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ईरान के एनपीटी से बाहर निकलने पर रूस की आपत्ति, क्रेमलिन ने जताई चिंता

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ईरान के एनपीटी से बाहर निकलने पर रूस की आपत्ति, क्रेमलिन ने जताई चिंता

सारांश

रूस ने साफ कहा — ईरान एनपीटी न छोड़े। क्रेमलिन प्रवक्ता पेस्कोव का यह बयान तब आया जब ईरानी संसद के उपाध्यक्ष ने एक बार फिर संधि से बाहर निकलने की संभावना जताई। मॉस्को और तेहरान के बीच रणनीतिक नजदीकी के बावजूद रूस परमाणु अस्थिरता नहीं चाहता।

मुख्य बातें

क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने 29 सितंबर को कहा कि रूस नहीं चाहता कि ईरान परमाणु अप्रसार संधि ( एनपीटी ) से बाहर निकले।
ईरानी संसद के उपाध्यक्ष अली निकजाद ने एनपीटी से हटने की संभावना का फिर से उल्लेख किया।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने न्यूयॉर्क दौरे में कहा — ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, लेकिन दबाव स्वीकार नहीं करेगा।
ईरान का यूरेनियम संवर्धन कथित तौर पर हथियार निर्माण स्तर के करीब पहुँचा — तेहरान इन आरोपों से इनकार करता है।
रूस और ईरान के बीच रणनीतिक सहयोग संधि है; मॉस्को ने पहले भी कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है।

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार, 29 सितंबर को स्पष्ट किया कि रूस नहीं चाहता कि ईरान परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) से अलग हो, और मॉस्को को उम्मीद है कि तेहरान इस अंतरराष्ट्रीय समझौते का हिस्सा बना रहेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरानी संसद के कुछ सदस्य एनपीटी से हटने की धमकी दे रहे हैं।

पेस्कोव का बयान और उसका संदर्भ

पेस्कोव से ईरानी अधिकारियों की उन टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया माँगी गई थी, जिनमें ईरान के एनपीटी से संभावित रूप से बाहर निकलने का संकेत दिया गया था। पेस्कोव ने कहा, 'इस बयान पर और स्पष्टीकरण की जरूरत है। हम नहीं चाहेंगे कि ईरान एनपीटी से हटे।' गौरतलब है कि इस संधि के तहत ईरान परमाणु हथियार बनाने या हासिल करने से प्रतिबद्ध है।

ईरानी संसद की चेतावनी

ईरानी सांसदों ने देश के परमाणु कार्यक्रम को बंद करने के लिए बनाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय दबाव के जवाब में एनपीटी से हटने पर विचार करने की बात कही है। सोमवार को आई रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी संसद के उपाध्यक्ष अली निकजाद ने एक बार फिर इस संभावना का उल्लेख किया। यह चेतावनी बार-बार दोहराई जा रही है, जो पश्चिमी देशों और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ तेहरान के बढ़ते तनाव को दर्शाती है।

ईरान का रुख: शांतिपूर्ण कार्यक्रम का दावा

ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने हाल ही में न्यूयॉर्क दौरे के दौरान कहा था कि उनका देश कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। हालाँकि, उसी इंटरव्यू में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तेहरान परमाणु कार्यक्रम और अन्य मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन 'धौंस या दबाव' को स्वीकार नहीं करेगा। दूसरी ओर, कथित तौर पर ईरान का यूरेनियम संवर्धन हथियार निर्माण के स्तर के करीब पहुँचने की अंतरराष्ट्रीय चिंताएँ बनी हुई हैं, जिन्हें तेहरान सिरे से नकारता है।

रूस-ईरान रणनीतिक संबंध और कूटनीतिक भूमिका

हाल के वर्षों में रूस और ईरान के बीच करीबी रणनीतिक संबंध विकसित हुए हैं और दोनों देशों के बीच एक रणनीतिक सहयोग संधि भी मौजूद है। इसी पृष्ठभूमि में मॉस्को की यह अपील महत्वपूर्ण है — रूस ईरान के परमाणु मुद्दे के समाधान के लिए पहले भी कूटनीतिक रास्ते पर जोर देता रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, रूस की यह स्थिति दर्शाती है कि वह ईरान के साथ घनिष्ठ संबंधों के बावजूद परमाणु अस्थिरता को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानता है।

आगे क्या होगा

एनपीटी से ईरान का संभावित बाहर निकलना वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती होगी। रूस की इस स्पष्ट आपत्ति के बाद अब सभी की नजरें तेहरान की अगली प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय परमाणु वार्ताओं की दिशा पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी परतें हैं — मॉस्को तेहरान का करीबी रणनीतिक साझेदार है, फिर भी वह खुलकर एनपीटी से हटने का विरोध कर रहा है, जो दर्शाता है कि परमाणु अस्थिरता रूस के अपने हितों के लिए भी खतरनाक है। ईरानी सांसदों की यह धमकी नई नहीं है — यह दबाव की कूटनीति का हिस्सा है, जिसे तेहरान पश्चिमी वार्ताकारों पर मोलभाव के लिए इस्तेमाल करता रहा है। मुख्यधारा की कवरेज इस बिंदु को अक्सर चूक जाती है कि पेस्कोव का 'और स्पष्टीकरण की जरूरत है' वाला वाक्यांश रूस की असमंजस को भी उजागर करता है — वह ईरान को नाराज नहीं करना चाहता, लेकिन परमाणु अव्यवस्था भी नहीं चाहता।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रूस ने ईरान के एनपीटी से हटने पर क्या कहा?
क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने 29 सितंबर को स्पष्ट किया कि रूस नहीं चाहता कि ईरान परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) से बाहर निकले और उसे उम्मीद है कि तेहरान इस समझौते का हिस्सा बना रहेगा। पेस्कोव ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर और स्पष्टीकरण की आवश्यकता है।
ईरान एनपीटी से हटने की धमकी क्यों दे रहा है?
ईरानी सांसद देश के परमाणु कार्यक्रम को बंद करने के लिए बनाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय दबाव के जवाब में एनपीटी से हटने की बात कर रहे हैं। ईरानी संसद के उपाध्यक्ष अली निकजाद ने सोमवार को एक बार फिर इस संभावना का जिक्र किया।
एनपीटी क्या है और इससे ईरान पर क्या बाध्यता है?
परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है जिसके तहत हस्ताक्षरकर्ता देश परमाणु हथियार न बनाने और न हासिल करने की प्रतिबद्धता जताते हैं। ईरान इस संधि का सदस्य है और उसके बाहर निकलने से वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था को गंभीर चुनौती मिलेगी।
ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन का परमाणु मुद्दे पर क्या रुख है?
राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने न्यूयॉर्क दौरे के दौरान कहा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए तैयार है। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तेहरान 'धौंस या दबाव' को स्वीकार नहीं करेगा।
रूस और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे पर संबंध कैसे हैं?
रूस और ईरान के बीच एक रणनीतिक सहयोग संधि है और हाल के वर्षों में दोनों देशों के संबंध और घनिष्ठ हुए हैं। इसके बावजूद रूस ने ईरान के परमाणु मुद्दे के समाधान के लिए हमेशा कूटनीतिक रास्ते पर जोर दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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