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गालिबाफ सातवीं बार ईरानी संसद के स्पीकर, 271 में से 235 वोट से जीते

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गालिबाफ सातवीं बार ईरानी संसद के स्पीकर, 271 में से 235 वोट से जीते

सारांश

मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने 271 में से 235 वोट पाकर सातवीं बार ईरानी संसद की कमान संभाली। IRGC पृष्ठभूमि और खामेनेई से निकटता वाले गालिबाफ ऐसे समय में स्पीकर बने हैं जब ईरान की अमेरिका और इजरायल के साथ कूटनीतिक स्थिति अत्यंत संवेदनशील है।

मुख्य बातें

मोहम्मद बाघेर गालिबाफ को 25 मई को सातवीं बार मजलिस (ईरानी संसद) का स्पीकर चुना गया।
उन्हें 271 में से 235 वोट मिले — पूर्ण बहुमत से जीत।
स्पीकर पद के लिए अन्य दो उम्मीदवार मोहम्मद तकी नक्दली और उस्मान सालारी थे।
गालिबाफ 2020 से संसद स्पीकर हैं; 11वीं और 12वीं संसद में यह पद संभाल चुके हैं।
वह IRGC के पूर्व कमांडर और 12 वर्षों तक तेहरान के मेयर रहे हैं।
ईरान-अमेरिका वार्ता और ईरान-इजरायल तनाव के बीच उनकी भूमिका कूटनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है।

ईरान के वरिष्ठ नेता और पूर्व रिवोल्यूशनरी गार्ड कमांडर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ को सोमवार, 25 मई को सातवीं बार मजलिस (ईरानी संसद) का स्पीकर चुना गया। 12वीं संसद के तीसरे वार्षिक सत्र के लिए हुए इस चुनाव में गालिबाफ ने 271 में से 235 वोट हासिल कर पूर्ण बहुमत से जीत दर्ज की। यह जीत ईरान की सत्ता संरचना में उनकी मज़बूत पकड़ की पुष्टि करती है।

चुनाव का घटनाक्रम

12वीं संसद के तीसरे वार्षिक सत्र के लिए प्रेसीडिंग बोर्ड का चुनाव सोमवार सुबह खुले सत्र में आयोजित किया गया। स्पीकर पद के लिए गालिबाफ के अलावा मोहम्मद तकी नक्दली और उस्मान सालारी ने भी उम्मीदवारी दाखिल की थी। तीनों उम्मीदवारों के बीच मतदान में गालिबाफ ने स्पष्ट बढ़त के साथ जीत हासिल की। ईरानी संसद के प्रेसीडिंग बोर्ड में कुल 12 पद होते हैं — एक स्पीकर, दो उपाध्यक्ष, छह सचिव और तीन पर्यवेक्षक।

गालिबाफ की राजनीतिक पृष्ठभूमि

1961 में मशहद में जन्मे गालिबाफ ने कम उम्र में ही इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) में शामिल होकर अपने करियर की शुरुआत की। 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान उन्होंने अहम भूमिका निभाई और 1982 में खुर्रमशहर को इराकी कब्जे से मुक्त कराने वाले अभियानों में हिस्सा लिया। वह 12 वर्षों तक तेहरान के मेयर रहे और तीन बार राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ में भी उतरे, लेकिन हर बार सफलता नहीं मिली।

2017 में उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव से अपना नाम वापस लेते हुए कट्टरपंथी खेमे के उम्मीदवार इब्राहिम रईसी का समर्थन किया था। वह 2020 से संसद स्पीकर के पद पर हैं और 11वीं संसद के पूरे कार्यकाल तथा 12वीं संसद के पहले दो वर्षों में भी इस पद पर रहे।

क्षेत्रीय तनाव में गालिबाफ की भूमिका

गालिबाफ हाल के महीनों में अमेरिका के साथ जारी वार्ता और संघर्ष विराम बातचीत में भी अहम भूमिका निभाते रहे हैं। ईरान-इजरायल तनाव और अमेरिका के साथ बढ़ते कूटनीतिक टकराव के बीच उनकी स्थिति और प्रभावशाली हुई है। उन्हें वर्तमान सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई का करीबी माना जाता है, जो ईरान की सत्ता संरचना में उनके कद को और रेखांकित करता है।

आगे क्या

गालिबाफ के सातवीं बार स्पीकर बनने के साथ 12वीं संसद का तीसरा वार्षिक सत्र औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। यह ऐसे समय में आया है जब ईरान की विदेश नीति और परमाणु वार्ता एक निर्णायक मोड़ पर है। गालिबाफ की निरंतर उपस्थिति संसदीय नेतृत्व में स्थिरता का संकेत देती है, हालाँकि आलोचकों का कहना है कि यह सत्ता के केंद्रीकरण की प्रवृत्ति को भी दर्शाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कूटनीतिक वैधता देने वाली भी है। तीन बार राष्ट्रपति चुनाव हारने के बावजूद गालिबाफ का संसद में यह निरंतर पुनर्निर्वाचन बताता है कि ईरान की राजनीति में चुनावी हार सत्ता से बाहर जाने की गारंटी नहीं। मुख्यधारा की कवरेज वोट-संख्या पर रुकती है — असली सवाल यह है कि अमेरिका-ईरान वार्ता के नाज़ुक दौर में संसद स्पीकर की यह स्थिरता किस दिशा में ईरान की विदेश नीति को आकार देगी।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहम्मद बाघेर गालिबाफ कौन हैं?
मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ईरान के वरिष्ठ नेता हैं जो IRGC के पूर्व कमांडर, 12 वर्षों तक तेहरान के मेयर और 2020 से संसद स्पीकर रहे हैं। 1961 में मशहद में जन्मे गालिबाफ को सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई का करीबी माना जाता है।
गालिबाफ को कितने वोट मिले और चुनाव में कौन-कौन थे?
गालिबाफ को 271 में से 235 वोट मिले। उनके अलावा मोहम्मद तकी नक्दली और उस्मान सालारी ने भी उम्मीदवारी दाखिल की थी, लेकिन गालिबाफ ने पूर्ण बहुमत से जीत हासिल की।
यह चुनाव किस संसदीय सत्र के लिए हुआ?
यह चुनाव ईरान की 12वीं संसद के तीसरे वार्षिक सत्र के लिए प्रेसीडिंग बोर्ड के चुनाव के तहत सोमवार, 25 मई को खुले सत्र में आयोजित किया गया। गालिबाफ 11वीं संसद के पूरे कार्यकाल और 12वीं संसद के पहले दो वर्षों में भी स्पीकर रह चुके हैं।
क्षेत्रीय राजनीति में गालिबाफ की क्या भूमिका है?
गालिबाफ हाल के महीनों में अमेरिका के साथ जारी वार्ता और संघर्ष विराम बातचीत में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। ईरान-इजरायल तनाव के बीच उन्हें ईरान की सत्ता संरचना के प्रभावशाली चेहरों में से एक माना जाता है।
ईरानी संसद के प्रेसीडिंग बोर्ड में कितने पद होते हैं?
ईरानी संसद के प्रेसीडिंग बोर्ड में कुल 12 पद होते हैं — एक स्पीकर, दो उपाध्यक्ष, छह सचिव और तीन पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर)।
राष्ट्र प्रेस
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