स्विट्जरलैंड में 19 जून को यूएस-ईरान वार्ता, गालिबाफ करेंगे ईरानी दल का नेतृत्व
सारांश
मुख्य बातें
जिनेवा में 19 जून 2025 को होने वाली अमेरिका-ईरान शांति वार्ता से पहले दोनों पक्षों ने अपने प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों की घोषणा कर दी है। ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ वार्ता टीम का नेतृत्व करेंगे, जबकि अमेरिकी पक्ष की कमान उपराष्ट्रपति जेडी वेंस संभालेंगे। दोनों देशों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर ई-हस्ताक्षर की पुष्टि भी हो चुकी है।
वार्ता की रूपरेखा और स्थान
ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने मंगलवार को बताया कि शुक्रवार, 19 जून को पहले एक एमओयू पर हस्ताक्षर होगा, जिसके तुरंत बाद बातचीत का अगला दौर शुरू होगा। उन्होंने कहा कि हस्ताक्षर समारोह के लिए स्विट्जरलैंड को चुना गया है, हालाँकि सटीक स्थान अभी तय नहीं हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर है और कूटनीतिक चैनलों पर दुनिया की नज़र टिकी है।
ईरानी विदेश मंत्री की शर्तें
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी वार्ता की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि यह समझौता एक तरफ अमेरिका और इजरायल और दूसरी तरफ ईरान और हिज्बुल्लाह के बीच है। अराघची ने कहा कि यदि इजरायल लेबनान पर दोबारा हमला करता है या वहाँ के किसी क्षेत्र पर कब्जा बनाए रखता है, तो ईरान इसे एमओयू का उल्लंघन मानेगा। उनके अनुसार, संघर्ष तभी पूर्णतः समाप्त माना जाएगा जब इजरायली सेना उन इलाकों से भी हट जाए जिन पर उसने इस दौरान कब्जा किया है।
ट्रंप की परमाणु चेतावनी
फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने एवियन पहुँचे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रेस वार्ता में दोहराया कि वे ईरान को परमाणु हथियार संपन्न देश के रूप में नहीं देखना चाहते। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान को परमाणु हथियार न विकसित करने दिए जाएंगे, न खरीदने दिए जाएंगे और न उपयोग करने दिए जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा होने पर इसके 'गंभीर और अकल्पनीय परिणाम' होंगे।
गौरतलब है कि ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य शासन परिवर्तन नहीं है और वे ईरान को एक 'तर्कसंगत देश' मानते हैं जो अपने हित में काम करना चाहता है। यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कई दशकों में अमेरिकी नीति अक्सर ईरान में सत्ता-परिवर्तन के इर्द-गिर्द घूमती रही है।
आगे की राह
यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब मध्य-पूर्व में लेबनान युद्धविराम की स्थिति नाजुक बनी हुई है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता जा रहा है। एमओयू पर हस्ताक्षर और उसके तुरंत बाद शुरू होने वाली बातचीत इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम मानी जा रही है। विश्लेषकों के अनुसार, वार्ता की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष परमाणु और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर कितना लचीलापन दिखाते हैं।