भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती: ईरान युद्ध और वैश्विक अस्थिरता के बावजूद आरबीआई का विश्लेषण

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भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती: ईरान युद्ध और वैश्विक अस्थिरता के बावजूद आरबीआई का विश्लेषण

सारांश

आरबीआई के मासिक बुलेटिन के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था ईरान युद्ध और वैश्विक अस्थिरता के परिदृश्य में भी मजबूत बनी हुई है। आर्थिक वृद्धि के महत्वपूर्ण संकेतक इस बात की पुष्टि करते हैं कि देश की आर्थिक गतिविधियाँ स्थिर हैं।

मुख्य बातें

भारत की अर्थव्यवस्था ईरान युद्ध के बावजूद मजबूत बनी हुई है।
आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है।
विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत है।
सरकार ने कई कदम उठाए हैं।
जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत है।

नई दिल्ली, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मासिक बुलेटिन में बताया गया है कि मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध और वैश्विक बाजारों में बढ़ती अस्थिरता के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है। 2025-26 के लिए जीडीपी के दूसरे अग्रिम अनुमान भी इस मजबूती को स्पष्ट करते हैं।

आरबीआई बुलेटिन के अनुसार, फरवरी में देश की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई। महंगाई (सीपीआई) में वृद्धि मुख्य रूप से खाद्य और पेय पदार्थों की वजह से हुई। प्रणाली में नकदी (लिक्विडिटी) की स्थिति भी पर्याप्त रही और व्यापार क्षेत्र को मिलने वाली वित्तीय सहायता में वृद्धि हुई। इसके अलावा, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार इतना मजबूत है कि यह बाहरी झटकों से बचाव कर सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य पूर्व में युद्ध और अमेरिका द्वारा व्यापार जांच शुरू किए जाने से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, आयात शुल्क और सप्लाई चेन के संबंध में अनिश्चितता बढ़ गई है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका प्रभाव पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

घरेलू स्तर पर, भारत की कच्चे तेल पर निर्भरता को देखते हुए स्थिति पर ध्यान देना आवश्यक है। हालांकि, आरबीआई ने कहा कि समय के साथ, भारत की अर्थव्यवस्था बाहरी झटकों को सहन करने में अधिक सक्षम हुई है, जिसका मुख्य कारण मजबूत विकास, बेहतर आर्थिक आधार और मजबूत विदेशी क्षेत्र है।

ऊर्जा सुरक्षा के संदर्भ में, भारत ने अपने तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाई है और रिफाइनिंग क्षमता को भी बढ़ाया है। युद्ध के आरंभ के बाद, सरकार ने कई कदम उठाए हैं ताकि वैश्विक सप्लाई में आई बाधाओं का असर कम किया जा सके और घरेलू संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।

आरबीआई ने यह भी सुझाव दिया है कि 'इकोनॉमिक स्टेबलाइजेशन फंड' की स्थापना से सरकार को ऐसे वैश्विक संकटों से निपटने के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिल सकती है।

जीडीपी के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है, जिसमें घरेलू मांग का बड़ा योगदान है। निजी खपत और निवेश दोनों ही मजबूती से बढ़ रहे हैं। तीसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी।

फरवरी में शहरी और ग्रामीण दोनों बाजारों में मांग में मजबूती रही। कम टैक्स, खरीफ फसल से आय और विवाह के सीजन ने इसमें योगदान दिया। इस दौरान, टू-व्हीलर, पैसेंजर वाहन और ट्रैक्टर की बिक्री फरवरी में रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई। वहीं, कृषि क्षेत्र भी मजबूत रहा और वित्त वर्ष 2026 में खाद्यान्न उत्पादन के रिकॉर्ड स्तर पर रहने का अनुमान है।

वैश्विक स्तर पर, मध्य पूर्व के तनाव के कारण तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई, जिससे कमोडिटी और वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने इसे वैश्विक तेल बाजार की सबसे बड़ी सप्लाई बाधा बताया है।

ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखा गया, जो 78 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 112.2 डॉलर तक पहुँच गई। इसके अलावा, एल्यूमिनियम और यूरिया जैसे औद्योगिक उत्पाद भी प्रभावित हुए।

आरबीआई बुलेटिन में कहा गया कि ऊर्जा संकट का असर वित्तीय बाजारों पर भी पड़ा। मार्च में शेयर बाजारों में गिरावट आई, खासकर उन देशों में जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं। बॉन्ड मार्केट में भी बदलाव देखने को मिला और अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ। ऐसे माहौल में दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंकों ने फरवरी-मार्च के दौरान ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया और सतर्क दृष्टिकोण अपनाया।

संपादकीय दृष्टिकोण

मैं मानता हूँ कि भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती इस बात का संकेत है कि देश अपनी चुनौतियों का सामना कर सकता है। वैश्विक अस्थिरता के बावजूद, घरेलू मांग और निवेश में वृद्धि इसे एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करती है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की अर्थव्यवस्था क्यों मजबूत है?
भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती का मुख्य कारण घरेलू मांग और निवेश में वृद्धि है।
आरबीआई ने क्या कहा है?
आरबीआई ने अपने बुलेटिन में कहा है कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है।
क्या ईरान युद्ध का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा?
ईरान युद्ध का असर हो सकता है, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था बाहरी झटकों को सहन करने में सक्षम है।
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति क्या है?
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत है और यह बाहरी झटकों से बचाव कर सकता है।
भारत में कच्चे तेल पर निर्भरता कितनी है?
भारत की कच्चे तेल पर निर्भरता उच्च है, इसलिए इस पर नजर रखना आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस