18 जुलाई 2026
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आईओबी लोन धोखाधड़ी: सीबीआई कोर्ट ने पूर्व ब्रांच मैनेजर समेत दो को सुनाई 3 साल कठोर कारावास की सजा, ₹2.60 करोड़ का मामला

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आईओबी लोन धोखाधड़ी: सीबीआई कोर्ट ने पूर्व ब्रांच मैनेजर समेत दो को सुनाई 3 साल कठोर कारावास की सजा, ₹2.60 करोड़ का मामला

सारांश

अहमदाबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने IOB के पूर्व ब्रांच मैनेजर नीरज कुमार जैन और निजी व्यक्ति केतन पटेल को ग्रीन हाउस प्रोजेक्ट के नाम पर जाली दस्तावेजों से ₹2.60 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में 3 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई — यह मामला 2014 में दर्ज हुआ था।

मुख्य बातें

अहमदाबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने 18 जुलाई 2026 को IOB के पूर्व ब्रांच मैनेजर नीरज कुमार जैन और केतन कुमार मोहनलाल पटेल को 3 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई।
यह मामला हिम्मतनगर, गुजरात में ग्रीन हाउस प्रोजेक्ट के लिए जाली दस्तावेजों से लिए गए लोन से जुड़ा है, जिससे बैंक को ₹2.60 करोड़ का नुकसान हुआ।
अदालत ने जैन पर ₹2.60 लाख और पटेल पर ₹1.10 करोड़ का जुर्माना लगाया।
14 कृषि सावधि ऋण मंजूर किए गए थे; 12 लोन रिश्तेदारों और परिचितों के नाम पर लिए गए, प्रत्येक ₹19 लाख का।
अविनाश यशवंतकुमार पटेल बरी; नीलेश दयाभाई पटेल फरार, उनका मुकदमा अलग।
मामला 8 मई 2014 को दर्ज, चार्जशीट 24 दिसंबर 2014 को दाखिल।

अहमदाबाद की एक विशेष सीबीआई अदालत ने 18 जुलाई 2026 को इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) के पूर्व ब्रांच मैनेजर नीरज कुमार जैन और निजी व्यक्ति केतन कुमार मोहनलाल पटेल को बैंक धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराते हुए 3 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। यह मामला गुजरात के हिम्मतनगर में ग्रीन हाउस प्रोजेक्ट्स के नाम पर जाली दस्तावेजों से लिए गए कृषि ऋण से जुड़ा है, जिससे बैंक को ₹2.60 करोड़ का नुकसान हुआ था।

मुख्य घटनाक्रम

अदालत ने दोनों दोषियों को सजा के साथ-साथ जुर्माना भी लगाया। नीरज कुमार जैन पर ₹2.60 लाख और केतन कुमार मोहनलाल पटेल पर ₹1.10 करोड़ का जुर्माना अदालत ने निर्धारित किया। इस मामले में चार्जशीट में शामिल तीसरे आरोपी अविनाश यशवंतकुमार पटेल के विरुद्ध आरोप साबित नहीं हो सके और उन्हें बरी कर दिया गया। चौथे आरोपी नीलेश दयाभाई पटेल के खिलाफ मुकदमे को अलग कर दिया गया है, क्योंकि वे फरार हैं।

साजिश का तरीका

जाँच के अनुसार, अक्टूबर 2012 से सितंबर 2013 के बीच तत्कालीन ब्रांच मैनेजर नीरज कुमार जैन ने नीलेश कुमार दयाभाई पटेल, केतन कुमार मोहनलाल पटेल और 13 अन्य उधारकर्ताओं के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची। आरोप है कि नीलेश पटेल और केतन पटेल ने अपने रिश्तेदारों और परिचितों के नाम पर आवेदन करके 12 लोन लिए, जिनमें से प्रत्येक ₹19 लाख का था। जाँच में यह भी सामने आया कि जैन ने ग्रीन हाउस प्रोजेक्ट्स के लिए कुल 14 कृषि सावधि ऋण (Agricultural Term Loans) मंजूर किए और जारी किए।

अधिकारियों के अनुसार, जैन ने धोखाधड़ी वाले दस्तावेज होने के बावजूद लोन स्वीकृत कर अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया। इस साजिश से बैंक को ₹2.60 करोड़ का अवैध नुकसान हुआ और आरोपियों को उतना ही अवैध लाभ मिला।

सीबीआई की जाँच और चार्जशीट

यह मामला 8 मई 2014 को नीरज कुमार जैन और 15 निजी व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज किया गया था। जाँच पूरी होने के बाद 24 दिसंबर 2014 को जैन और तीन निजी व्यक्तियों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की गई। लंबे ट्रायल के बाद अदालत ने अंततः दो आरोपियों को दोषी ठहराया।

आम जनता और बैंकिंग क्षेत्र पर असर

यह मामला सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अंदरूनी मिलीभगत से होने वाली धोखाधड़ी की गंभीर समस्या को उजागर करता है। गौरतलब है कि कृषि ऋण योजनाओं का दुरुपयोग कर बैंकों को नुकसान पहुँचाने के ऐसे मामले पूरे देश में सामने आते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी सजाएँ बैंकिंग तंत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देती हैं।

क्या होगा आगे

फरार आरोपी नीलेश दयाभाई पटेल के पकड़े जाने पर उनके खिलाफ अलग से मुकदमा चलाया जाएगा। दोनों दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। इस फैसले से बैंक धोखाधड़ी के अन्य लंबित मामलों में भी त्वरित निपटारे की उम्मीद बढ़ी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ शाखा स्तर के अधिकारियों की स्वीकृति-शक्ति बिना पर्याप्त जाँच के काम करती है। मामला 2014 में दर्ज होने के बाद एक दशक से अधिक समय में निपटा — यह विलंब स्वयं में बैंकिंग धोखाधड़ी मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की सुस्त गति का प्रमाण है। आलोचकों का कहना है कि जब तक ऋण-स्वीकृति प्रक्रिया में डिजिटल ऑडिट ट्रेल और बहु-स्तरीय सत्यापन अनिवार्य नहीं होता, तब तक ऐसी साजिशें दोहराई जाती रहेंगी।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद सीबीआई कोर्ट के IOB धोखाधड़ी मामले में किसे सजा मिली?
अदालत ने इंडियन ओवरसीज बैंक के पूर्व ब्रांच मैनेजर नीरज कुमार जैन और निजी व्यक्ति केतन कुमार मोहनलाल पटेल को दोषी ठहराते हुए दोनों को 3 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। जैन पर ₹2.60 लाख और पटेल पर ₹1.10 करोड़ का जुर्माना भी लगाया गया।
IOB लोन धोखाधड़ी मामला क्या है और यह कैसे हुआ?
यह मामला गुजरात के हिम्मतनगर में IOB शाखा से ग्रीन हाउस प्रोजेक्ट के नाम पर जाली दस्तावेजों के जरिए कृषि ऋण लेने से जुड़ा है। अक्टूबर 2012 से सितंबर 2013 के बीच 14 कृषि सावधि ऋण मंजूर किए गए, जिनमें से 12 रिश्तेदारों और परिचितों के नाम पर लिए गए — प्रत्येक ₹19 लाख का — जिससे बैंक को ₹2.60 करोड़ का नुकसान हुआ।
इस मामले में कितने आरोपी थे और बाकी का क्या हुआ?
मामला मूलतः नीरज कुमार जैन और 15 निजी व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज था। चार्जशीट में चार आरोपी शामिल थे — जिनमें से दो को दोषी ठहराया गया, अविनाश यशवंतकुमार पटेल को बरी कर दिया गया, और नीलेश दयाभाई पटेल के खिलाफ मुकदमा अलग कर दिया गया क्योंकि वे फरार हैं।
यह मामला कब दर्ज हुआ और सजा तक कितना समय लगा?
यह मामला 8 मई 2014 को दर्ज किया गया था और 24 दिसंबर 2014 को चार्जशीट दाखिल हुई। सजा 18 जुलाई 2026 को सुनाई गई, यानी मामला दर्ज होने से सजा तक लगभग 12 वर्ष का समय लगा।
क्या दोषी इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं?
हाँ, दोनों दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील करने का कानूनी अधिकार है। फरार आरोपी नीलेश दयाभाई पटेल के पकड़े जाने पर उनके खिलाफ अलग से मुकदमा चलाया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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