28 अगस्त 2026
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अमित शाह ने अहमदाबाद में टाइप-1 डायबिटीज पीड़ित बेटियों संग मनाया रक्षाबंधन, आजीवन मुफ्त इंसुलिन योजना पर डाला प्रकाश

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अमित शाह ने अहमदाबाद में टाइप-1 डायबिटीज पीड़ित बेटियों संग मनाया रक्षाबंधन, आजीवन मुफ्त इंसुलिन योजना पर डाला प्रकाश

सारांश

रक्षाबंधन पर अमित शाह का अहमदाबाद दौरा महज एक भावनात्मक आयोजन नहीं था — यह आरबीएसके 2.0 के तहत टाइप-1 डायबिटीज पीड़ित बच्चों को आजीवन मुफ्त इंसुलिन देने की उस पहल का सार्वजनिक चेहरा था, जिसे शाह ने 'कई विकसित देशों से आगे' बताया।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह ने 28 अगस्त 2026 को अहमदाबाद में टाइप-1 डायबिटीज पीड़ित बच्चियों के साथ रक्षाबंधन मनाया।
गांधीनगर संसदीय क्षेत्र में 18 वर्ष तक के टाइप-1 डायबिटीज पीड़ित बच्चों को आजीवन निःशुल्क इंसुलिन दी जा रही है।
यह पहल राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) 2.0 के तहत 30 अप्रैल को जारी दिशानिर्देशों पर आधारित है।
एकीकृत प्रणाली में स्क्रीनिंग, जाँच, इंसुलिन वितरण, उपचार, निगरानी और फॉलो-अप शामिल हैं।
शाह ने इस पहल को 'कई विकसित देशों से आगे' बताते हुए इसे मोदी सरकार की 'सेवा, संवेदना और सुरक्षा' नीति का प्रमाण कहा।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 28 अगस्त 2026 को अहमदाबाद में अपने गांधीनगर संसदीय क्षेत्र की टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चियों के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया। इस भावपूर्ण अवसर पर इन बच्चियों ने गृह मंत्री की कलाई पर राखी बाँधी, और शाह ने उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मुख्य घटनाक्रम

यह मुलाकात गांधीनगर संसदीय क्षेत्र में संचालित एक विशेष पहल के तहत हुई, जिसका उद्देश्य 18 वर्ष तक की आयु के टाइप-1 डायबिटीज पीड़ित बच्चों को आजीवन निःशुल्क इंसुलिन उपलब्ध कराना है। शाह ने इस अवसर की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा कीं।

अपनी पोस्ट में शाह ने लिखा, 'आज अहमदाबाद में अपने संसदीय क्षेत्र की टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बेटियों के साथ रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया। टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों को जीवनभर इंसुलिन के इंजेक्शन की आवश्यकता होती है, जो उनके परिवारों पर बड़ा आर्थिक बोझ डालता है। मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार की ओर से ऐसे सभी बच्चों को आजीवन निःशुल्क इंसुलिन उपलब्ध कराई जा रही है।'

योजना का ढाँचा और दायरा

यह पहल राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) 2.0 के अंतर्गत 30 अप्रैल को जारी दिशानिर्देशों पर आधारित है। गांधीनगर में एक एकीकृत प्रणाली विकसित की गई है, जिसमें स्क्रीनिंग, जाँच, इंसुलिन वितरण, उपचार, निगरानी और फॉलो-अप — सभी चरण शामिल हैं।

टाइप-1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून स्थिति है जिसमें अग्न्याशय इंसुलिन उत्पन्न करना बंद कर देता है। इससे पीड़ित बच्चों को जीवनभर इंसुलिन इंजेक्शन पर निर्भर रहना पड़ता है, जिसकी लागत अधिकांश निम्न-मध्यम आय परिवारों के लिए वहन करना कठिन होता है।

सरकार का पक्ष

शाह ने अपनी पोस्ट में इस पहल को 'दूरदर्शी' बताते हुए कहा कि 'यह दूरदर्शी पहल, जिसे कई विकसित देश भी अभी लागू करने के लिए प्रयासरत हैं, मोदी सरकार की सेवा, संवेदना और सुरक्षा के सिद्धांतों के प्रति कटिबद्धता का प्रमाण है।' उन्होंने इस अवसर पर देशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएँ भी दीं।

आम जनता पर असर

इस योजना से गांधीनगर संसदीय क्षेत्र के वे सभी बच्चे लाभान्वित होंगे जो 18 वर्ष की आयु तक टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित हैं। परिवारों पर इंसुलिन की आजीवन लागत का बोझ समाप्त होने से उनकी आर्थिक स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।

क्या होगा आगे

आरबीएसके 2.0 के दिशानिर्देशों के आधार पर इस मॉडल को अन्य संसदीय क्षेत्रों तक विस्तारित किए जाने की संभावना है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस एकीकृत प्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाए, तो यह बाल मधुमेह प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका दायरा अभी एक संसदीय क्षेत्र तक सीमित है — जबकि भारत में टाइप-1 डायबिटीज पीड़ित बच्चों की संख्या लाखों में है। असली परीक्षा यह है कि क्या यह मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर स्केल हो सकता है और क्या आरबीएसके 2.0 के दिशानिर्देश सभी राज्यों में समान रूप से लागू होंगे। रक्षाबंधन जैसे प्रतीकात्मक अवसर पर इस योजना को उजागर करना राजनीतिक संचार की दृष्टि से प्रभावी है, परंतु स्वास्थ्य नीति की असल कसौटी क्रियान्वयन की निरंतरता और भौगोलिक व्यापकता होगी।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह ने रक्षाबंधन पर किन बच्चियों के साथ राखी बँधवाई?
गृह मंत्री अमित शाह ने 28 अगस्त 2026 को अहमदाबाद में अपने गांधीनगर संसदीय क्षेत्र की टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चियों के साथ रक्षाबंधन मनाया। ये बच्चियाँ उस पहल के तहत उनसे मिलीं जो इन्हें आजीवन निःशुल्क इंसुलिन उपलब्ध कराती है।
टाइप-1 डायबिटीज पीड़ित बच्चों को मुफ्त इंसुलिन देने की योजना क्या है?
यह राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) 2.0 के तहत 30 अप्रैल को जारी दिशानिर्देशों पर आधारित पहल है, जिसके अंतर्गत गांधीनगर में 18 वर्ष तक के टाइप-1 डायबिटीज पीड़ित बच्चों को आजीवन निःशुल्क इंसुलिन दी जाती है। इसमें स्क्रीनिंग से लेकर फॉलो-अप तक एक एकीकृत प्रणाली शामिल है।
टाइप-1 डायबिटीज में इंसुलिन क्यों ज़रूरी है और यह परिवारों पर कैसे बोझ बनती है?
टाइप-1 डायबिटीज में शरीर का अग्न्याशय इंसुलिन बनाना बंद कर देता है, इसलिए पीड़ित बच्चों को जीवनभर इंसुलिन इंजेक्शन लेने पड़ते हैं। इसकी निरंतर लागत अधिकांश निम्न-मध्यम आय परिवारों के लिए भारी आर्थिक बोझ बन जाती है, जिसे यह सरकारी पहल समाप्त करने का प्रयास करती है।
क्या यह मुफ्त इंसुलिन योजना पूरे भारत में लागू है?
फिलहाल यह पहल गांधीनगर संसदीय क्षेत्र में संचालित है। आरबीएसके 2.0 के दिशानिर्देश राष्ट्रीय स्तर पर जारी किए गए हैं, लेकिन इस एकीकृत मॉडल का अन्य क्षेत्रों तक विस्तार अभी स्पष्ट नहीं है।
अमित शाह ने रक्षाबंधन पर और क्या संदेश दिया?
शाह ने एक्स पर पोस्ट करते हुए समस्त देशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएँ दीं और कहा कि यह पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए। उन्होंने इस पहल को मोदी सरकार की 'सेवा, संवेदना और सुरक्षा' की नीति का प्रतीक बताया।
राष्ट्र प्रेस
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