3 सितंबर 2026
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IIT मद्रास में जे. संतोष की ऐतिहासिक एंट्री: 90% स्पाइनल डिसेबिलिटी और सेरेब्रल पाल्सी को हराकर ऑटो ड्राइवर के बेटे ने पाई जगह

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IIT मद्रास में जे. संतोष की ऐतिहासिक एंट्री: 90% स्पाइनल डिसेबिलिटी और सेरेब्रल पाल्सी को हराकर ऑटो ड्राइवर के बेटे ने पाई जगह

सारांश

90% स्पाइनल डिसेबिलिटी और सेरेब्रल पाल्सी से जूझते हुए, ऑटो चालक के 17 वर्षीय बेटे जे. संतोष ने IIT मद्रास के डेटा साइंस प्रोग्राम में जगह बनाई। दूसरी कोशिश में क्वालिफायर पास कर, NGO की मदद से फीस और AI ट्रेनिंग पाकर, संतोष ने साबित किया कि इरादा पक्का हो तो हर बाधा छोटी पड़ जाती है।

मुख्य बातें

संतोष (17 वर्ष) ने IIT मद्रास के 4 वर्षीय BS डेटा साइंस और एप्लीकेशन प्रोग्राम में प्रवेश पाया।
वे जन्म से 90% स्पाइनल मस्कुलर डिसेबिलिटी (SMA) और सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित हैं।
उनके पिता ऑटो रिक्शा चालक हैं; कोर्स की जानकारी NGO 'तमिलनाडु वॉलंटियर्स' से मिली।
'IIT मद्रास फॉर ऑल' पहल के तहत NGO उनकी पहले वर्ष की ट्यूशन फीस और AI प्रशिक्षण का खर्च उठाएगा।
पिछले वर्ष कैंपस दौरा न कर पाने के बाद, संतोष ने दूसरी कोशिश में क्वालिफायर परीक्षा पास की।
संतोष का लक्ष्य डिग्री पूरी कर IT सेक्टर में करियर बनाना है।

जे. संतोष, महज 17 वर्ष की उम्र में, 90 प्रतिशत स्पाइनल मस्कुलर डिसेबिलिटी (SMA) और सेरेब्रल पाल्सी जैसी गंभीर शारीरिक चुनौतियों के बावजूद, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के प्रतिष्ठित डेटा साइंस और एप्लीकेशन कार्यक्रम में प्रवेश पाने में सफल रहे हैं। तमिलनाडु के इस युवा की कहानी उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है, जो परिस्थितियों की आड़ में अपने सपनों को दफ़न कर देते हैं।

संतोष की पृष्ठभूमि और परिवार

जे. संतोष एक साधारण परिवार से आते हैं — उनके पिता एक ऑटो रिक्शा चालक हैं। जन्म से ही 90 प्रतिशत SMA और सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित संतोष के लिए रोज़मर्रा की ज़िंदगी भी एक संघर्ष रही है, फिर भी उन्होंने शिक्षा को अपना हथियार बनाया। गौरतलब है कि पिछले वर्ष वे स्कूल के साथ IIT मद्रास का दौरा नहीं कर पाए थे, लेकिन इस बार उन्होंने दूसरी कोशिश में क्वालिफायर परीक्षा पास कर संस्थान में अपनी जगह पक्की की।

IIT मद्रास तक कैसे पहुँचे संतोष

संतोष को IIT मद्रास के चार वर्षीय बैचलर ऑफ साइंस (BS) प्रोग्राम की जानकारी गैर सरकारी संगठन 'तमिलनाडु वॉलंटियर्स' के माध्यम से मिली। उन्होंने जानबूझकर ऐसा कोर्स चुना जिसे अधिकांशतः घर से पूरा किया जा सकता है — जो उनकी शारीरिक सीमाओं को देखते हुए एक व्यावहारिक निर्णय था। यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल शिक्षा ने दिव्यांग छात्रों के लिए अवसरों के नए द्वार खोले हैं।

IIT मद्रास और NGO का सहयोग

'IIT मद्रास फॉर ऑल' पहल के अंतर्गत संतोष को शुरुआती चरण में 'तमिलनाडु वॉलंटियर्स' की ओर से व्यक्तिगत सहायता मिलेगी, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रशिक्षण भी शामिल है। इसके अतिरिक्त, यह संगठन उनके पहले वर्ष की ट्यूशन फीस का पूरा खर्च वहन करेगा। IIT मद्रास ने गुरुवार, 3 सितंबर को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर यह जानकारी साझा की।

संतोष का लक्ष्य और आगे की राह

संतोष का सपना अपनी BS डिग्री पूरी कर IT सेक्टर में एक सफल करियर बनाना है। डेटा साइंस जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्र में उनका प्रवेश इस बात का प्रमाण है कि सही अवसर और दृढ़ इच्छाशक्ति मिल जाए, तो शारीरिक बाधाएँ भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। यह घटना उस व्यापक बहस को भी बल देती है कि दिव्यांग छात्रों के लिए उच्च शिक्षा में समावेशी ढाँचा और अधिक मज़बूत किया जाना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक असुविधाजनक सवाल भी उठाती है — क्या भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली में दिव्यांग छात्रों के लिए संरचनात्मक समावेश है, या वे केवल अपवाद बनकर सुर्खियाँ बटोरते हैं? एक NGO को फीस उठानी पड़ रही है और घर से पढ़ाई ही एकमात्र व्यावहारिक विकल्प है — यह व्यवस्था की सीमा को दर्शाता है, न कि उसकी सफलता को। 'IIT मद्रास फॉर ऑल' जैसी पहलें सराहनीय हैं, पर जब तक दिव्यांग छात्रों के लिए स्केलेबल नीतिगत ढाँचा नहीं बनता, ऐसी कहानियाँ अपवाद ही रहेंगी, मानक नहीं।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जे. संतोष कौन हैं और उन्होंने IIT मद्रास में कैसे प्रवेश पाया?
जे. संतोष 17 वर्षीय युवा हैं जो जन्म से 90% स्पाइनल मस्कुलर डिसेबिलिटी और सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित हैं। उन्होंने दूसरी कोशिश में क्वालिफायर परीक्षा पास कर IIT मद्रास के 4 वर्षीय BS डेटा साइंस और एप्लीकेशन प्रोग्राम में प्रवेश पाया।
जे. संतोष के परिवार की आर्थिक स्थिति क्या है?
जे. संतोष एक साधारण परिवार से आते हैं जहाँ उनके पिता ऑटो रिक्शा चालक हैं। उनकी पहले वर्ष की ट्यूशन फीस NGO 'तमिलनाडु वॉलंटियर्स' द्वारा वहन की जाएगी।
'IIT मद्रास फॉर ऑल' पहल क्या है और संतोष को इससे क्या मदद मिलेगी?
'IIT मद्रास फॉर ऑल' एक समावेशी शिक्षा पहल है जिसके तहत संतोष को NGO 'तमिलनाडु वॉलंटियर्स' से व्यक्तिगत सहायता और AI प्रशिक्षण मिलेगा। इसके साथ ही उनके पहले वर्ष की ट्यूशन फीस भी इस NGO द्वारा दी जाएगी।
जे. संतोष ने IIT मद्रास में कौन-सा कोर्स चुना और क्यों?
संतोष ने डेटा साइंस और एप्लीकेशन में 4 वर्षीय BS प्रोग्राम चुना क्योंकि इसे अधिकांशतः घर से पूरा किया जा सकता है, जो उनकी शारीरिक सीमाओं के अनुकूल है। इस कोर्स की जानकारी उन्हें NGO 'तमिलनाडु वॉलंटियर्स' से मिली।
जे. संतोष का भविष्य का लक्ष्य क्या है?
जे. संतोष का लक्ष्य IIT मद्रास से अपनी BS डिग्री पूरी करना और IT सेक्टर में एक सफल करियर बनाना है। डेटा साइंस जैसे तेज़ी से बढ़ते क्षेत्र में उनका प्रवेश इस लक्ष्य की दिशा में एक ठोस कदम है।
राष्ट्र प्रेस
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