IIT मद्रास का BIMSTEC AI रोड सेफ्टी हैकाथॉन 2026: 7 देशों ने मिलकर खोजे सड़क दुर्घटनाओं के AI समाधान
सारांश
मुख्य बातें
IIT मद्रास के सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र ने पहली बार बिम्सटेक AI रोड सेफ्टी हैकाथॉन 2026 का आयोजन किया, जिसमें भारत सहित सात देशों के छात्रों, इंजीनियरों और शोधकर्ताओं ने सड़क दुर्घटनाओं से निपटने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित समाधान प्रस्तुत किए। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के संरक्षण में आयोजित यह प्रतियोगिता IIT मद्रास परिसर में संपन्न हुई। बिम्सटेक क्षेत्र में हर वर्ष लगभग 2 लाख लोग सड़क हादसों में जान गंवाते हैं — यही आँकड़ा इस पहल की तात्कालिकता को रेखांकित करता है।
हैकाथॉन में कौन-कौन शामिल हुआ
इस अंतरराष्ट्रीय हैकाथॉन में भारत, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड की टीमों ने भाग लिया। बिम्सटेक क्षेत्र की कुल आबादी लगभग 1.8 अरब है, और इस विशाल क्षेत्र में सड़क सुरक्षा एक साझा संकट बनी हुई है। संस्थान का उद्देश्य इन देशों के बीच ज्ञान, अनुभव और तकनीक के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और साझा डिजिटल समाधान विकसित करना है।
तीन बड़ी चुनौतियाँ, तीन AI समाधान
प्रतिभागियों के सामने तीन वास्तविक समस्याएँ रखी गईं। पहली — 'ड्राइवलीगल': एक ऐसा AI चैटबॉट जो उपयोगकर्ता की भौगोलिक स्थिति के अनुसार यातायात नियम, जुर्माना और कानूनी जानकारी तत्काल उपलब्ध कराए। दूसरी — 'रोडवॉच': एक नागरिक-केंद्रित प्लेटफ़ॉर्म जहाँ आम लोग सड़क के गड्ढों, टूटी सड़कों या खराब संकेतकों की शिकायत दर्ज करा सकें और संबंधित विभाग की कार्रवाई को ट्रैक कर सकें। तीसरी — 'रोड एसओएस': दुर्घटना होने पर निकटतम ट्रॉमा सेंटर, एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाओं की जानकारी तुरंत देने वाला AI समाधान।
उल्लेखनीय तकनीकी नवाचार
हैकाथॉन के दौरान कई टीमों ने प्रभावशाली समाधान प्रस्तुत किए। कुछ टीमों ने मोबाइल फोन के स्पीड सेंसर का उपयोग करके दुर्घटना-पहचान प्रणाली विकसित की, जो इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना भी काम करने में सक्षम है — यह ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। एक अन्य टीम ने ऐसा AI चैटबॉट तैयार किया जो यातायात कानूनों की जानकारी देने के साथ-साथ प्रश्नोत्तरी के ज़रिए नागरिकों को सड़क नियम भी सिखाता है।
विजेता टीमें और पुरस्कार
प्रतियोगिता में भारत की 'साइफर' टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। 'सिविक्स फोर्ज' दूसरे और 'तेजस' तीसरे स्थान पर रही। तीनों विजेता टीमों को संयुक्त रूप से ₹1 लाख की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। इसके साथ ही उन्हें IIT मद्रास के सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र के साथ मिलकर अपने समाधानों को और विकसित करने का अवसर भी दिया जाएगा। थाईलैंड की 'रोड लीगल' और नेपाल की 'क्यूरिएटर्स' टीम को उनके अभिनव समाधानों के लिए विशेष सराहना मिली।
आगे की राह
विदेश मंत्रालय ने इस अवसर पर कहा कि सड़क सुरक्षा किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की साझा ज़िम्मेदारी है। हैकाथॉन में चुने गए श्रेष्ठ समाधानों को IIT मद्रास के तकनीकी मार्गदर्शन में बड़े पैमाने पर लागू किए जाने की योजना है। IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटी ने कहा कि 'शोध तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज तक पहुँचे।' यह हैकाथॉन AI को महज़ तकनीक नहीं, बल्कि सड़क पर जीवन बचाने के माध्यम के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस कदम है।