलाह दी है?
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 5 नवंबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर उपभोक्ताओं से आग्रह किया कि वे आकर्षक पैकेजिंग या सामने लिखे दावों पर भरोसा करने के बजाय पैकेट के पीछे दिए फूड लेबल में शुगर, सोडियम और सैचुरेटेड फैट की मात्रा अवश्य जाँचें।
राष्ट्र प्रेस
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