IIT मद्रास की नई कूलिंग तकनीक: लैपटॉप से रक्षा उपकरणों तक ओवरहीटिंग का समाधान
सारांश
मुख्य बातें
IIT मद्रास के शोधकर्ताओं ने 27 जुलाई 2026 को एक अभिनव फ्लैट प्लेट पल्सेटिंग हीट पाइप (FPPHP) तकनीक विकसित की है, जो स्मार्टफोन, लैपटॉप, डेटा सेंटर, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों में ओवरहीटिंग की गंभीर समस्या से निपट सकती है। यह तकनीक बिना किसी मोटर या पंप के स्वचालित रूप से गर्मी को नियंत्रित करने में सक्षम है, जो इसे आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए एक महत्वपूर्ण नवाचार बनाती है।
तकनीक कैसे काम करती है
IIT मद्रास के अनुसार, इस प्रणाली में एक सपाट धातु प्लेट के भीतर अत्यंत महीन नलिकाएँ बनाई जाती हैं, जिनमें एक विशेष द्रव भरा होता है। जैसे ही उपकरण का कोई हिस्सा गर्म होता है, यह द्रव वाष्प बनकर ठंडे हिस्से की ओर प्रवाहित होता है, वहाँ पुनः तरल अवस्था में आ जाता है और वापस लौट आता है। यही चक्र निरंतर चलता रहता है, जिससे उपकरण का तापमान स्थिर बना रहता है।
गौरतलब है कि अब तक के अधिकांश कूलिंग सिस्टम में ऊष्मा ग्रहण करने वाला और ऊष्मा छोड़ने वाला — दोनों हिस्से प्लेट की एक ही सतह पर होते थे। IIT मद्रास के वैज्ञानिकों ने पहली बार 'एंटीपैरलल डिज़ाइन' विकसित किया है, जिसमें ये दोनों हिस्से प्लेट की विपरीत सतहों पर स्थापित किए गए हैं। इससे अत्यंत छोटे और कॉम्पैक्ट उपकरणों में भी इस तकनीक को सहजता से एकीकृत किया जा सकता है।
दो मॉडल, परीक्षण के नतीजे
शोधकर्ताओं ने इस कूलिंग सिस्टम के दो प्रोटोटाइप तैयार किए — पहला सिलिकॉन गैस्केट आधारित और दूसरा ओ-रिंग आधारित। परीक्षणों में सामने आया कि गैस्केट मॉडल में द्रव की मात्रा अधिक होती है, जबकि ओ-रिंग मॉडल में वही द्रव कहीं अधिक तेज़ी और प्रभावी ढंग से प्रवाहित होता है, जिससे कूलिंग क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर डेटा सेंटरों की ऊर्जा खपत और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में थर्मल प्रबंधन एक बड़ी तकनीकी चुनौती बन चुकी है।
एल्युमिनियम ने तांबे को पछाड़ा
शोध में एक और महत्वपूर्ण परिणाम सामने आया — सामान्य धारणा के विपरीत, इस डिज़ाइन में एल्युमिनियम ने तांबे से बेहतर प्रदर्शन किया। IIT मद्रास के अनुसार, एल्युमिनियम का तापीय प्रतिरोध तांबे की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत कम पाया गया। इससे बड़े पैमाने पर उत्पादन में लागत और वज़न दोनों में कमी लाई जा सकती है।
इसके अतिरिक्त, वैज्ञानिकों ने नलिकाओं की भीतरी सतह को विशेष प्रक्रिया से तैयार किया, जिससे द्रव सतह पर अधिक प्रभावी ढंग से फैलने लगा। इस एकल संशोधन से तापीय प्रतिरोध में करीब 16 प्रतिशत की अतिरिक्त कमी दर्ज की गई।
किन क्षेत्रों को होगा फायदा
शोधकर्ताओं के अनुसार, यदि यह तकनीक व्यावसायिक स्तर पर अपनाई जाती है, तो इसके अनुप्रयोग अत्यंत व्यापक हैं। स्मार्टफोन और लैपटॉप में ओवरहीटिंग कम होगी और प्रदर्शन में सुधार आएगा। डेटा सेंटर अधिक ऊर्जा-कुशल तरीके से संचालित हो सकेंगे। रक्षा क्षेत्र में रडार, एवियोनिक्स और उच्च-क्षमता वाले इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम अधिक विश्वसनीय बनेंगे। भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी और पावर कन्वर्टर में भी इसका उपयोग संभव है।
आगे की राह
IIT मद्रास का यह शोध भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में थर्मल प्रबंधन की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम माना जा रहा है। व्यावसायिक उत्पादन की दिशा में यह तकनीक कब और किस रूप में बाज़ार में आएगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा — लेकिन इसकी संभावनाएँ निर्विवाद रूप से व्यापक हैं।