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जयपुर डॉक्टर दंपति से ₹76 लाख की डिजिटल अरेस्ट ठगी, ठाणे से चौथा आरोपी गिरफ्तार

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जयपुर डॉक्टर दंपति से ₹76 लाख की डिजिटल अरेस्ट ठगी, ठाणे से चौथा आरोपी गिरफ्तार

सारांश

जयपुर के बुजुर्ग डॉक्टर दंपति को फर्जी NIA नोटिस और गिरफ्तारी की धमकी देकर ₹76 लाख ठगे गए। राजस्थान साइबर पुलिस ने अब तक चार आरोपी पकड़े — ताज़ा गिरफ्तारी ठाणे से। मनी ट्रेल में ₹50 लाख एक कंपनी के ICICI खाते से गुज़रे; जांच जारी।

मुख्य बातें

जयपुर के बुजुर्ग डॉक्टर दंपति से कथित तौर पर ₹76 लाख की डिजिटल अरेस्ट ठगी की गई।
आरोपियों ने ATS, पुलिस और NIA अधिकारी बनकर व्हाट्सएप पर फर्जी नोटिस भेजे और मानसिक दबाव बनाया।
राजस्थान साइबर पुलिस ने किरण लक्ष्मण ताम्हाणे को ठाणे, महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया; मामले में अब तक 4 गिरफ्तारियाँ ।
ठगी की रकम में से करीब ₹50 लाख ताम्हाणे की कंपनी के.टी.
मल्टी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के ICICI बैंक खाते में जमा हुए।
रकम उसी दिन RTGS से दूसरे और अगले दिन तीसरे खाते में ट्रांसफर की गई — पुलिस ने पूरी मनी ट्रेल उजागर की।
अभियान DGP राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर जारी; ADGP विजय कुमार सिंह ने मामले की जानकारी दी।

राजस्थान के केंद्रीय साइबर पुलिस थाने ने 30 अक्टूबर 2026 को डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में पुणे निवासी किरण लक्ष्मण ताम्हाणे को ठाणे, महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया। जयपुर के एक बुजुर्ग डॉक्टर दंपति को पुलिस, एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के अधिकारी बनकर कथित तौर पर डराया गया और उनसे ₹76 लाख ट्रांसफर करवा लिए गए। ट्रांजिट वारंट पर ताम्हाणे को जयपुर लाया गया और इस मामले में अब तक चार आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।

कैसे हुई ठगी

पुलिस के अनुसार, ठगों ने व्हाट्सएप कॉल के ज़रिए डॉक्टर दंपति से संपर्क किया और खुद को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताया। उन्होंने दावा किया कि दंपति के आधार कार्ड का उपयोग आतंकवादी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग में किया जा रहा है, तथा तत्काल गिरफ्तारी की धमकी दी।

आरोपियों ने व्हाट्सएप के माध्यम से NIA का फर्जी नोटिस भेजा और भरोसा दिलाया कि जल्द ही एनओसी या सुरक्षा मंजूरी प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद व्हाट्सएप वॉयस और वीडियो कॉल से लगातार मानसिक दबाव बनाया गया।

ठगों ने दंपति की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की जानकारी और आधिकारिक दस्तावेज़ों की तस्वीरें भी मंगवाईं। लगातार दबाव में आकर दंपति ने अपनी पूंजी निकाल ली और ₹76 लाख विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।

मनी ट्रेल और तकनीकी जांच

जांच में सामने आया कि ठगी की रकम में से करीब ₹50 लाख ताम्हाणे की कंपनी के.टी. मल्टी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के ICICI बैंक खाते में जमा हुए। उसी दिन यह राशि RTGS के ज़रिए दूसरे खाते में भेजी गई और अगले दिन तीसरे खाते में स्थानांतरित हो गई — यानी ठगी की रकम को कई खातों के माध्यम से घुमाने की पूरी शृंखला पुलिस ने उजागर की।

साइबर पुलिस ने व्हाट्सएप नंबर, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), कस्टमर एप्लीकेशन फॉर्म (CAF), IP डिटेल रिकॉर्ड (IPDR) और संदिग्ध बैंक खातों का विश्लेषण कर इस कड़ी को सुलझाया।

आरोपी की भूमिका और बचाव

पूछताछ में ताम्हाणे ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने जिग्ना प्रथामेश सावंत (राठौड़) और अनुराग महेश्वरी के साथ मिलकर कंपनी के बैंक खाते की जानकारी, नेट बैंकिंग क्रेडेंशियल, यूजर आईडी, पासवर्ड, चेकबुक और मोबाइल सिम उपलब्ध कराए। हालाँकि ताम्हाणे ने दावा किया कि उसे रियल एस्टेट निवेश के बहाने कमीशन का लालच दिया गया था, जिसके कारण उसने ये सुविधाएँ दीं।

जांच एजेंसियों का मानना है कि कंपनी के बैंक खाते और उससे जुड़े बैंकिंग साधनों का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए किया गया।

पुलिस अभियान और टीम

यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर चलाए जा रहे साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी विरोधी अभियान के तहत की गई। मामले की जानकारी अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर क्राइम) विजय कुमार सिंह ने दी।

अभियान का नेतृत्व साइबर क्राइम DIG शांतनु कुमार सिंह के मार्गदर्शन और थाना प्रभारी एवं उप पुलिस अधीक्षक गजेंद्र शर्मा ने किया। टीम में इंस्पेक्टर अजय कुमार तथा आरक्षक भीवराम और सच्चिदानंद भी शामिल रहे। इससे पहले दिल्ली और उत्तर प्रदेश से तीन आरोपी पकड़े जा चुके थे।

आगे की जांच

साइबर पुलिस अब व्हाट्सएप रिकॉर्ड, CDR, CAF, IPDR और बैंकिंग लेनदेन की तकनीकी जांच कर पूरी मनी ट्रेल खंगाल रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि ठगी की रकम किन-किन खातों में भेजी गई और इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्य कौन हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में डिजिटल अरेस्ट घोटालों की संख्या में तेज़ वृद्धि दर्ज की जा रही है, और वरिष्ठ नागरिक विशेष रूप से इस तरह की ठगी का शिकार बन रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

ATS, CBI — की नकल उतारकर वरिष्ठ, शिक्षित और आर्थिक रूप से सक्षम नागरिकों को भी शिकार बना लेते हैं। चिंता की बात यह है कि ₹76 लाख की रकम महज़ कुछ दिनों में तीन-तीन खातों से होकर गुज़री — यह मनी लॉन्ड्रिंग का एक सुव्यवस्थित नेटवर्क है, कोई अकेले ठग की करतूत नहीं। जब तक बैंक 'म्यूल अकाउंट' को रियल-टाइम में चिह्नित करने की क्षमता नहीं विकसित करते और दूरसंचार कंपनियाँ फर्जी व्हाट्सएप नंबरों पर अंकुश नहीं लगातीं, तब तक गिरफ्तारियाँ इस समस्या का आंशिक समाधान ही रहेंगी।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयपुर डॉक्टर दंपति के साथ डिजिटल अरेस्ट ठगी कैसे हुई?
ठगों ने व्हाट्सएप कॉल के ज़रिए खुद को पुलिस, ATS और NIA अधिकारी बताकर दंपति के आधार कार्ड का आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल होने का झूठा दावा किया। फर्जी NIA नोटिस भेजकर और गिरफ्तारी की धमकी देकर उनसे ₹76 लाख विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करवाए गए।
किरण लक्ष्मण ताम्हाणे को क्यों गिरफ्तार किया गया?
ताम्हाणे को ठगी की रकम का पहला लाभार्थी माना जा रहा है। जांच में सामने आया कि उसकी कंपनी के.टी. मल्टी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के ICICI बैंक खाते में करीब ₹50 लाख जमा हुए थे। पुलिस के अनुसार, उसने कथित तौर पर बैंकिंग क्रेडेंशियल और सिम अन्य आरोपियों को उपलब्ध कराए।
इस मामले में अब तक कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
मामले में अब तक चार आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। पहले तीन आरोपियों को दिल्ली और उत्तर प्रदेश से पकड़ा गया था, और चौथे आरोपी किरण ताम्हाणे को ठाणे, महाराष्ट्र से ट्रांजिट वारंट पर गिरफ्तार कर जयपुर लाया गया।
ठगी की रकम किन खातों से होकर गुज़री?
जांच में सामने आया कि ₹76 लाख में से करीब ₹50 लाख ताम्हाणे की कंपनी के ICICI बैंक खाते में पहुँचे, जहाँ से उसी दिन RTGS के ज़रिए दूसरे खाते में और अगले दिन तीसरे खाते में ट्रांसफर कर दिए गए। पुलिस अब पूरी मनी ट्रेल की तकनीकी जांच कर रही है।
डिजिटल अरेस्ट घोटाले से खुद को कैसे बचाएँ?
कोई भी सरकारी एजेंसी — NIA, CBI, पुलिस — व्हाट्सएप कॉल या वीडियो कॉल के ज़रिए गिरफ्तारी की धमकी नहीं देती। अगर इस तरह का कोई कॉल आए तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें और किसी भी खाते में रकम ट्रांसफर न करें।
राष्ट्र प्रेस
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