आईसीएआई और सरकार का सहयोग भारत के वैश्विक व्यापार लक्ष्यों को देगा नई रफ्तार: पीयूष गोयल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 8 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) के नेतृत्व के साथ बैठक के बाद स्पष्ट किया कि चार्टर्ड अकाउंटेंसी पेशे और सरकार के बीच गहरा संस्थागत सहयोग भारत की आर्थिक वृद्धि को गति देने और वैश्विक व्यापार में देश की महत्वाकांक्षाओं को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत एक के बाद एक नए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर कर वैश्विक बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है।
बैठक में क्या हुई चर्चा
मंत्री गोयल ने बताया कि आईसीएआई अध्यक्ष सीए प्रसन्ना कुमार डी के साथ हुई इस बैठक में सरकार और चार्टर्ड अकाउंटेंसी पेशे के बीच सहयोग के विभिन्न आयामों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। चर्चा का केंद्र यह रहा कि बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में व्यवसायों को नए अवसरों का लाभ दिलाने में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की भूमिका को और अधिक प्रभावी कैसे बनाया जाए।
गोयल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "आईसीएआई के अध्यक्ष सीए प्रसन्ना कुमार डी के साथ सार्थक बैठक हुई, जिसमें भारत की आर्थिक वृद्धि और वैश्विक व्यापारिक महत्वाकांक्षाओं को समर्थन देने के लिए सहयोग मजबूत करने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।"
एफटीए इकोसिस्टम में आईसीएआई की भूमिका
बैठक में मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से जुड़े इकोसिस्टम में आईसीएआई की संस्थागत भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। गोयल के अनुसार, आईसीएआई जैसे पेशेवर संस्थानों की सक्रिय भागीदारी से कारोबारियों को भारत के बढ़ते एफटीए नेटवर्क से मिलने वाले अवसरों को बेहतर ढंग से समझने और उनका लाभ उठाने में व्यावहारिक मदद मिलेगी।
मंत्री ने कहा, "हमने व्यापार और निवेश को सुगम बनाने में अकाउंटिंग प्रोफेशन की बदलती भूमिका, एफटीए इकोसिस्टम में संस्थागत भागीदारी बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर उभरते नए अवसरों का लाभ उठाने में कारोबारों को सहयोग देने जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की।"
युवाओं और कौशल विकास पर जोर
गौरतलब है कि इस सप्ताह की शुरुआत में भी गोयल ने कहा था कि भारत के नए एफटीए विनिर्माण और नवाचार के क्षेत्र में नए द्वार खोल रहे हैं। उन्होंने युवाओं को व्यावहारिक कौशल विकसित करने और तकनीक-आधारित शिक्षा को अपनाने की अपील की, ताकि वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें और इन अवसरों का पूरा लाभ उठा सकें।
नीति-निर्माताओं और पेशेवर संस्थाओं की साझेदारी क्यों जरूरी
बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि नीति-निर्माताओं और पेशेवर संस्थाओं के बीच मजबूत सहयोग व्यापार, निवेश और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए अनिवार्य है — खासकर तब, जब भारत वैश्विक बाजारों के साथ अपनी भागीदारी तेजी से बढ़ा रहा है। यह साझेदारी आने वाले वर्षों में भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति की धुरी बन सकती है।