ग्रेट निकोबार परियोजना पर राहुल गांधी का हमला: '1.5 करोड़ पेड़ काटे, आदिवासियों की जमीन छीनी'
सारांश
मुख्य बातें
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 5 जून 2025 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की अपनी यात्रा का वीडियो जारी करते हुए ग्रेट निकोबार परियोजना पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस परियोजना के नाम पर 1.5 करोड़ पेड़ काटे गए, प्रवाल भित्तियों को मानचित्रों से मिटाया गया और आदिवासी समुदायों की जमीन वन अधिकार अधिनियम का उल्लंघन करके छीनी जा रही है।
यात्रा और मुख्य आरोप
राहुल गांधी ने समुद्र में डाइविंग करते हुए और बोट से भ्रमण करते हुए एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, 'मैंने भारत के सबसे दक्षिणी छोर का दौरा किया। मैं इंदिरा प्वाइंट पर खड़ा रहा। मैं सदियों पुराने पेड़ों के नीचे चला। मैंने पृथ्वी पर सबसे जीवंत प्रवाल भित्तियों में गोता लगाया।' उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने वहाँ के आदिवासी समुदायों और पूर्व सैनिकों से मुलाकात की, जिन्हें कथित तौर पर उचित मुआवजा नहीं मिल रहा है।
परियोजना की मंशा पर सवाल
कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार के रक्षा-तर्क को भी चुनौती दी। उनका कहना है, 'केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) कहती है कि ग्रेट निकोबार परियोजना रक्षा के लिए है, लेकिन ऐसा नहीं है। आईएनएस बाज का विस्तार करें — हम सरकार का पूरा समर्थन करेंगे। नौसेना पिछले पाँच वर्षों से विस्तार की माँग कर रही है, इसे नजरअंदाज किया गया है।' उन्होंने माल परिवहन बंदरगाह के तर्क को भी खारिज करते हुए कहा कि भारत पहले से ही केरल में मुख्य भूमि पर एक बंदरगाह बना रहा है।
पारिस्थितिक नुकसान के आरोप
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस परियोजना का असली उद्देश्य एक व्यवसायी को भारत की सबसे अमूल्य पारिस्थितिक भूमि पर होटल और कैसीनो बनाने की सुविधा देना है। उनके अनुसार, 'प्रवाल भित्तियों को आधिकारिक मानचित्रों से मिटा दिया गया। सैनिकों और आदिवासियों को विस्थापित किया गया।' गौरतलब है कि ग्रेट निकोबार द्वीप को पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है और यह दुर्लभ समुद्री जीवों का आवास है।
विकास बनाम पर्यावरण
कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'मैं पारिस्थितिक रूप से संतुलित विकास का समर्थक हूँ। ये द्वीप दुनिया के सबसे असाधारण टिकाऊ पर्यटन स्थल बन सकते हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब ग्रेट निकोबार परियोजना पर्यावरणविदों, न्यायालयों और नागरिक समाज के बीच लंबे समय से विवाद का विषय बनी हुई है।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष केंद्र सरकार पर पर्यावरणीय मंजूरियों में ढील देने का आरोप लगाता रहा है। राहुल गांधी की यह यात्रा और वीडियो पोस्ट विश्व पर्यावरण दिवस पर सुनियोजित राजनीतिक संदेश के रूप में देखी जा रही है। आगे यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इन आरोपों का किस प्रकार जवाब देती है और क्या संसद में इस मुद्दे पर बहस होती है।