नेहरू के रिकॉर्ड के पास भी नहीं मोदी, 12 साल में कुछ हासिल नहीं: हुसैन दलवई
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने 10 जून 2026 को मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे लंबे समय तक सेवारत निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने के दावे को सिरे से खारिज कर दिया। दलवई ने स्पष्ट किया कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का रिकॉर्ड अभी तक नहीं टूटा है और एनडीए नेता जानबूझकर देश में भ्रम फैला रहे हैं।
मोदी बनाम नेहरू: दलवई का तर्क
दलवई ने कहा कि पीएम मोदी ने 12 वर्षों में देश के लिए कोई उल्लेखनीय काम नहीं किया है। उनके शब्दों में, 'जवाहर लाल नेहरू ने जितना काम किया था, पीएम मोदी उसके आसपास भी नहीं हैं।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी संगठन जानबूझकर भ्रामक तथ्य फैला रहे हैं।
योगी के 'धर्मशाला' बयान पर पलटवार
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कहा था कि भारत की धरती उन लोगों के लिए 'धर्मशाला' नहीं हो सकती, जिनकी देश के प्रति आस्था नहीं है और जो यहाँ के संस्कारों तथा परंपराओं का सम्मान नहीं करते। दलवई ने इस बयान को देश के लिए नुकसानदेह बताया और कहा कि वास्तव में योगी आदित्यनाथ और पीएम मोदी द्वारा लगातार हिंदू धर्म का मुद्दा उठाते रहना ही भारत को 'धर्मशाला' बनाने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा, 'यह किसने किया है? आप ही तो ऐसा कर रहे हैं, फिर दूसरों पर दोष क्यों मढ़ रहे हैं?'
इंडी अलायंस और गठबंधन की एकता
इंडी अलायंस की बैठक को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव के बयानों पर दलवई ने सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'उनकी जो माँग है, वह तो राहुल गांधी हमेशा पूरी करते रहते हैं। कांग्रेस इस तरह से सबको साथ लेकर चलने की कोशिश करती है।' दलवई ने जोर देकर कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) सभी सहयोगी दलों की भावनाओं का सम्मान करते हुए सामूहिक रूप से लोकतंत्र की रक्षा के लिए काम कर रही है।
चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप
वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ी और चुनाव आयोग के कामकाज पर राहुल गांधी के आरोपों का समर्थन करते हुए दलवई ने कहा कि कांग्रेस पार्टी 'निराश नहीं, बल्कि नाराज है।' उनके अनुसार, चुनाव आयोग जिस तरह से काम कर रहा है, उसका सीधा असर निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने अपने ही सचिव को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया, जिससे आयोग की स्वतंत्रता कमजोर हुई है।
संस्थाओं की स्वायत्तता पर सवाल
दलवई ने आगे आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े लोगों को महत्वपूर्ण संस्थानों में नियुक्त कर न्यायपालिका सहित अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। BJP ने इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह बयानबाजी ऐसे समय में आई है जब विपक्ष 2027 के चुनावी चक्र से पहले गठबंधन की धुरी को मजबूत करने में जुटा है।