10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

स्विट्जरलैंड में 19 जून को यूएस-ईरान वार्ता, गालिबाफ करेंगे ईरानी दल का नेतृत्व

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
स्विट्जरलैंड में 19 जून को यूएस-ईरान वार्ता, गालिबाफ करेंगे ईरानी दल का नेतृत्व

सारांश

19 जून को जिनेवा में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता में दोनों देशों ने अपने शीर्ष प्रतिनिधि उतारे हैं — ईरान से संसद अध्यक्ष गालिबाफ और अमेरिका से उपराष्ट्रपति वेंस। एमओयू हस्ताक्षर के साथ शुरू होने वाली यह बातचीत परमाणु और क्षेत्रीय सुरक्षा दोनों मोर्चों पर निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।

मुख्य बातें

19 जून 2025 को स्विट्जरलैंड (जिनेवा) में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता होनी तय है।
ईरानी दल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और अमेरिकी पक्ष की कमान उपराष्ट्रपति जेडी वेंस संभालेंगे।
वार्ता से पहले एमओयू पर ई-हस्ताक्षर की पुष्टि हो चुकी है; हस्ताक्षर समारोह के बाद तुरंत बातचीत शुरू होगी।
ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने कहा — इजरायल द्वारा लेबनान पर पुनः हमला या कब्जा बनाए रखना एमओयू का उल्लंघन माना जाएगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने जी7 में दोहराया — ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे; उल्लंघन पर 'गंभीर और अकल्पनीय परिणाम' की चेतावनी।

जिनेवा में 19 जून 2025 को होने वाली अमेरिका-ईरान शांति वार्ता से पहले दोनों पक्षों ने अपने प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों की घोषणा कर दी है। ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ वार्ता टीम का नेतृत्व करेंगे, जबकि अमेरिकी पक्ष की कमान उपराष्ट्रपति जेडी वेंस संभालेंगे। दोनों देशों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर ई-हस्ताक्षर की पुष्टि भी हो चुकी है।

वार्ता की रूपरेखा और स्थान

ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने मंगलवार को बताया कि शुक्रवार, 19 जून को पहले एक एमओयू पर हस्ताक्षर होगा, जिसके तुरंत बाद बातचीत का अगला दौर शुरू होगा। उन्होंने कहा कि हस्ताक्षर समारोह के लिए स्विट्जरलैंड को चुना गया है, हालाँकि सटीक स्थान अभी तय नहीं हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर है और कूटनीतिक चैनलों पर दुनिया की नज़र टिकी है।

ईरानी विदेश मंत्री की शर्तें

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी वार्ता की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि यह समझौता एक तरफ अमेरिका और इजरायल और दूसरी तरफ ईरान और हिज्बुल्लाह के बीच है। अराघची ने कहा कि यदि इजरायल लेबनान पर दोबारा हमला करता है या वहाँ के किसी क्षेत्र पर कब्जा बनाए रखता है, तो ईरान इसे एमओयू का उल्लंघन मानेगा। उनके अनुसार, संघर्ष तभी पूर्णतः समाप्त माना जाएगा जब इजरायली सेना उन इलाकों से भी हट जाए जिन पर उसने इस दौरान कब्जा किया है।

ट्रंप की परमाणु चेतावनी

फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने एवियन पहुँचे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रेस वार्ता में दोहराया कि वे ईरान को परमाणु हथियार संपन्न देश के रूप में नहीं देखना चाहते। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान को परमाणु हथियार न विकसित करने दिए जाएंगे, न खरीदने दिए जाएंगे और न उपयोग करने दिए जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा होने पर इसके 'गंभीर और अकल्पनीय परिणाम' होंगे।

गौरतलब है कि ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य शासन परिवर्तन नहीं है और वे ईरान को एक 'तर्कसंगत देश' मानते हैं जो अपने हित में काम करना चाहता है। यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कई दशकों में अमेरिकी नीति अक्सर ईरान में सत्ता-परिवर्तन के इर्द-गिर्द घूमती रही है।

आगे की राह

यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब मध्य-पूर्व में लेबनान युद्धविराम की स्थिति नाजुक बनी हुई है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता जा रहा है। एमओयू पर हस्ताक्षर और उसके तुरंत बाद शुरू होने वाली बातचीत इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम मानी जा रही है। विश्लेषकों के अनुसार, वार्ता की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष परमाणु और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर कितना लचीलापन दिखाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन संरचनात्मक जटिलताएँ गहरी हैं — एमओयू में एक तरफ अमेरिका-इजरायल और दूसरी तरफ ईरान-हिज्बुल्लाह हैं, यानी यह द्विपक्षीय नहीं, क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन की वार्ता है। ट्रंप का 'शासन परिवर्तन नहीं' वाला बयान नया है, पर परमाणु मुद्दे पर उनकी 'अकल्पनीय परिणाम' की भाषा वही पुरानी दबाव-नीति है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या इजरायल की लेबनान वापसी की शर्त — जिसे ईरान ने एमओयू का हिस्सा बताया है — अमेरिका स्वीकार करता है, क्योंकि यहीं पर पिछली वार्ताएँ टूटती रही हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्विट्जरलैंड में यूएस-ईरान वार्ता कब और कहाँ होगी?
यह वार्ता 19 जून 2025 को जिनेवा, स्विट्जरलैंड में होनी तय है। पहले एमओयू पर हस्ताक्षर होगा, जिसके तुरंत बाद बातचीत का अगला दौर शुरू होगा; सटीक स्थान अभी तय नहीं हुआ है।
ईरानी और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कौन करेगा?
ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और अमेरिकी पक्ष की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपने-अपने दल का नेतृत्व करेंगे। यह जानकारी ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने दी।
ईरान ने इस समझौते पर क्या शर्तें रखी हैं?
ईरान के विदेश मंत्री अराघची के अनुसार, यदि इजरायल लेबनान पर दोबारा हमला करता है या वहाँ के किसी क्षेत्र पर कब्जा बनाए रखता है, तो ईरान इसे एमओयू का उल्लंघन मानेगा। ईरान की माँग है कि इजरायली सेना उन सभी इलाकों से हटे जिन पर उसने हाल में कब्जा किया है।
ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर क्या कहा?
जी7 सम्मेलन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने, खरीदने या उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा होने पर 'गंभीर और अकल्पनीय परिणाम' होंगे, साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य ईरान में शासन परिवर्तन नहीं है।
इस वार्ता में कौन-कौन से पक्ष शामिल हैं?
ईरान के विदेश मंत्री के अनुसार, इस समझौते में एक तरफ अमेरिका और इजरायल हैं और दूसरी तरफ ईरान और हिज्बुल्लाह । यह केवल द्विपक्षीय अमेरिका-ईरान वार्ता नहीं, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा ढाँचे की बातचीत है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले