ग्रेट निकोबार परियोजना: कांग्रेस का 'निकोबार मैटर्स' अभियान, केंद्र ने पर्यावरण आरोपों को बताया निराधार
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस महासचिव और लोकसभा सांसद केसी वेणुगोपाल ने 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना के खिलाफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा शुरू किए गए 'निकोबार मैटर्स' अभियान से जुड़ते हुए 'ग्रीन ओवर ग्रीड' याचिका पर हस्ताक्षर किए। इस परियोजना को लेकर कांग्रेस ने 1.5 करोड़ पेड़ों की कटाई, हजारों आदिवासियों के विस्थापन और जैव विविधता को गंभीर नुकसान पहुँचाने की आशंका जताई है। वहीं, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि परियोजना सभी वैधानिक और पर्यावरणीय मंजूरियों के तहत आगे बढ़ रही है।
कांग्रेस का विरोध और 'निकोबार मैटर्स' अभियान
वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि देश यह चुपचाप नहीं देख सकता कि 1.5 करोड़ पेड़ काट दिए जाएँ, हजारों आदिवासी अपनी जमीनों से बेदखल हों और दिल्ली से कई गुना बड़े क्षेत्र को कैसीनो, रिसॉर्ट और व्यावसायिक उपयोग के लिए सौंप दिया जाए। उन्होंने आम नागरिकों से इस अभियान से जुड़ने और ग्रेट निकोबार की जैव विविधता तथा पर्यावरण की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की।
इससे पहले राहुल गांधी अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह का दौरा कर चुके हैं और उन्होंने इस परियोजना को देश की प्राकृतिक और आदिवासी विरासत के खिलाफ 'सबसे बड़े अपराधों में से एक' बताया था। उनके अनुसार, केंद्र सरकार हजारों पेड़ काटकर द्वीप की समृद्ध वन संपदा को नुकसान पहुँचाना चाहती है।
परियोजना में क्या है शामिल
केंद्र सरकार के अनुसार, ग्रेट निकोबार द्वीप मलक्का जलडमरूमध्य के पश्चिमी प्रवेश द्वार से लगभग 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और वैश्विक समुद्री व्यापार की दृष्टि से अत्यंत रणनीतिक महत्व रखता है। इस परियोजना के तहत 14.2 मिलियन TEU क्षमता वाला अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, 4,000 पीक आवर यात्रियों की क्षमता वाला ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, 450 MVA गैस एवं सौर ऊर्जा आधारित बिजली संयंत्र और 16,610 हेक्टेयर में नई टाउनशिप विकसित करने की योजना है।
केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि यह परियोजना बंदरगाह आधारित आर्थिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करती है। सरकार का दावा है कि सभी पर्यावरणीय नियमों और वैधानिक मंजूरियों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है।
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण संरक्षण की वैश्विक चर्चा अपने चरम पर है और विपक्ष इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में लाने की कोशिश कर रहा है।
आदिवासी अधिकार और जैव विविधता पर चिंता
आलोचकों का कहना है कि ग्रेट निकोबार द्वीप अत्यंत समृद्ध जैव विविधता का केंद्र है और यहाँ की आदिवासी आबादी के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित किए बिना इतने बड़े पैमाने पर विकास कार्य संभावित रूप से अपूरणीय क्षति पहुँचा सकते हैं। कांग्रेस का तर्क है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन के सरकारी दावों की स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए।
केंद्र सरकार का कहना है कि यह परियोजना क्षेत्र के दीर्घकालिक आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगी। आने वाले समय में इस परियोजना पर संसद और न्यायिक मंचों पर बहस और तेज होने के आसार हैं।