सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों को जवाब देना होगा: विदेश मंत्रालय
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार, 29 मई 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उन देशों को जवाबदेह ठहराना चाहिए जो आतंकवाद का समर्थन करते हैं और अपनी सीमाओं से सीमा पार आतंकवाद को पनाह देते हैं। यह बयान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के मॉस्को दौरे के दौरान दिए गए कड़े संदेश के एक दिन बाद आया।
विदेश मंत्रालय का स्पष्ट संदेश
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, "क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म एक ऐसा खतरा है जिससे पूरी दुनिया को एकजुट होकर लड़ना चाहिए। हमें उन देशों को बताना चाहिए जो आतंकवाद का समर्थन करते हैं और जो अपने इलाकों से सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर भारत का रुख पहले से स्पष्ट और अटल रहा है।
डोभाल का मॉस्को में कड़ा संदेश
एक दिन पहले, गुरुवार को, NSA अजीत डोभाल ने मॉस्को में पहले अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा फोरम और सुरक्षा मामलों के उच्च प्रतिनिधियों की 14वीं बैठक में कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष में कोई दोहरा मापदंड नहीं चलेगा। उन्होंने जिम्मेदार देशों से आह्वान किया कि वे यह तय करें — वे आतंकवाद को वित्तपोषित करने वालों का साथ देते हैं या उनके विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई करते हैं।
यह बैठक रूसी संघ की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें 'बहुध्रुवीय विश्व के उभरने के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौतियों और खतरों' पर विस्तृत चर्चा हुई।
समुद्री सुरक्षा और पश्चिम एशिया पर चिंता
NSA डोभाल ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर विशेष ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर सहित अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से व्यापार की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना वैश्विक प्राथमिकता होनी चाहिए। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर हमलों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया है।
वैश्विक संस्थाओं में सुधार की माँग
रूस में स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, NSA डोभाल ने 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद स्थापित वैश्विक संस्थाओं और ढाँचों में तत्काल सुधार की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि इन सुधारों में ग्लोबल साउथ के दृष्टिकोण को अधिक प्रतिनिधित्व और महत्व दिया जाना चाहिए, ताकि ये संस्थाएँ आज के सुरक्षा खतरों से प्रभावी ढंग से निपट सकें।
भारत का व्यापक रणनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि यह बयान भारत-पाकिस्तान तनाव के व्यापक संदर्भ में आया है, जिसमें भारत लगातार सीमा पार आतंकवाद के स्रोतों की ओर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करता रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, मॉस्को जैसे बहुपक्षीय मंच पर यह संदेश देना भारत की कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है — जो अपनी स्थिति को केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के नज़रिए से प्रस्तुत करता है। आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस आह्वान पर किस प्रकार की प्रतिक्रिया देता है।