हैदराबाद में मानसून की पहली बारिश में करंट से दो की मौत, 80 जगह पेड़ गिरे
सारांश
मुख्य बातें
मानसून की पहली भारी बारिश ने मंगलवार, 9 जून की शाम हैदराबाद में तबाही मचा दी — बंदलागुडा इलाके में टूटे बिजली के तारों की चपेट में आने से जफर (25) और अबू (16) नाम के दो युवकों की मौत हो गई। दोनों एक ऑटो-रिक्शा से उतरे और सड़क पर जमा पानी के नीचे दबे टूटे बिजली के तार के संपर्क में आ गए।
मौत की वजह: टूटे तार और जलभराव का घातक संयोग
अधिकारियों के अनुसार, तेज आँधी के कारण पुराने शहर के बंदलागुडा क्षेत्र में बिजली का तार टूटकर सड़क पर गिर गया था। भारी बारिश से सड़क पर पानी भर जाने के कारण यह तार पानी के नीचे छिप गया। जब जफर और अबू ऑटो-रिक्शा से उतरकर उस पानी में चले, तो करंट लगने से दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। यह ऐसे समय में हुआ जब दक्षिण-पश्चिम मानसून ने इस सीज़न में पहली बार शहर पर पूरी ताकत से दस्तक दी।
शहर में जलभराव और यातायात ठप
मध्य हैदराबाद, सिकंदराबाद, माधापुर, गाचीबौली के आईटी कॉरिडोर और उपनगरीय इलाकों की प्रमुख सड़कों पर व्यापक जलभराव दर्ज किया गया। नयनी नरसिम्हा रेड्डी स्टील ब्रिज — शहर के सबसे लंबे फ्लाईओवरों में से एक — पर भी पानी भर गया। टोली चौकी को आईटी कॉरिडोर से जोड़ने वाले शेखपेट पुल के रैंप पर भी जलभराव की सूचना मिली। माधापुर, मियापुर, रायदुर्गम और पीवीएनआर एक्सप्रेसवे के आसपास भारी यातायात जाम रहा।
राहत और बचाव कार्य
आपदा प्रतिक्रिया बल (DRF), ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC), हैदराबाद आपदा प्रबंधन एवं संपत्ति संरक्षण एजेंसी (HYDRAA) और यातायात पुलिस की टीमें जलभराव वाले इलाकों में तैनात रहीं। यातायात पुलिस ने नागरिकों को सतर्क रहने, वाहनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी। पुराने शहर के चटबाजार इलाके में एक पुराना मेहराब ढह गया, हालाँकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ।
बारिश के आँकड़े और नुकसान
कई क्षेत्रों में दो घंटे से भी कम समय में भारी बारिश दर्ज की गई। बंसीलालपेट में सर्वाधिक 8.7 सेंटीमीटर बारिश हुई। विठ्ठलवाड़ी और हिमायतनगर में 7.8 सेंटीमीटर तथा विद्यानगर में 7.3 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। तेज हवाओं के कारण शहर के 80 स्थानों पर पेड़ गिरे, जिन्हें हटाने में नगर निगम के कर्मचारी जुटे रहे।
आगे क्या
गौरतलब है कि हैदराबाद में हर मानसून सीज़न में जलभराव और बिजली के तारों से होने वाली दुर्घटनाएँ बड़ी चुनौती बनती हैं। इस बार भी पहली ही भारी बारिश में दो जानें जाने के बाद GHMC और HYDRAA पर बुनियादी ढाँचे की तैयारी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे शेष मानसून सीज़न से पहले खतरनाक बिजली लाइनों की पहचान और मरम्मत को प्राथमिकता देंगे।