22 अगस्त 2026
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ई-1 बस्ती परियोजना पर EU की कड़ी आपत्ति: वॉन डेर लेयेन बोलीं — यह दो-राष्ट्र समाधान को कमज़ोर करता है

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ई-1 बस्ती परियोजना पर EU की कड़ी आपत्ति: वॉन डेर लेयेन बोलीं — यह दो-राष्ट्र समाधान को कमज़ोर करता है

सारांश

यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन ने इजरायल की ई-1 बस्ती परियोजना के निर्माण टेंडर को सीधे 'अस्वीकार्य' करार दिया — और कंपनियों को भी चेतावनी दी। यह EU का अब तक का सबसे मुखर बयान है, जो वेस्ट बैंक विभाजन और दो-राष्ट्र समाधान की व्यवहार्यता पर गहरे सवाल उठाता है।

मुख्य बातें

यूरोपियन कमीशन अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 22 अगस्त 2026 को इजरायल की ई-1 बस्ती परियोजना के निर्माण टेंडर को 'अस्वीकार्य' बताया।
उन्होंने कहा कि यह कदम वेस्ट बैंक को दो हिस्सों में विभाजित कर दो-राष्ट्र समाधान की राह कमज़ोर करता है।
अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों को अवैध मानते हैं।
EU ने इजरायल सरकार से योजनाएँ तत्काल वापस लेने और बस्ती विस्तार रोकने की अपील की।
व्यावसायिक कंपनियों को चेतावनी दी गई कि टेंडर में बोली लगाने पर कानूनी और प्रतिष्ठा से जुड़े गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 22 अगस्त 2026 को इजरायल सरकार द्वारा ई-1 बस्ती (सेटलमेंट) परियोजना के लिए निर्माण टेंडर जारी करने के फैसले पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए स्पष्ट किया कि यह निर्णय न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है, बल्कि वेस्ट बैंक को भौगोलिक रूप से विभाजित कर दो-राष्ट्र समाधान (टू-स्टेट सॉल्यूशन) की संभावना को गंभीर नुकसान पहुँचाता है।

वॉन डेर लेयेन का बयान

वॉन डेर लेयेन ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'इजरायल सरकार की ओर से ई-1 बस्ती परियोजना के लिए निर्माण टेंडर जारी करने का फैसला स्वीकार्य नहीं है। हम लंबे समय से इस कदम का विरोध करते रहे हैं। यह कदम दो-राष्ट्र समाधान को कमज़ोर करता है, क्योंकि इससे वेस्ट बैंक दो हिस्सों में बंट जाता है और फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों की भौगोलिक एकता टूट जाती है। हम दो-राष्ट्र समाधान के आधार पर न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के लिए अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखते हैं।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अंतरराष्ट्रीय कानून स्पष्ट रूप से वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों को अवैध घोषित करता है — एक ऐसा रुख जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी दोहरा चुकी है।

वेस्ट बैंक में मौजूदा हालात

वॉन डेर लेयेन ने इस फैसले के समय को लेकर भी चिंता जताई। उनके अनुसार वेस्ट बैंक में पहले से ही गंभीर अस्थिरता का माहौल है — वहाँ बसने वाले कुछ लोगों की ओर से नागरिकों के विरुद्ध अभूतपूर्व स्तर की हिंसा देखी जा रही है और फ़िलिस्तीनी अर्थव्यवस्था पर कड़े प्रतिबंध लागू हैं। ऐसे संवेदनशील समय में यह निर्माण टेंडर क्षेत्र में तनाव और बढ़ा सकता है।

EU की माँग और कंपनियों को चेतावनी

यूरोपियन कमीशन ने इजरायल सरकार से इन योजनाओं को तत्काल वापस लेने और वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार पर रोक लगाने की अपील की है। वॉन डेर लेयेन ने व्यावसायिक कंपनियों को भी आगाह किया कि उन्हें इन निर्माण टेंडरों में बोली लगाने पर विचार नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से उन्हें 'कानूनी और प्रतिष्ठा से जुड़े गंभीर परिणाम' भुगतने पड़ सकते हैं।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब गाज़ा संघर्ष के बाद से इजरायल और यूरोपीय संघ के बीच राजनयिक तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। गौरतलब है कि ई-1 क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति — येरुशलम और मालेह अदुमीम के बीच — इसे रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बनाती है; इस क्षेत्र में निर्माण से वेस्ट बैंक का उत्तरी और दक्षिणी हिस्सा प्रभावी रूप से अलग हो जाएगा। यूरोपीय संघ ने स्पष्ट किया है कि वह दो-राष्ट्र समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से पीछे नहीं हटेगा।

आगे क्या

यूरोपियन कमीशन की इस प्रतिक्रिया के बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ने की संभावना है। विश्लेषकों के अनुसार यदि इजरायल ने टेंडर प्रक्रिया जारी रखी, तो यूरोपीय संघ और इजरायल के बीच व्यापार एवं राजनयिक संबंधों पर असर पड़ सकता है। अब सबकी नज़र इजरायल सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और संयुक्त राष्ट्र के अगले कदम पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों मिलकर संकेत देते हैं कि EU अब केवल निंदा-प्रस्तावों तक सीमित नहीं रहना चाहता। लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या EU इस बयानबाज़ी को ठोस व्यापारिक या राजनयिक दबाव में बदल पाएगा — क्योंकि पिछले दशक में इजरायली बस्ती विस्तार के विरुद्ध यूरोपीय आपत्तियाँ बयानों से आगे बहुत कम गई हैं। ई-1 क्षेत्र की भौगोलिक संवेदनशीलता इसे किसी भी भविष्य के फ़िलिस्तीनी राज्य की व्यवहार्यता के लिए केंद्रीय मुद्दा बनाती है। जब तक EU के पास बाध्यकारी उपायों की इच्छाशक्ति नहीं होगी, ये शब्द इजरायल की नीति पर कोई वास्तविक असर नहीं डालेंगे।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ई-1 बस्ती परियोजना क्या है और यह विवादास्पद क्यों है?
ई-1 परियोजना वेस्ट बैंक में येरुशलम और मालेह अदुमीम के बीच एक इजरायली बस्ती निर्माण योजना है। यह इसलिए विवादास्पद है क्योंकि इस क्षेत्र में निर्माण से वेस्ट बैंक भौगोलिक रूप से दो हिस्सों में बंट जाएगा, जिससे किसी भी भविष्य के फ़िलिस्तीनी राज्य की व्यवहार्यता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग जाएगा।
वॉन डेर लेयेन ने इजरायल के इस फैसले पर क्या कहा?
यूरोपियन कमीशन अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने एक्स पर पोस्ट करते हुए इस निर्माण टेंडर को 'अस्वीकार्य' बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम दो-राष्ट्र समाधान को कमज़ोर करता है और फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों की भौगोलिक एकता को तोड़ता है।
क्या वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियाँ अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैध हैं?
नहीं। अंतरराष्ट्रीय कानून स्पष्ट रूप से वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों को अवैध मानता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी इस रुख को दोहरा चुकी है, और यूरोपीय संघ इस स्थापित अंतरराष्ट्रीय मत का समर्थन करता है।
EU ने व्यावसायिक कंपनियों को क्या चेतावनी दी है?
वॉन डेर लेयेन ने कंपनियों से स्पष्ट कहा कि उन्हें ई-1 परियोजना के निर्माण टेंडरों में बोली लगाने पर विचार नहीं करना चाहिए। उनके अनुसार ऐसा करने से कंपनियों को कानूनी और प्रतिष्ठा से जुड़े गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
इस विवाद का इजरायल-EU संबंधों पर क्या असर पड़ सकता है?
विश्लेषकों के अनुसार यदि इजरायल ने टेंडर प्रक्रिया जारी रखी तो यूरोपीय संघ और इजरायल के बीच व्यापारिक एवं राजनयिक संबंधों पर दबाव बढ़ सकता है। EU पहले से ही गाज़ा संघर्ष के संदर्भ में इजरायल के साथ अपने संबंधों की समीक्षा कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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