19 अक्टूबर 2026
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भारत का सेमीकंडक्टर भविष्य: 12 स्वीकृत परियोजनाएं, ₹1.64 लाख करोड़ का निवेश — अमिताभ कांत

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भारत का सेमीकंडक्टर भविष्य: 12 स्वीकृत परियोजनाएं, ₹1.64 लाख करोड़ का निवेश — अमिताभ कांत

सारांश

भारत का सेमीकंडक्टर सपना अब सिर्फ नीति दस्तावेज़ों में नहीं — 6 राज्यों में 12 मंजूर परियोजनाएं और ₹1.64 लाख करोड़ की प्रतिबद्धता इसे ठोस हकीकत में बदल रही हैं। अमिताभ कांत के शब्दों में: भारत का सेमीकंडक्टर भविष्य आकार ले रहा है।

मुख्य बातें

अमिताभ कांत ने 19 अक्टूबर 2026 को एक्स पर भारत के सेमीकंडक्टर मानचित्र के साथ ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक के निवेश की पुष्टि की।
6 राज्यों में 12 स्वीकृत परियोजनाएं ; गुजरात में सर्वाधिक 6 परियोजनाएं ।
टाटा पीएसएमसी की धोलेरा फैब यूनिट सबसे बड़ी — ₹91,526 करोड़ निवेश, क्षमता 50,000+ वेफर/माह ।
असम में टाटा सेमीकंडक्टर की ₹27,120 करोड़ की OSAT सुविधा, प्रतिदिन 4.8 करोड़ यूनिट क्षमता।
माइक्रोन टेक्नोलॉजी ( साणंद ), सीडीआईएल ( पंजाब ), 3डी ग्लास सॉल्यूशन्स ( ओडिशा ) सहित कई बहुराष्ट्रीय और घरेलू कंपनियां शामिल।

नीति आयोग के पूर्व सीईओ और जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने 19 अक्टूबर 2026 को कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तेज़ रफ़्तार से विस्तार पा रहा है। देश के छह राज्यों में 12 स्वीकृत परियोजनाओं के ज़रिए ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता पहले ही जताई जा चुकी है। कांत ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर 'द न्यू सेमीकंडक्टर मैप ऑफ इंडिया' शीर्षक वाला एक ग्राफिक साझा करते हुए यह टिप्पणी की।

अमिताभ कांत का बयान

कांत ने अपनी पोस्ट में लिखा, "छह राज्यों में 12 मंजूर परियोजनाएं और ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक का प्रतिबद्ध निवेश। भारत का सेमीकंडक्टर भविष्य आकार ले रहा है।" उन्होंने रेखांकित किया कि फैब्रिकेशन, पैकेजिंग, टेस्टिंग और उन्नत प्रौद्योगिकी सुविधाओं का यह बढ़ता नेटवर्क देश की चिप निर्माण महत्वाकांक्षाओं को ठोस ज़मीन दे रहा है।

गुजरात: सेमीकंडक्टर निवेश का सबसे बड़ा केंद्र

गुजरात अब तक का सबसे बड़ा लाभार्थी राज्य है, जहाँ 6 स्वीकृत परियोजनाएं हैं। इनमें सबसे प्रमुख है धोलेरा में टाटा पीएसएमसी की सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट, जिसमें ₹91,526 करोड़ का निवेश हो रहा है और प्रस्तावित उत्पादन क्षमता 50,000 वेफर प्रति माह से अधिक है। साणंद में माइक्रोन टेक्नोलॉजी की डीआरएएम और नैंड असेंबली एवं टेस्टिंग सुविधा में ₹22,516 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त सीजी पावर रेनेसास स्टार्स की सेमीकंडक्टर ओएसएटी (OSAT) सुविधा में ₹7,584 करोड़ लगाए जाने प्रस्तावित हैं।

गुजरात में केयन्स सेमीकॉन, क्रिस्टल मैट्रिक्स और सूची सेमीकॉन की परियोजनाएं भी विकसित हो रही हैं, जो सेमीकंडक्टर पैकेजिंग, कंपाउंड सेमीकंडक्टर, मिनी एलईडी तकनीक और डिस्क्रीट सेमीकंडक्टर निर्माण से संबंधित हैं।

असम, ओडिशा और अन्य राज्यों में भी तेज़ी

असम में टाटा सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट द्वारा ₹27,120 करोड़ के निवेश से एक ओएसएटी और पैकेजिंग सुविधा तैयार की जा रही है, जिसकी प्रस्तावित क्षमता प्रतिदिन लगभग 4.8 करोड़ यूनिट होगी। ओडिशा में दो परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं — एसआईसीएसईएम प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ₹2,066 करोड़ से सिलिकॉन कार्बाइड फैब्रिकेशन एवं पैकेजिंग यूनिट, और 3डी ग्लास सॉल्यूशन्स द्वारा ₹1,943 करोड़ से एडवांस्ड पैकेजिंग और 3डी इंटीग्रेशन परियोजना।

आंध्र प्रदेश में लगभग ₹480 करोड़ के निवेश से एक एडवांस्ड सिस्टम इन पैकेज (ASIP) सुविधा स्थापित की जा रही है, जिसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता करीब 9.6 करोड़ यूनिट प्रस्तावित है। पंजाब भी इस इकोसिस्टम का हिस्सा बन चुका है, जहाँ सीडीआईएल ने ₹117 करोड़ के निवेश से पावर सेमीकंडक्टर परियोजना स्थापित की है।

व्यापक संदर्भ और महत्त्व

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं अमेरिका चीन तकनीकी टकराव के बीच पुनर्गठित हो रही हैं और भारत स्वयं को एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि भारत का सेमीकंडक्टर मिशन कुछ वर्ष पहले तक मुख्यतः कागज़ों पर था; आज ₹1.64 लाख करोड़ की प्रतिबद्धता यह दर्शाती है कि घोषणाएं ज़मीन पर उतर रही हैं।

कांत ने जो नक्शा साझा किया, वह केवल भौगोलिक विस्तार नहीं दिखाता — वह प्रौद्योगिकी की परिपक्वता भी प्रदर्शित करता है: फैब से लेकर OSAT, एडवांस्ड पैकेजिंग से लेकर कंपाउंड सेमीकंडक्टर तक — भारत पूरी वैल्यू चेन को एक साथ विकसित करने की कोशिश कर रहा है।

आगे की राह

इन परियोजनाओं का क्रियान्वयन अगले कुछ वर्षों में उत्पादन क्षमता और रोज़गार सृजन की वास्तविक कसौटी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि कुशल जनशक्ति की उपलब्धता और घरेलू सप्लाई चेन का विकास इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की सफलता की प्रमुख शर्तें हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा 'प्रतिबद्धता' से 'उत्पादन' तक के सफर में है — भारत में बड़ी घोषणाओं और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच की खाई ऐतिहासिक रूप से चिंताजनक रही है। गौरतलब है कि टाटा पीएसएमसी जैसी परियोजनाएं वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की राजनीति में भारत की स्थिति मज़बूत करती हैं, लेकिन कुशल जनशक्ति का अभाव और घरेलू सप्लाई चेन की कमज़ोरी दीर्घकालिक जोखिम बने हुए हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि अधिकांश निवेश असेंबली, पैकेजिंग और टेस्टिंग में है — अत्याधुनिक चिप डिज़ाइन और फैब्रिकेशन में भारत अभी भी वैश्विक अग्रणियों से कोसों दूर है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में कितनी सेमीकंडक्टर परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं?
भारत के 6 राज्यों में कुल 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाएं स्वीकृत हो चुकी हैं, जिनमें ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता है। यह जानकारी नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने 19 अक्टूबर 2026 को साझा की।
भारत में सेमीकंडक्टर निवेश का सबसे बड़ा केंद्र कौन सा राज्य है?
गुजरात भारत में सेमीकंडक्टर निवेश का सबसे बड़ा केंद्र है, जहाँ 6 स्वीकृत परियोजनाएं हैं। इनमें धोलेरा में टाटा पीएसएमसी की ₹91,526 करोड़ की फैब यूनिट सबसे बड़ी है।
टाटा पीएसएमसी की धोलेरा सेमीकंडक्टर परियोजना क्या है?
टाटा पीएसएमसी की धोलेरा (गुजरात) परियोजना ₹91,526 करोड़ के निवेश से स्थापित की जा रही एक सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट है। इसकी प्रस्तावित उत्पादन क्षमता 50,000 वेफर प्रति माह से अधिक है।
असम में सेमीकंडक्टर परियोजना में किसका निवेश है?
असम में टाटा सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट द्वारा ₹27,120 करोड़ के निवेश से एक OSAT और पैकेजिंग सुविधा तैयार की जा रही है। इस सुविधा की प्रस्तावित क्षमता प्रतिदिन लगभग 4.8 करोड़ यूनिट होगी।
भारत के सेमीकंडक्टर मिशन में कौन कौन सी विदेशी कंपनियां शामिल हैं?
माइक्रोन टेक्नोलॉजी (साणंद, गुजरात में ₹22,516 करोड़ की DRAM व NAND सुविधा) और रेनेसास (सीजी पावर स्टार्स के साथ OSAT सुविधा) प्रमुख विदेशी भागीदार हैं। इसके अलावा घरेलू कंपनियां जैसे केयन्स सेमीकॉन, क्रिस्टल मैट्रिक्स, सूची सेमीकॉन, सीडीआईएल और 3डी ग्लास सॉल्यूशन्स भी शामिल हैं।
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