अयोध्या दीपोत्सव 2026: इकबाल अंसारी बोले — 'मंदिर के साथ पूरा शहर बदला, अब कोई कमी नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या में 5 नवंबर 2026 को आयोजित भव्य दीपोत्सव समारोह को लेकर बाबरी मस्जिद विवाद के प्रमुख पक्षकार इकबाल अंसारी ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में न केवल धार्मिक उत्सव का स्तर ऊँचा हुआ है, बल्कि शहर का समग्र विकास भी हुआ है — कुंड, पार्क और अन्य नागरिक सुविधाओं के रूप में। अंसारी के ये विचार ऐसे समय में सामने आए हैं जब अयोध्या में दीपोत्सव को एक वैश्विक सांस्कृतिक पहचान के रूप में स्थापित किया जा रहा है।
दीपोत्सव का विशेष महत्व
इकबाल अंसारी ने कहा कि अयोध्या महापुरुषों, देवी-देवताओं और भगवान राम की नगरी है। उनके शब्दों में, 'यहाँ दीपावली भगवान राम के आगमन की खुशी में मनाई जाती है — इस दौरान ऐसा महसूस होता है जैसे भगवान राम स्वयं दीपावली के दिन अयोध्या आ रहे हों।' इसी भावना के साथ लोग अपने घरों में दीप जलाते हैं और पूरे शहर को सजाया जाता है।
उन्होंने आगे जोड़ा कि दीपावली का त्योहार पूरे देश और दुनिया में खुशी के साथ मनाया जाता है, परंतु अयोध्या में इसका विशेष महत्व है — क्योंकि जिस तरह भगवान राम के आगमन पर अयोध्या सजी थी, आज भी दीपावली के दिन वैसा ही माहौल दिखाई देता है।
मंदिर निर्माण और शहरी विकास
अंसारी ने राम मंदिर निर्माण और उसके साथ हुए नागरिक विकास कार्यों को सराहा। उनका कहना था कि 'मंदिर बना है तो शहर का विकास भी हुआ है' — कुंड और पार्क जैसी सुविधाओं से अयोध्या सुसज्जित हुई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब अयोध्या में किसी चीज की कमी नहीं है।
इस भव्य दीपावली आयोजन का श्रेय उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिया। गौरतलब है कि योगी सरकार के कार्यकाल में अयोध्या दीपोत्सव को प्रति वर्ष बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाता है और हर बार दीपों की संख्या का नया रिकॉर्ड बनाने का प्रयास होता है।
राजनीतिक बयानबाजी पर रुख
अगले वर्ष होने वाले चुनाव और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर पूछे गए सवाल पर अंसारी ने संयमित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में अलग-अलग राजनीतिक दलों के लोग हैं और सभी अपनी-अपनी बात रखते रहते हैं, लेकिन 'राजनीतिक बयानबाजी से दीपावली के उत्सव पर कोई असर नहीं पड़ता।' उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या में पिछले दस वर्षों से दीपावली बड़े अच्छे तरीके से मनाई जा रही है।
मस्जिद के नामकरण विवाद पर टिप्पणी
तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित और पूर्व BJP नेता सुवेंदु अधिकारी के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने हुमायूँ या बाबर के नाम पर मस्जिद बनाए जाने का विरोध किया था — अंसारी ने कहा कि मस्जिद की अपनी अलग पहचान होती है और उसे किसी व्यक्ति के नाम से जोड़ना जरूरी नहीं। उनके अनुसार, 'मस्जिद अक्सर अपने मोहल्ले के नाम से पहचानी जाती है और उसकी पहचान उसकी बनावट व मीनारों से होती है।'
आगे की दिशा
अयोध्या दीपोत्सव अब एक ऐसे सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन के रूप में विकसित हो चुका है, जो राजनीतिक सीमाओं से परे विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों को एकजुट करता दिखता है। इकबाल अंसारी जैसी शख्सियत — जो बाबरी मस्जिद विवाद के केंद्र में रहे — का इस उत्सव की सराहना करना, शहर में सामाजिक सद्भाव की एक नई परत को रेखांकित करता है। आने वाले चुनावों के मद्देनज़र यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या यह सद्भावना राजनीतिक विमर्श में भी जगह पाती है।