आईओबी लोन धोखाधड़ी: सीबीआई कोर्ट ने पूर्व ब्रांच मैनेजर समेत दो को सुनाई 3 साल कठोर कारावास की सजा, ₹2.60 करोड़ का मामला
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद की एक विशेष सीबीआई अदालत ने 18 जुलाई 2026 को इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) के पूर्व ब्रांच मैनेजर नीरज कुमार जैन और निजी व्यक्ति केतन कुमार मोहनलाल पटेल को बैंक धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराते हुए 3 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। यह मामला गुजरात के हिम्मतनगर में ग्रीन हाउस प्रोजेक्ट्स के नाम पर जाली दस्तावेजों से लिए गए कृषि ऋण से जुड़ा है, जिससे बैंक को ₹2.60 करोड़ का नुकसान हुआ था।
मुख्य घटनाक्रम
अदालत ने दोनों दोषियों को सजा के साथ-साथ जुर्माना भी लगाया। नीरज कुमार जैन पर ₹2.60 लाख और केतन कुमार मोहनलाल पटेल पर ₹1.10 करोड़ का जुर्माना अदालत ने निर्धारित किया। इस मामले में चार्जशीट में शामिल तीसरे आरोपी अविनाश यशवंतकुमार पटेल के विरुद्ध आरोप साबित नहीं हो सके और उन्हें बरी कर दिया गया। चौथे आरोपी नीलेश दयाभाई पटेल के खिलाफ मुकदमे को अलग कर दिया गया है, क्योंकि वे फरार हैं।
साजिश का तरीका
जाँच के अनुसार, अक्टूबर 2012 से सितंबर 2013 के बीच तत्कालीन ब्रांच मैनेजर नीरज कुमार जैन ने नीलेश कुमार दयाभाई पटेल, केतन कुमार मोहनलाल पटेल और 13 अन्य उधारकर्ताओं के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची। आरोप है कि नीलेश पटेल और केतन पटेल ने अपने रिश्तेदारों और परिचितों के नाम पर आवेदन करके 12 लोन लिए, जिनमें से प्रत्येक ₹19 लाख का था। जाँच में यह भी सामने आया कि जैन ने ग्रीन हाउस प्रोजेक्ट्स के लिए कुल 14 कृषि सावधि ऋण (Agricultural Term Loans) मंजूर किए और जारी किए।
अधिकारियों के अनुसार, जैन ने धोखाधड़ी वाले दस्तावेज होने के बावजूद लोन स्वीकृत कर अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया। इस साजिश से बैंक को ₹2.60 करोड़ का अवैध नुकसान हुआ और आरोपियों को उतना ही अवैध लाभ मिला।
सीबीआई की जाँच और चार्जशीट
यह मामला 8 मई 2014 को नीरज कुमार जैन और 15 निजी व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज किया गया था। जाँच पूरी होने के बाद 24 दिसंबर 2014 को जैन और तीन निजी व्यक्तियों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की गई। लंबे ट्रायल के बाद अदालत ने अंततः दो आरोपियों को दोषी ठहराया।
आम जनता और बैंकिंग क्षेत्र पर असर
यह मामला सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अंदरूनी मिलीभगत से होने वाली धोखाधड़ी की गंभीर समस्या को उजागर करता है। गौरतलब है कि कृषि ऋण योजनाओं का दुरुपयोग कर बैंकों को नुकसान पहुँचाने के ऐसे मामले पूरे देश में सामने आते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी सजाएँ बैंकिंग तंत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देती हैं।
क्या होगा आगे
फरार आरोपी नीलेश दयाभाई पटेल के पकड़े जाने पर उनके खिलाफ अलग से मुकदमा चलाया जाएगा। दोनों दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। इस फैसले से बैंक धोखाधड़ी के अन्य लंबित मामलों में भी त्वरित निपटारे की उम्मीद बढ़ी है।