जैकलीन फर्नांडीज ने ₹200 करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सरकारी गवाह बनने की अर्जी वापस ली

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जैकलीन फर्नांडीज ने ₹200 करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सरकारी गवाह बनने की अर्जी वापस ली

सारांश

जैकलीन फर्नांडीज ने ₹200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सरकारी गवाह बनने की अर्जी वापस ले ली — और यह कदम तब आया जब ईडी ने एक दिन पहले ही उनके जांच में असहयोग का हवाला देते हुए अर्जी का विरोध किया था। अब अभिनेत्री आरोपी के रूप में ट्रायल का सामना करेंगी।

मुख्य बातें

जैकलीन फर्नांडीज ने 12 मई 2026 को पटियाला हाउस कोर्ट में सरकारी गवाह बनने की अर्जी वापस ली।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक दिन पहले ही अर्जी का विरोध करते हुए जांच में 'असंतोषजनक' सहयोग का आरोप लगाया था।
ईडी के अनुसार जैकलीन ने सुकेश चंद्रशेखर से कथित तौर पर ₹7 करोड़ के महंगे तोहफे प्राप्त किए।
पिछले वर्ष सर्वोच्च न्यायालय ने मनी लॉन्ड्रिंग कार्यवाही रद्द करने की उनकी अर्जी पर सुनवाई से इनकार किया था।
यह मामला रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटरों की पत्नियों से ₹200 करोड़ की कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है।

बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज ने मंगलवार, 12 मई को सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े ₹200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सरकारी गवाह (अप्रूवर) बनने की अपनी अर्जी पटियाला हाउस कोर्ट से वापस ले ली। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया जब एक दिन पहले ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अदालत में इस अर्जी का कड़ा विरोध किया था।

ईडी ने क्यों किया था विरोध

ईडी ने अदालत के समक्ष दलील दी थी कि जांच के दौरान जैकलीन का रवैया 'संतोषजनक नहीं' रहा और वह मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 50 के तहत दर्ज अपने बयानों में 'पूरी और सच्ची जानकारी' देने में नाकाम रहीं। केंद्रीय जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि अभिनेत्री को चंद्रशेखर के आपराधिक इतिहास की जानकारी होने के बावजूद वह उनके साथ लगातार संपर्क में बनी रहीं।

तोहफों और धन के स्रोत पर आरोप

ईडी के अनुसार, चंद्रशेखर ने मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों से अर्जित धन से जैकलीन के लिए 'सभी तरह के फायदे, तोहफे और कीमती सामान' का इंतजाम किया था। जांच एजेंसी का दावा है कि अभिनेत्री ने चंद्रशेखर से करीब ₹7 करोड़ के महंगे उपहार प्राप्त किए। हालाँकि, जैकलीन ने लगातार यह रुख बनाए रखा है कि उन्हें चंद्रशेखर की आपराधिक गतिविधियों या उन तोहफों के लिए इस्तेमाल किए गए धन के स्रोत की कोई जानकारी नहीं थी।

ईडी ने यह भी आरोप लगाया है कि चंद्रशेखर की कथित सहयोगी पिंकी ईरानी ने उनकी ओर से जैकलीन तक लग्जरी तोहफे और महंगी वस्तुएँ पहुँचाने में सहायता की।

सुप्रीम कोर्ट में भी मिली थी निराशा

गौरतलब है कि पिछले वर्ष सितंबर में सर्वोच्च न्यायालय ने जैकलीन की उस अर्जी पर सुनवाई से इनकार कर दिया था, जिसमें उन्होंने ईडी द्वारा शुरू की गई मनी लॉन्ड्रिंग कार्यवाही को रद्द करने की माँग की थी। उनकी ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया था कि पीएमएलए की धारा 3 और 4 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, क्योंकि उन्हें तोहफों के अपराध-जनित धन से खरीदे जाने की जानकारी नहीं थी।

जस्टिस दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने 'विजय मदनलाल चौधरी मामले' में दिए गए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा था कि आरोप तय करने के चरण में लगाए गए आरोपों को उसी रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मनी लॉन्ड्रिंग मामला उन आरोपों से जुड़ा है जिसमें चंद्रशेखर पर रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटरों शिविंदर सिंह और मालविंदर सिंह की पत्नियों से कथित तौर पर ₹200 करोड़ की धोखाधड़ी करने का आरोप है। ईडी ने इस मामले में कई चार्जशीट दायर की हैं और एक सप्लीमेंट्री अभियोजन शिकायत में जैकलीन को आरोपी बनाया है। दूसरी बॉलीवुड अभिनेत्री नोरा फतेही से इस मामले में गवाह के तौर पर पूछताछ की जा चुकी है।

आगे क्या होगा

अर्जी वापस लेने के बाद जैकलीन फर्नांडीज अब इस मामले में आरोपी के रूप में ही ट्रायल का सामना करेंगी। मामले की अगली सुनवाई पटियाला हाउस कोर्ट में होनी है, जहाँ ईडी की चार्जशीट पर आगे की कार्यवाही तय होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही ईडी की व्यापक शक्तियों को वैध ठहरा चुका है? अभिनेत्री अब ट्रायल का सामना करेंगी, जो यह तय करेगा कि उपहार लेना और अपराध-जनित धन की लॉन्ड्रिंग के बीच कानूनी रेखा कहाँ खींची जाती है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जैकलीन फर्नांडीज ने सरकारी गवाह बनने की अर्जी क्यों वापस ली?
जैकलीन फर्नांडीज ने 12 मई 2026 को पटियाला हाउस कोर्ट में अपनी अर्जी वापस ले ली, एक दिन पहले ईडी ने उनकी जांच में असहयोग का हवाला देते हुए अर्जी का कड़ा विरोध किया था। ईडी का कहना था कि वह पीएमएलए की धारा 50 के तहत पूरी और सच्ची जानकारी देने में नाकाम रहीं।
सुकेश चंद्रशेखर से जुड़ा ₹200 करोड़ का मनी लॉन्ड्रिंग मामला क्या है?
यह मामला उन आरोपों पर आधारित है जिसमें सुकेश चंद्रशेखर पर रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटरों शिविंदर सिंह और मालविंदर सिंह की पत्नियों से कथित तौर पर ₹200 करोड़ की धोखाधड़ी करने का आरोप है। ईडी का दावा है कि इस अपराध से अर्जित धन को लॉन्ड्रिंग करने में जैकलीन की भूमिका रही।
जैकलीन फर्नांडीज पर ईडी के क्या आरोप हैं?
ईडी ने आरोप लगाया है कि जैकलीन ने सुकेश चंद्रशेखर से कथित तौर पर ₹7 करोड़ के महंगे तोहफे प्राप्त किए, जो अपराध-जनित धन से खरीदे गए थे। एजेंसी का कहना है कि चंद्रशेखर के आपराधिक इतिहास की जानकारी होने के बावजूद वह उनके संपर्क में बनी रहीं।
सर्वोच्च न्यायालय ने जैकलीन की अर्जी पर क्या कहा था?
पिछले वर्ष सितंबर में सर्वोच्च न्यायालय ने जैकलीन की मनी लॉन्ड्रिंग कार्यवाही रद्द करने की अर्जी पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। जस्टिस दत्ता की पीठ ने 'विजय मदनलाल चौधरी मामले' का हवाला देते हुए कहा कि आरोप तय करने के चरण में लगाए गए आरोपों को उसी रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।
अब जैकलीन फर्नांडीज के मामले में आगे क्या होगा?
अर्जी वापस लेने के बाद जैकलीन फर्नांडीज अब आरोपी के रूप में पटियाला हाउस कोर्ट में ट्रायल का सामना करेंगी। ईडी की चार्जशीट और सप्लीमेंट्री अभियोजन शिकायत पर आगे की कार्यवाही अदालत में तय होगी।
राष्ट्र प्रेस