जैकलीन फर्नांडिस की याचिका से जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा अलग, ₹200 करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग केस अब नई पीठ को
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने 11 जून 2025 को बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस की याचिका पर सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया। यह याचिका ₹200 करोड़ के चर्चित मनी लॉन्ड्रिंग और जबरन वसूली मामले से संबंधित है। अब यह प्रकरण एक नई पीठ के समक्ष 24 जून को सूचीबद्ध किया गया है।
अलग होने की वजह
जस्टिस मिश्रा ने स्पष्ट किया कि इस मामले से जुड़े एक अन्य प्रकरण में उनका पुत्र अधिवक्ता के रूप में पेश हो रहा है। निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उन्होंने स्वेच्छा से इस याचिका की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया। न्यायिक परंपरा में इसे 'रिक्यूज़ल' कहा जाता है और यह न्यायपालिका की पारदर्शिता का एक महत्वपूर्ण पहलू माना जाता है।
मूल विवाद: पटियाला हाउस कोर्ट का आदेश
जैकलीन फर्नांडिस ने नई दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के 30 मई के उस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है, जिसमें प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत उनके विरुद्ध आरोप तय करने का निर्देश दिया गया था। इस आदेश में सुकेश चंद्रशेखर, उसकी पत्नी लीना पॉल और 14 अन्य आरोपितों के खिलाफ भी आरोप तय करने की बात कही गई थी। अभिनेत्री का तर्क है कि उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर उनके विरुद्ध आरोप तय किया जाना न्यायसंगत नहीं है और उन्होंने ट्रायल कोर्ट के आदेश को निरस्त करने की माँग की है।
₹200 करोड़ के घोटाले की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला ₹200 करोड़ की कथित जबरन वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, जिसकी जाँच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रही है। ईडी का आरोप है कि सुकेश चंद्रशेखर ने जेल में बंद रहते हुए एक कारोबारी की पत्नी से कथित तौर पर करीब ₹200 करोड़ की ठगी और वसूली की। जाँच एजेंसी का दावा है कि इस कथित अपराध से अर्जित धन का उपयोग कई व्यक्तियों को लाभ पहुँचाने में किया गया।
ईडी के अनुसार, जैकलीन फर्नांडिस को सुकेश चंद्रशेखर की ओर से करोड़ों रुपए मूल्य के महंगे उपहार प्राप्त हुए थे, जिनमें कथित तौर पर लग्जरी कारें, कीमती आभूषण, महँगे ब्रांड के बैग और अन्य वस्तुएँ शामिल थीं। इसके अलावा, एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि अभिनेत्री की बहन के विदेशी बैंक खाते और उनके भाई के खाते में भी धनराशि भेजी गई थी। हालाँकि, जैकलीन फर्नांडिस लगातार इन सभी आरोपों को नकारती रही हैं।
आगे क्या होगा
अब सर्वोच्च न्यायालय की नई पीठ 24 जून को इस याचिका पर सुनवाई करेगी और तय करेगी कि आगे क्या रुख अपनाया जाए। यह मामला न केवल जैकलीन फर्नांडिस, बल्कि सुकेश चंद्रशेखर और अन्य सह-आरोपितों के लिए भी निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। नई पीठ के गठन और उसके निर्णय पर सभी पक्षों की नज़रें टिकी हैं।