31 जुलाई 2026
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IIT मद्रास का BIMSTEC AI रोड सेफ्टी हैकाथॉन 2026: 7 देशों ने मिलकर खोजे सड़क दुर्घटनाओं के AI समाधान

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IIT मद्रास का BIMSTEC AI रोड सेफ्टी हैकाथॉन 2026: 7 देशों ने मिलकर खोजे सड़क दुर्घटनाओं के AI समाधान

सारांश

बिम्सटेक क्षेत्र में हर साल 2 लाख सड़क मौतों के बीच IIT मद्रास ने 7 देशों को एक मंच पर लाकर AI से जवाब खोजने की पहल की। ड्राइवलीगल, रोडवॉच और रोड एसओएस — तीन चुनौतियाँ, तीन समाधान, और एक साझा लक्ष्य: तकनीक को सड़क पर जीवनरक्षक बनाना।

मुख्य बातें

IIT मद्रास ने पहली बार बिम्सटेक AI रोड सेफ्टी हैकाथॉन 2026 का आयोजन किया, जिसमें 7 देशों ने भाग लिया।
बिम्सटेक क्षेत्र में हर साल लगभग 2 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाते हैं; क्षेत्र की आबादी 1.8 अरब है।
प्रतिभागियों को ड्राइवलीगल , रोडवॉच और रोड एसओएस — तीन AI चुनौतियाँ दी गईं।
भारत की 'साइफर' टीम प्रथम, 'सिविक्स फोर्ज' द्वितीय और 'तेजस' तृतीय स्थान पर रही।
तीनों विजेता टीमों को ₹1 लाख की पुरस्कार राशि और IIT मद्रास के साथ समाधान विकसित करने का अवसर मिला।
हैकाथॉन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के संरक्षण में आयोजित हुआ।

IIT मद्रास के सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र ने पहली बार बिम्सटेक AI रोड सेफ्टी हैकाथॉन 2026 का आयोजन किया, जिसमें भारत सहित सात देशों के छात्रों, इंजीनियरों और शोधकर्ताओं ने सड़क दुर्घटनाओं से निपटने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित समाधान प्रस्तुत किए। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के संरक्षण में आयोजित यह प्रतियोगिता IIT मद्रास परिसर में संपन्न हुई। बिम्सटेक क्षेत्र में हर वर्ष लगभग 2 लाख लोग सड़क हादसों में जान गंवाते हैं — यही आँकड़ा इस पहल की तात्कालिकता को रेखांकित करता है।

हैकाथॉन में कौन-कौन शामिल हुआ

इस अंतरराष्ट्रीय हैकाथॉन में भारत, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड की टीमों ने भाग लिया। बिम्सटेक क्षेत्र की कुल आबादी लगभग 1.8 अरब है, और इस विशाल क्षेत्र में सड़क सुरक्षा एक साझा संकट बनी हुई है। संस्थान का उद्देश्य इन देशों के बीच ज्ञान, अनुभव और तकनीक के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और साझा डिजिटल समाधान विकसित करना है।

तीन बड़ी चुनौतियाँ, तीन AI समाधान

प्रतिभागियों के सामने तीन वास्तविक समस्याएँ रखी गईं। पहली — 'ड्राइवलीगल': एक ऐसा AI चैटबॉट जो उपयोगकर्ता की भौगोलिक स्थिति के अनुसार यातायात नियम, जुर्माना और कानूनी जानकारी तत्काल उपलब्ध कराए। दूसरी — 'रोडवॉच': एक नागरिक-केंद्रित प्लेटफ़ॉर्म जहाँ आम लोग सड़क के गड्ढों, टूटी सड़कों या खराब संकेतकों की शिकायत दर्ज करा सकें और संबंधित विभाग की कार्रवाई को ट्रैक कर सकें। तीसरी — 'रोड एसओएस': दुर्घटना होने पर निकटतम ट्रॉमा सेंटर, एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाओं की जानकारी तुरंत देने वाला AI समाधान।

उल्लेखनीय तकनीकी नवाचार

हैकाथॉन के दौरान कई टीमों ने प्रभावशाली समाधान प्रस्तुत किए। कुछ टीमों ने मोबाइल फोन के स्पीड सेंसर का उपयोग करके दुर्घटना-पहचान प्रणाली विकसित की, जो इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना भी काम करने में सक्षम है — यह ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। एक अन्य टीम ने ऐसा AI चैटबॉट तैयार किया जो यातायात कानूनों की जानकारी देने के साथ-साथ प्रश्नोत्तरी के ज़रिए नागरिकों को सड़क नियम भी सिखाता है।

विजेता टीमें और पुरस्कार

प्रतियोगिता में भारत की 'साइफर' टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। 'सिविक्स फोर्ज' दूसरे और 'तेजस' तीसरे स्थान पर रही। तीनों विजेता टीमों को संयुक्त रूप से ₹1 लाख की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। इसके साथ ही उन्हें IIT मद्रास के सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र के साथ मिलकर अपने समाधानों को और विकसित करने का अवसर भी दिया जाएगा। थाईलैंड की 'रोड लीगल' और नेपाल की 'क्यूरिएटर्स' टीम को उनके अभिनव समाधानों के लिए विशेष सराहना मिली।

आगे की राह

विदेश मंत्रालय ने इस अवसर पर कहा कि सड़क सुरक्षा किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की साझा ज़िम्मेदारी है। हैकाथॉन में चुने गए श्रेष्ठ समाधानों को IIT मद्रास के तकनीकी मार्गदर्शन में बड़े पैमाने पर लागू किए जाने की योजना है। IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटी ने कहा कि 'शोध तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज तक पहुँचे।' यह हैकाथॉन AI को महज़ तकनीक नहीं, बल्कि सड़क पर जीवन बचाने के माध्यम के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा प्रयोगशाला से सड़क तक की यात्रा में है। भारत में हर साल डेढ़ लाख से अधिक सड़क मौतें होती हैं, और इसके बावजूद पिछले कई वर्षों में तकनीक-आधारित समाधानों का पायलट स्तर से आगे बढ़ना दुर्लभ रहा है। ड्राइवलीगल और रोड एसओएस जैसे विचार तभी जीवन बचाएँगे जब इनके क्रियान्वयन के लिए सरकारी खरीद, इंफ्रास्ट्रक्चर एकीकरण और बहुभाषी पहुँच सुनिश्चित हो — जिसका ब्यौरा अभी सामने नहीं आया है। मंत्रालय का संरक्षण उत्साहजनक है, पर यह देखना होगा कि हैकाथॉन की विजेता प्रविष्टियाँ नीतिगत ढाँचे में कितनी जल्दी और किस रूप में जगह पाती हैं।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिम्सटेक AI रोड सेफ्टी हैकाथॉन 2026 क्या है?
यह IIT मद्रास के सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र द्वारा आयोजित पहला अंतरराष्ट्रीय हैकाथॉन है, जिसमें बिम्सटेक के सात सदस्य देशों के प्रतिभागियों ने सड़क दुर्घटनाओं से निपटने के लिए AI आधारित डिजिटल समाधान विकसित किए। यह आयोजन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के संरक्षण में IIT मद्रास परिसर में हुआ।
हैकाथॉन में किन देशों ने भाग लिया?
इस हैकाथॉन में भारत, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड — कुल सात बिम्सटेक देशों के छात्र, इंजीनियर और शोधकर्ता शामिल हुए।
हैकाथॉन में कौन-सी तीन AI चुनौतियाँ दी गई थीं?
तीन चुनौतियाँ थीं — 'ड्राइवलीगल' (स्थान-आधारित यातायात कानून जानकारी देने वाला AI चैटबॉट), 'रोडवॉच' (सड़क समस्याओं की नागरिक-शिकायत और ट्रैकिंग प्लेटफ़ॉर्म) और 'रोड एसओएस' (दुर्घटना के बाद निकटतम आपातकालीन सेवाएँ खोजने वाला AI समाधान)।
हैकाथॉन में विजेता टीमें कौन-सी रहीं और उन्हें क्या मिला?
भारत की 'साइफर' टीम प्रथम, 'सिविक्स फोर्ज' द्वितीय और 'तेजस' तृतीय स्थान पर रही। तीनों विजेता टीमों को कुल ₹1 लाख की पुरस्कार राशि और IIT मद्रास के सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र के साथ अपने समाधानों को आगे विकसित करने का अवसर प्रदान किया गया।
इस हैकाथॉन का महत्व क्यों है?
बिम्सटेक क्षेत्र में हर साल लगभग 2 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं और क्षेत्र की आबादी 1.8 अरब है। IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटी के अनुसार, इस हैकाथॉन का उद्देश्य AI को केवल तकनीक नहीं, बल्कि सड़क पर जीवन बचाने का माध्यम बनाना है — और श्रेष्ठ समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू करने की योजना है।
राष्ट्र प्रेस
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