भारत ने बढ़ाई रूसी कच्चे तेल की खरीद, चीन के लिए जा रहे टैंकर्स का बदला रुख

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भारत ने बढ़ाई रूसी कच्चे तेल की खरीद, चीन के लिए जा रहे टैंकर्स का बदला रुख

सारांश

भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में वृद्धि की है, जिससे कई टैंकर्स, जो पहले चीन जा रहे थे, अब भारत की ओर रुख कर रहे हैं। यह घटनाक्रम वैश्विक तेल की कीमतों पर प्रभाव डाल सकता है।

Key Takeaways

  • भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है।
  • कई टैंकर्स ने चीनी पोर्ट्स से भारत की ओर रुख किया है।
  • 30 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल एक हफ्ते में खरीदा गया।
  • विश्लेषकों ने वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि की संभावना जताई है।
  • स्वेजमैक्स जूजू एन टैंकर भारत की ओर बढ़ रहा है।

नई दिल्ली, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के बीच, भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में वृद्धि की है। कई टैंकर्स, जिनका पहले से निर्धारित गंतव्य चीनी बंदरगाह थे, अब उन्होंने भारत की ओर रुख किया है।

रिपोर्टों के अनुसार, कच्चे तेल से लदा अफ्रामैक्स टैंकर एक्वा टाइटन, 21 मार्च को न्यू मैंगलोर पहुंचेगा, जिसमें यूराल्स का कच्चा तेल होगा।

इस जहाज ने जनवरी के अंत में बाल्टिक सागर के एक बंदरगाह से तेल लोड किया था और इसकी मंजिल पहले चीन का रिझाओ था।

हालांकि, मार्च के मध्य में इसने अचानक अपना रास्ता बदलकर दक्षिण चीन सागर की ओर मुड़कर भारत की ओर बढ़ना शुरू कर दिया।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका दुनिया के सभी देशों को रूसी कच्चा तेल खरीदने से रोकने की कोशिश कर रहा है।

इस दौरान, भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने अपनी कच्चे तेल की खरीद को बढ़ा दिया है, और केवल एक हफ्ते में लगभग 30 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदा है।

इस खरीदारी में वृद्धि का मुख्य कारण ईरान से जुड़े संघर्षों के कारण मध्य पूर्व में तेल की आपूर्ति में आई बाधाएं हैं।

यह बदलाव केवल एक टैंकर तक सीमित नहीं है। एनालिटिक्स फर्म वोर्टेक्सा के आंकड़ों के अनुसार, हाल के हफ्तों में रूसी तेल ले जाने वाले कम से कम सात जहाजों ने चीन से भारत की ओर अपना मार्ग बदल लिया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी प्रमुख भारतीय रिफाइनर एक बार फिर रूसी कच्चे तेल खरीदने लगे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि भारत मॉस्को के लिए एक प्रमुख खरीदार के रूप में अपनी स्थिति को फिर से मजबूत कर रहा है।

एक अन्य टैंकर, स्वेजमैक्स जूजू एन, भी भारत के सिक्का बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है और इसकी 25 मार्च को पहुंचने की संभावना है।

यह जहाज कजाकिस्तान से सीपीसी ब्लेंड क्रूड तेल ले जा रहा है। पहले यह रूस के काला सागर क्षेत्र में स्थित नोवोरोस्सियस्क से रवाना हुआ था और पहले इसका गंतव्य रिझाओ था, लेकिन मार्च की शुरुआत में इसने अपना रास्ता बदल लिया।

इस बीच, प्रतिबंधों में ढील के कारण जापान और दक्षिण कोरिया जैसे अन्य देशों ने भी रूसी तेल की खरीद फिर से शुरू कर दी है।

विश्लेषकों का कहना है कि कई खरीदारों की इस नई मांग से आने वाले हफ्तों में वैश्विक तेल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।

Point of View

यह स्पष्ट है कि भारत का रूसी कच्चे तेल खरीदने की दिशा में कदम उठाना एक रणनीतिक निर्णय है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलते हालात के बीच, भारत की यह पहल न केवल आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।
NationPress
19/03/2026

Frequently Asked Questions

भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद क्यों बढ़ाई है?
भारत ने ईरान से जुड़े संघर्षों और वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधाओं के कारण कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है।
कितने टैंकर्स ने चीन से भारत की ओर रुख किया है?
हाल के हफ्तों में कम से कम सात टैंकर्स ने अपना मार्ग बदलकर भारत की ओर रुख किया है।
क्या इस स्थिति का वैश्विक तेल कीमतों पर असर होगा?
विश्लेषकों के अनुसार, इस नई मांग से आने वाले हफ्तों में वैश्विक तेल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
भारत में कच्चे तेल की खरीद में कितनी वृद्धि हुई है?
भारत ने केवल एक हफ्ते में लगभग 30 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदा है।
कौन सा टैंकर भारत की ओर आ रहा है?
स्वेजमैक्स जूजू एन टैंकर भारत के सिक्का बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है।
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