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एनपीटी सम्मेलन तीसरी बार विफल: ईरान ने अमेरिका पर लगाया परमाणु वार्ता बिगाड़ने का आरोप

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एनपीटी सम्मेलन तीसरी बार विफल: ईरान ने अमेरिका पर लगाया परमाणु वार्ता बिगाड़ने का आरोप

सारांश

संयुक्त राष्ट्र में एनपीटी समीक्षा सम्मेलन लगातार तीसरी बार विफल हुआ और ईरान ने इसकी जिम्मेदारी सीधे अमेरिका पर डाली। तेहरान का कहना है कि वाशिंगटन की कठोर मांगें और ईरानी परमाणु कार्यक्रम पर दबाव बनाने की रणनीति ने बहुपक्षीय वार्ता को पटरी से उतार दिया।

मुख्य बातें

ईरान ने 23 मई 2025 को अमेरिका पर एनपीटी समीक्षा सम्मेलन विफल कराने का सीधा आरोप लगाया।
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 27 अप्रैल से शुरू यह सम्मेलन लगातार तीसरी बार बिना किसी आम सहमति के समाप्त हुआ।
सम्मेलन अध्यक्ष डो हंग वियत ने आम सहमति न बन पाने को 'बेहद खेदजनक' बताया।
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी मिशन ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि 'अमेरिका की अत्यधिक मांगों ने एनपीटी को पतन की ओर धकेल दिया।' विवाद मुख्यतः ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अंतिम दस्तावेज़ की भाषा को लेकर था।
एनपीटी 1968 में हस्ताक्षरित और 5 मार्च 1970 को लागू हुई ऐतिहासिक परमाणु संधि है।

ईरान ने 23 मई 2025 को अमेरिका पर सीधा आरोप लगाया कि उसकी अत्यधिक और कठोर मांगों के कारण संयुक्त राष्ट्र में आयोजित परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) समीक्षा सम्मेलन लगातार तीसरी बार बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गया। तेहरान का स्पष्ट कहना है कि वाशिंगटन ने इस बहुपक्षीय मंच का उपयोग ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर दबाव बनाने के लिए किया, जिससे वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी।

मुख्य घटनाक्रम

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क में 27 अप्रैल से शुरू हुआ यह सम्मेलन परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने, देशों के बीच तनाव घटाने और वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुलाया गया था। दर्जनों देशों की भागीदारी के बावजूद, सम्मेलन के अध्यक्ष डो हंग वियत ने शुक्रवार की बैठक में स्वीकार किया कि कोई आम सहमति नहीं बन पाई, जिसे उन्होंने 'बेहद खेदजनक' बताया। यह जानकारी प्रसारक एनएचके जापान ने दी।

ईरान का पक्ष और एक्स पर पोस्ट

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी मिशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए लिखा: 'अमेरिका की अत्यधिक मांगों ने एनपीटी को पतन की ओर धकेल दिया है। अमेरिका और उसके सहयोगियों की बाधा डालने वाली नीतियों के कारण एनपीटी समीक्षा सम्मेलन लगातार तीसरी बार विफल रहा।' मिशन ने यह भी चेतावनी दी कि 'परमाणु निरस्त्रीकरण के बिना एनपीटी के भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती।'

रिपोर्टों के अनुसार, विवाद का केंद्र मुख्यतः ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उस भाषा को लेकर था जिसे अमेरिका सम्मेलन के अंतिम दस्तावेज़ में शामिल कराना चाहता था। ईरान का आरोप है कि यह प्रयास बहुपक्षीय मंच को एकतरफा दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश थी।

एनपीटी की पृष्ठभूमि

परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) एक ऐतिहासिक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है, जिस पर 1968 में हस्ताक्षर हुए और 5 मार्च 1970 को यह लागू हुई। इसका उद्देश्य परमाणु हथियारों का प्रसार रोकना, निरस्त्रीकरण को प्रोत्साहित करना और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना है। 11 मई 1995 को इसे अनिश्चित काल के लिए विस्तारित किया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक परमाणु तनाव पहले से ही चरम पर है।

व्यापक निहितार्थ

गौरतलब है कि यह लगातार तीसरी बार है जब एनपीटी समीक्षा सम्मेलन बिना किसी सर्वसम्मत दस्तावेज़ के समाप्त हुआ है। ईरान का तर्क है कि जब तक परमाणु-संपन्न बड़े देश खुद अपने शस्त्रागार नहीं घटाएंगे, तब तक अन्य देशों से परमाणु संयम की अपेक्षा करना न्यायसंगत नहीं है। आलोचकों का कहना है कि इस गतिरोध से एनपीटी की वैश्विक विश्वसनीयता और प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठते हैं।

आगे की राह

सम्मेलन के विफल होने के बाद अब यह देखना होगा कि क्या संयुक्त राष्ट्र के भीतर कोई वैकल्पिक कूटनीतिक मार्ग खोजा जा सकता है। ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु मुद्दे पर सीधी बातचीत की संभावना फिलहाल अनिश्चित बनी हुई है, और अगला एनपीटी समीक्षा चक्र कब और किन परिस्थितियों में होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वैश्विक परमाणु व्यवस्था की बुनियाद पर उठता गंभीर सवाल है। ईरान का यह तर्क कि परमाणु-संपन्न देश खुद निरस्त्रीकरण से बचते हुए दूसरों पर संयम थोपना चाहते हैं, उन देशों के बीच व्यापक समर्थन पाता है जो एनपीटी को असमान मानते हैं। अमेरिका की भूमिका पर ईरान के आरोप एकतरफा हैं, लेकिन यह भी सच है कि बिना आम सहमति के लगातार तीन विफलताएं इस संधि की प्रासंगिकता को कमज़ोर करती हैं। जब तक बड़े परमाणु देश अनुच्छेद-6 के तहत निरस्त्रीकरण की ठोस प्रतिबद्धता नहीं दिखाते, एनपीटी का ढांचा और कमज़ोर होता रहेगा।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनपीटी समीक्षा सम्मेलन 2025 क्यों विफल हुआ?
रिपोर्टों के अनुसार, विवाद मुख्यतः ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अंतिम दस्तावेज़ में शामिल की जाने वाली भाषा को लेकर था। ईरान का आरोप है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की कठोर मांगों ने आम सहमति बनने से रोका, जिससे सम्मेलन लगातार तीसरी बार बिना नतीजे के समाप्त हुआ।
परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) क्या है?
एनपीटी एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है जिस पर 1968 में हस्ताक्षर हुए और 5 मार्च 1970 को यह लागू हुई। इसका उद्देश्य परमाणु हथियारों का प्रसार रोकना, निरस्त्रीकरण को प्रोत्साहित करना और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग करना है। 11 मई 1995 को इसे अनिश्चित काल के लिए विस्तारित किया गया।
ईरान ने अमेरिका पर क्या आरोप लगाए हैं?
ईरान के स्थायी मिशन ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिका की अत्यधिक मांगों ने एनपीटी को पतन की ओर धकेल दिया है। ईरान का यह भी आरोप है कि अमेरिका इस बहुपक्षीय मंच का उपयोग ईरानी परमाणु कार्यक्रम पर दबाव बनाने के लिए कर रहा था।
यह कितनी बार हुआ है कि एनपीटी सम्मेलन बिना नतीजे के समाप्त हुआ?
यह लगातार तीसरी बार है जब एनपीटी समीक्षा सम्मेलन बिना किसी सर्वसम्मत अंतिम दस्तावेज़ के समाप्त हुआ है। सम्मेलन अध्यक्ष डो हंग वियत ने इसे 'बेहद खेदजनक' बताया।
इस विफलता का वैश्विक परमाणु सुरक्षा पर क्या असर होगा?
आलोचकों का कहना है कि लगातार तीन विफलताओं से एनपीटी की वैश्विक विश्वसनीयता और प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठते हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि परमाणु निरस्त्रीकरण के बिना एनपीटी के भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती, जो इस संधि की दीर्घकालिक प्रासंगिकता के लिए चिंताजनक संकेत है।
राष्ट्र प्रेस
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