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IIT मद्रास की नई कूलिंग तकनीक: लैपटॉप से रक्षा उपकरणों तक ओवरहीटिंग का समाधान

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IIT मद्रास की नई कूलिंग तकनीक: लैपटॉप से रक्षा उपकरणों तक ओवरहीटिंग का समाधान

सारांश

IIT मद्रास के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी कूलिंग तकनीक विकसित की है जो बिना मोटर या पंप के काम करती है। 'एंटीपैरलल डिज़ाइन' और एल्युमिनियम के उपयोग से तापीय प्रतिरोध में 20% तक की कमी संभव है — और यह तकनीक स्मार्टफोन से लेकर रक्षा प्रणालियों तक में क्रांति ला सकती है।

मुख्य बातें

IIT मद्रास ने फ्लैट प्लेट पल्सेटिंग हीट पाइप (FPPHP) का नया एंटीपैरलल डिज़ाइन विकसित किया।
यह तकनीक बिना मोटर या पंप के स्वचालित रूप से गर्मी नियंत्रित करती है।
एल्युमिनियम का तापीय प्रतिरोध तांबे से लगभग 20 प्रतिशत कम पाया गया, जिससे लागत और वज़न घटेगा।
नलिकाओं की विशेष आंतरिक सतह से तापीय प्रतिरोध में अतिरिक्त 16 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई।
संभावित उपयोग: स्मार्टफोन, लैपटॉप, डेटा सेंटर, रडार, एवियोनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहन ।

IIT मद्रास के शोधकर्ताओं ने 27 जुलाई 2026 को एक अभिनव फ्लैट प्लेट पल्सेटिंग हीट पाइप (FPPHP) तकनीक विकसित की है, जो स्मार्टफोन, लैपटॉप, डेटा सेंटर, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों में ओवरहीटिंग की गंभीर समस्या से निपट सकती है। यह तकनीक बिना किसी मोटर या पंप के स्वचालित रूप से गर्मी को नियंत्रित करने में सक्षम है, जो इसे आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए एक महत्वपूर्ण नवाचार बनाती है।

तकनीक कैसे काम करती है

IIT मद्रास के अनुसार, इस प्रणाली में एक सपाट धातु प्लेट के भीतर अत्यंत महीन नलिकाएँ बनाई जाती हैं, जिनमें एक विशेष द्रव भरा होता है। जैसे ही उपकरण का कोई हिस्सा गर्म होता है, यह द्रव वाष्प बनकर ठंडे हिस्से की ओर प्रवाहित होता है, वहाँ पुनः तरल अवस्था में आ जाता है और वापस लौट आता है। यही चक्र निरंतर चलता रहता है, जिससे उपकरण का तापमान स्थिर बना रहता है।

गौरतलब है कि अब तक के अधिकांश कूलिंग सिस्टम में ऊष्मा ग्रहण करने वाला और ऊष्मा छोड़ने वाला — दोनों हिस्से प्लेट की एक ही सतह पर होते थे। IIT मद्रास के वैज्ञानिकों ने पहली बार 'एंटीपैरलल डिज़ाइन' विकसित किया है, जिसमें ये दोनों हिस्से प्लेट की विपरीत सतहों पर स्थापित किए गए हैं। इससे अत्यंत छोटे और कॉम्पैक्ट उपकरणों में भी इस तकनीक को सहजता से एकीकृत किया जा सकता है।

दो मॉडल, परीक्षण के नतीजे

शोधकर्ताओं ने इस कूलिंग सिस्टम के दो प्रोटोटाइप तैयार किए — पहला सिलिकॉन गैस्केट आधारित और दूसरा ओ-रिंग आधारित। परीक्षणों में सामने आया कि गैस्केट मॉडल में द्रव की मात्रा अधिक होती है, जबकि ओ-रिंग मॉडल में वही द्रव कहीं अधिक तेज़ी और प्रभावी ढंग से प्रवाहित होता है, जिससे कूलिंग क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर डेटा सेंटरों की ऊर्जा खपत और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में थर्मल प्रबंधन एक बड़ी तकनीकी चुनौती बन चुकी है।

एल्युमिनियम ने तांबे को पछाड़ा

शोध में एक और महत्वपूर्ण परिणाम सामने आया — सामान्य धारणा के विपरीत, इस डिज़ाइन में एल्युमिनियम ने तांबे से बेहतर प्रदर्शन किया। IIT मद्रास के अनुसार, एल्युमिनियम का तापीय प्रतिरोध तांबे की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत कम पाया गया। इससे बड़े पैमाने पर उत्पादन में लागत और वज़न दोनों में कमी लाई जा सकती है।

इसके अतिरिक्त, वैज्ञानिकों ने नलिकाओं की भीतरी सतह को विशेष प्रक्रिया से तैयार किया, जिससे द्रव सतह पर अधिक प्रभावी ढंग से फैलने लगा। इस एकल संशोधन से तापीय प्रतिरोध में करीब 16 प्रतिशत की अतिरिक्त कमी दर्ज की गई।

किन क्षेत्रों को होगा फायदा

शोधकर्ताओं के अनुसार, यदि यह तकनीक व्यावसायिक स्तर पर अपनाई जाती है, तो इसके अनुप्रयोग अत्यंत व्यापक हैं। स्मार्टफोन और लैपटॉप में ओवरहीटिंग कम होगी और प्रदर्शन में सुधार आएगा। डेटा सेंटर अधिक ऊर्जा-कुशल तरीके से संचालित हो सकेंगे। रक्षा क्षेत्र में रडार, एवियोनिक्स और उच्च-क्षमता वाले इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम अधिक विश्वसनीय बनेंगे। भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी और पावर कन्वर्टर में भी इसका उपयोग संभव है।

आगे की राह

IIT मद्रास का यह शोध भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में थर्मल प्रबंधन की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम माना जा रहा है। व्यावसायिक उत्पादन की दिशा में यह तकनीक कब और किस रूप में बाज़ार में आएगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा — लेकिन इसकी संभावनाएँ निर्विवाद रूप से व्यापक हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन प्रयोगशाला से बाज़ार तक की दूरी भारतीय तकनीकी नवाचार की सबसे बड़ी बाधा रही है। एंटीपैरलल डिज़ाइन और एल्युमिनियम की बेहतर तापीय दक्षता वास्तविक उत्पादन परिस्थितियों में कितनी कारगर साबित होगी, यह अभी परखा जाना बाकी है। भारत में रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र की स्वदेशी थर्मल प्रबंधन ज़रूरतों को देखते हुए इस तकनीक का व्यावसायीकरण राष्ट्रीय प्राथमिकता बनना चाहिए — केवल शोधपत्र प्रकाशन तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IIT मद्रास की नई कूलिंग तकनीक क्या है?
IIT मद्रास ने फ्लैट प्लेट पल्सेटिंग हीट पाइप (FPPHP) का एक नया एंटीपैरलल डिज़ाइन विकसित किया है, जो बिना मोटर या पंप के स्वचालित रूप से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की गर्मी को नियंत्रित करता है। यह तकनीक स्मार्टफोन, लैपटॉप, डेटा सेंटर और रक्षा उपकरणों में ओवरहीटिंग की समस्या दूर करने में सक्षम है।
एंटीपैरलल डिज़ाइन पुराने कूलिंग सिस्टम से कैसे अलग है?
पारंपरिक कूलिंग सिस्टम में ऊष्मा ग्रहण और ऊष्मा विमोचन दोनों हिस्से प्लेट की एक ही सतह पर होते थे। IIT मद्रास के एंटीपैरलल डिज़ाइन में ये दोनों हिस्से प्लेट की विपरीत सतहों पर स्थापित हैं, जिससे यह कॉम्पैक्ट उपकरणों में भी आसानी से फिट हो सकता है।
इस शोध में एल्युमिनियम को तांबे से बेहतर क्यों पाया गया?
IIT मद्रास के परीक्षणों में एल्युमिनियम का तापीय प्रतिरोध तांबे की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत कम पाया गया। साथ ही एल्युमिनियम हल्का और सस्ता होने के कारण बड़े पैमाने पर उत्पादन में लागत और वज़न दोनों घटाने में सहायक है।
यह तकनीक किन-किन क्षेत्रों में उपयोगी होगी?
शोधकर्ताओं के अनुसार इस तकनीक का उपयोग स्मार्टफोन, लैपटॉप, डेटा सेंटर, रडार, एवियोनिक्स, एयरोस्पेस सिस्टम और इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी व पावर कन्वर्टर में किया जा सकता है। रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में इसकी विशेष उपयोगिता देखी जा रही है।
यह तकनीक व्यावसायिक बाज़ार में कब तक उपलब्ध होगी?
अभी तक व्यावसायिक उत्पादन की कोई आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं की गई है। शोध फिलहाल प्रयोगशाला स्तर पर सफल रहा है और व्यापक परीक्षण के बाद ही इसके व्यावसायीकरण की दिशा तय होगी।
राष्ट्र प्रेस
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