ईरान-पाकिस्तान द्विपक्षीय सहयोग: नकवी ने तेहरान में राष्ट्रपति पेजेश्कियन से की मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के गृह मंत्री सैयद मोहसिन रजा नकवी ने मंगलवार शाम तेहरान में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से मुलाकात की, जिसमें दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक, सांस्कृतिक और सुरक्षा क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने पर सहमति बनी। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब दोनों पड़ोसी देश अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई रणनीतिक ऊर्जा देने की कोशिश में हैं।
मुलाकात का संदर्भ और उद्देश्य
नकवी की यह तेहरान यात्रा ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी की हाल की पाकिस्तान यात्रा के दौरान हुए समझौतों और सहमतियों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। पाकिस्तानी गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह दौरा मौजूदा प्रतिबद्धताओं को तेज़ी से लागू करने और द्विपक्षीय सहयोग की व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राष्ट्रपति पेजेश्कियन का रुख
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने बैठक में पाकिस्तानी नेतृत्व की एकजुटता बढ़ाने और ईरान के साथ संबंध मजबूत करने की प्रतिबद्धता को तेहरान के लिए 'अत्यंत महत्वपूर्ण और मूल्यवान' बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास जो संसाधन और क्षमताएँ उपलब्ध हैं, उनका बेहतर उपयोग करके आपसी सहयोग को नई ऊँचाइयों पर ले जाना चाहिए।
पेजेश्कियन ने व्यापक क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य में भी ईरान-पाकिस्तान संबंधों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंध न केवल साझा हितों को आगे बढ़ाएंगे, बल्कि पूरे क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को भी मजबूत करेंगे।
नकवी का बयान और पाकिस्तान की प्रतिबद्धता
गृह मंत्री नकवी ने राष्ट्रपति पेजेश्कियन से मुलाकात पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि ईरान और पाकिस्तान के संबंध इतने मज़बूत हैं कि इन्हें तोड़ा नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस्लामाबाद तेहरान के साथ संबंधों के व्यापक विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
क्षेत्रीय महत्व और आगे की राह
गौरतलब है कि ईरान और पाकिस्तान की साझा सीमा लगभग 900 किलोमीटर लंबी है और दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा तथा लोगों के आवागमन से जुड़े कई अनसुलझे मुद्दे रहे हैं। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब क्षेत्रीय भू-राजनीति में तेज़ी से बदलाव आ रहे हैं और दोनों देश अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई व्यावहारिक दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं। मौजूदा समझौतों के क्रियान्वयन की गति और आर्थिक-व्यापारिक सहयोग के विस्तार पर आने वाले हफ्तों में और स्पष्टता आने की उम्मीद है।