इस्फहान: अमेरिका और इजरायल के निशाने पर क्यों है ईरान का यह महत्वपूर्ण शहर?
सारांश
Key Takeaways
- ईरान में सैन्य तनाव बढ़ रहा है।
- इस्फहान पर हमले औद्योगिक और सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए हैं।
- शहर का सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व है।
- हमले क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल रहे हैं।
- वैश्विक सुरक्षा पर भी इन घटनाओं का दुष्प्रभाव पड़ सकता है।
नई दिल्ली, 15 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ईरान में बढ़ते सैन्य तनाव के चलते अब राजधानी के बाद इस्फहान पर भी लगातार हमले हो रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, तड़के हुए हवाई हमलों के बाद शहर के कई हिस्सों में घना काला धुआं उठता दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के अनुसार, रविवार तड़के फैक्ट्रियों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने से कम से कम 15 लोगों की मृत्यु हुई है।
खबरों में कहा गया है कि हाल के हमलों में ईरान के लगभग 200 शहरों को निशाना बनाया गया, जिनमें इस्फहान प्रमुख है। तेहरान और मशहद के बाद, इस्फहान ईरान का तीसरा सबसे बड़ा शहर है और इसे ईरान का महत्वपूर्ण औद्योगिक और सैन्य केंद्र माना जाता है। यहाँ मिसाइल और रक्षा उत्पादन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान स्थित हैं।
रणनीतिक दृष्टि से इस्फहान सांस्कृतिक समृद्धि के लिए भी जाना जाता है। 16वीं-17वीं सदी की सफ़वीद वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण माने जाने वाला नक्श-ए-जहां स्क्वायर इसी शहर में है, जिसे विश्व धरोहर के रूप में मान्यता प्राप्त है।
शहर के आसपास ईरान के कई संवेदनशील संस्थान हैं, जिनमें परमाणु अनुसंधान केंद्र, मिसाइल उत्पादन सुविधाएं, एक प्रमुख तेल रिफाइनरी और वायुसेना का अड्डा शामिल हैं। ब्रिटिश दैनिक द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, इन ठिकानों के कारण इस्फहान लंबे समय से ईरान की सामरिक संरचना का अहम हिस्सा रहा है।
इस्फहान ईरान के स्टील उद्योग का भी एक प्रमुख केंद्र है। यहाँ स्थित मुबारक स्टील कंपनी को मध्य-पूर्व के सबसे बड़े स्टील उत्पादकों में गिना जाता है। इसके अलावा, शहर में एक बड़ा एयरफोर्स बेस भी है, जहाँ ईरान के पुराने अमेरिकी निर्मित एफ-14 टॉमकैट लड़ाकू विमानों का बेड़ा तैनात है।
विश्लेषकों का मानना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की औद्योगिक और सैन्य क्षमताओं को गंभीर रूप से कमजोर करना है। उद्योग और रक्षा ढांचे को नुकसान पहुँचने से देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे इसकी परमाणु और सैन्य परियोजनाओं पर खर्च करने की क्षमता प्रभावित होगी।
क्षेत्रीय राजनीति के संदर्भ में, यदि ईरान आर्थिक और सैन्य दृष्टि से कमजोर होता है, तो वह उन संगठनों को सीमित समर्थन ही दे पाएगा जिन्हें इजरायल लंबे समय से अपने लिए खतरा मानता रहा है, जैसे हमास और हिज्बुल्लाह।
मध्य-पूर्व में बढ़ते इन हमलों और जवाबी कार्रवाई की आशंका ने क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।