विश्व पर्यावरण दिवस: गिरिराज सिंह बोले — प्रति व्यक्ति ग्रीन कवर में 11% की कमी, 0.05 हेक्टेयर का लक्ष्य अभी दूर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने 5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर चेतावनी दी कि भारत में प्रति व्यक्ति हरित क्षेत्र (ग्रीन कवर) में अभी भी 11 प्रतिशत की कमी है — जो पर्यावरणीय स्थिरता के लिए निर्धारित मानक से पीछे है। यह बयान 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत देशभर में चल रहे एनडीए नेताओं के वृक्षारोपण कार्यक्रमों के बीच आया।
मुख्य घोषणाएँ और आँकड़े
पत्रकारों से बातचीत में गिरिराज सिंह ने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी लगातार 'एक पेड़ मां के नाम' का संदेश दे रहे हैं। अभी हमारे यहां प्रति व्यक्ति हरित क्षेत्र में 11 प्रतिशत की कमी है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि आदर्श स्थिति में प्रति व्यक्ति 0.05 हेक्टेयर भूमि पर पेड़ होने चाहिए, लेकिन भारत अभी उस लक्ष्य से पीछे है।
पर्यावरण नीति का व्यापक संदर्भ
मंत्री ने कार्बन उत्सर्जन से पर्यावरण को होने वाले नुकसान का मुद्दा भी उठाया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'पीएम सूर्य' जैसी पहलों के ज़रिए नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने मिशन अमृत सरोवर का भी उल्लेख किया, जिसके माध्यम से जल संरक्षण की दिशा में काम किया जा रहा है। गौरतलब है कि भारत ने 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य घोषित किया हुआ है, और वनावरण बढ़ाना उस रोडमैप का अहम हिस्सा है।
कारीगरों के लिए पहल — वसंत कुंज बाज़ार
नई दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में एक बाज़ार का दौरा करते हुए गिरिराज सिंह ने बताया कि सरकार ने कारीगरों को बढ़ावा देने के लिए उन्हें यह भूमि आवंटित की है, जहाँ अब कारीगरों को स्टॉल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुरस्कार विजेता कारीगरों और कुशल शिल्पकारों के उत्पाद यहाँ प्रदर्शित होते हैं और बिक्री की राशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है।
ई-मार्केटिंग और वैश्विक बाज़ार से जुड़ाव
मंत्री ने अपने मंत्रालय की एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स (EPCH) की भूमिका को रेखांकित किया, जो कारीगरों को ट्रेड फेयर, ग्लोबल पैविलियन और ई-मार्केटिंग के ज़रिए अमेरिका सहित विदेशी ग्राहकों से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि कारीगरों के उत्पादों की तस्वीरें लेकर ई-मार्केटिंग के माध्यम से विदेशों में बेची जाती हैं। उनका दीर्घकालिक लक्ष्य ऐसा माहौल बनाना है जहाँ कारीगरों की अगली पीढ़ी भी इस हुनर को अपनाए और तकनीक का उपयोग कर अपने शिल्प को आगे ले जाए।
आगे क्या
'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत वृक्षारोपण की गति और प्रति व्यक्ति ग्रीन कवर के अंतर को पाटने की दिशा में सरकार की प्रगति आने वाले महीनों में पर्यावरण नीति की असली कसौटी होगी।