IIT मद्रास की डॉक्यूमेंट्री 'पोर्ट्रेट ऑफ मेनी फेसेस': 17 छात्रों का संघर्ष, इरॉस यूनिवर्स के साथ साझेदारी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास ने अपने ऑनलाइन स्नातक उपाधि कार्यक्रमों में नामांकित छात्रों की वास्तविक जीवन-यात्राओं पर आधारित एक वृत्तचित्र फिल्म 'पोर्ट्रेट ऑफ मेनी फेसेस' तैयार की है, जिसे फिल्म निर्माण कंपनी इरॉस यूनिवर्स के साथ साझेदारी में देश और दुनिया के सामने पेश किया जाएगा। 15 अक्टूबर 2026 को सामने आई इस जानकारी के अनुसार, फिल्म में 17 विद्यार्थियों की कहानियाँ शामिल हैं, जो देश के अलग-अलग सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक परिवेश से आते हैं। यह वृत्तचित्र इस बात को रेखांकित करता है कि गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा तक पहुँच किस तरह जीवन बदल सकती है।
फिल्म की विषय-वस्तु और निर्माण
इस वृत्तचित्र का निर्देशन और संपादन IIT मद्रास के पूर्व छात्र शाश्वत मुखर्जी ने किया है। फिल्म की शूटिंग केवल कक्षाओं या संस्थान परिसर तक सीमित नहीं रही — टीम देशभर में विद्यार्थियों के घरों और उनके निजी परिवेश में पहुँची, ताकि यह दर्शाया जा सके कि वे किन परिस्थितियों में अपनी पढ़ाई जारी रखते हैं। फिल्म में छात्रों के पारिवारिक परिवेश, आर्थिक चुनौतियों, महत्वाकांक्षाओं और शिक्षा से मिले नए अवसरों को सामने लाया गया है।
IIT मद्रास के ऑनलाइन कार्यक्रम और उनकी पहुँच
संस्थान के अनुसार, IIT मद्रास के स्नातक उपाधि कार्यक्रमों में अभी 50,000 से अधिक सक्रिय विद्यार्थी नामांकित हैं। इसे कैंपस के बाहर से संचालित होने वाला दुनिया का सबसे बड़ा ऑनलाइन उपाधि कार्यक्रम बताया गया है। इन कार्यक्रमों की विशेषता यह है कि विद्यार्थियों को IIT मद्रास परिसर में रहना आवश्यक नहीं — वे अपने घर या अन्य स्थानों पर रहते हुए संस्थान के शिक्षकों से सीख सकते हैं। यह व्यवस्था उन छात्रों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, जो पारिवारिक जिम्मेदारियों, आर्थिक कठिनाइयों या भौगोलिक दूरी के कारण नियमित कैंपस-आधारित शिक्षा हासिल नहीं कर पाते।
निदेशक का वक्तव्य और स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा
IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि ने इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने शिक्षा को गरीबों तक पहुँचाने की आवश्यकता पर जोर दिया था और इसी विचार से प्रेरित होकर संस्थान ने ऐसे कार्यक्रम शुरू किए जिनके माध्यम से छात्र परिसर में आए बिना भी उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि इन कार्यक्रमों में नामांकित 25 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों से आते हैं। प्रोफेसर कामकोटि के अनुसार, 'पोर्ट्रेट ऑफ मेनी फेसेस' एक भावनात्मक और विचारोत्तेजक फिल्म है, जो शिक्षा को अधिक सुलभ बनाकर विवेकानंद के विचारों को व्यवहार में उतारने की राह दिखाती है।
निर्देशक शाश्वत मुखर्जी की अपनी कहानी
फिल्म के निर्देशक शाश्वत मुखर्जी की जीवन-यात्रा स्वयं इस कार्यक्रम की उपयोगिता का प्रमाण है। उन्होंने फिल्म निर्माण में भविष्य बनाने की इच्छा के साथ IIT मद्रास के स्नातक उपाधि कार्यक्रम में दाखिला लिया था। कार्यक्रम की लचीली अध्ययन व्यवस्था ने उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ एक फिल्म सोसायटी की स्थापना और नेतृत्व करने का अवसर दिया। इसके बाद उन्होंने दृश्य प्रभाव तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और फिल्म निर्माण के मेल पर काम करने वाला एक नया उद्यम भी शुरू किया।
वैश्विक प्रभाव की उम्मीद
प्रोफेसर कामकोटि ने उम्मीद जताई कि यह फिल्म दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचेगी और अन्य शैक्षणिक संस्थान भी ऐसे पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए प्रेरित होंगे, ताकि सभी को समान, गुणवत्तापूर्ण और किफायती शिक्षा मिल सके। गौरतलब है कि सामान्य संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) के रास्ते IIT व्यवस्था तक पहुँचना जिन विद्यार्थियों के लिए संभव नहीं था, उनके लिए ये ऑनलाइन कार्यक्रम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल करने का एक महत्वपूर्ण विकल्प बन चुके हैं। यह वृत्तचित्र उस संभावना को पर्दे पर जीवंत करता है।