21 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

डिजिटल अरेस्ट स्कैम: रिटायर्ड कर्नल और पत्नी से ₹15.50 लाख की ठगी, पंजाब-राजस्थान से 4 गिरफ्तार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
डिजिटल अरेस्ट स्कैम: रिटायर्ड कर्नल और पत्नी से ₹15.50 लाख की ठगी, पंजाब-राजस्थान से 4 गिरफ्तार

सारांश

दिल्ली के मुनिरका एन्क्लेव में रहने वाले एक रिटायर्ड कर्नल और उनकी पत्नी को 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर ₹15.50 लाख ठगे गए। साउथ-वेस्ट जिला साइबर पुलिस ने पंजाब और राजस्थान से 4 आरोपी पकड़े हैं। नेटवर्क के तार कंबोडिया और दुबई तक जुड़े हैं।

मुख्य बातें

दिल्ली साउथ-वेस्ट जिला साइबर पुलिस ने 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम में पंजाब और राजस्थान से 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
मुनिरका एन्क्लेव निवासी रिटायर्ड कर्नल और उनकी पत्नी से ₹15.50 लाख की ठगी की गई।
ठगों ने ED का फर्जी अरेस्ट वारंट , बॉम्बे हाई कोर्ट और RBI के जाली दस्तावेज भेजकर दबाव बनाया।
मामले में इस्तेमाल बैंक खाते राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर दर्ज 17 शिकायतों से जुड़े पाए गए।
नेटवर्क के तार कथित तौर पर कंबोडिया और यूएई (दुबई) में सक्रिय ऑपरेटरों से जुड़े हैं।

नई दिल्ली के मुनिरका एन्क्लेव में रहने वाले भारतीय सेना के एक रिटायर्ड कर्नल और उनकी पत्नी को 'डिजिटल अरेस्ट' का झाँसा देकर ₹15.50 लाख की ठगी करने वाले एक अंतर्राज्यीय साइबर-फ्रॉड नेटवर्क का दिल्ली साउथ-वेस्ट जिले के साइबर पुलिस स्टेशन ने पर्दाफाश किया है। 21 अगस्त को पुलिस ने बताया कि इस मामले में पंजाब और राजस्थान से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

कैसे रचा गया ठगी का जाल

पीड़ित रिटायर्ड कर्नल को 15 अप्रैल को एक अज्ञात नंबर से कॉल आई, जिसमें कॉलर ने झूठा दावा किया कि महाराष्ट्र पुलिस के आदेश पर उनका टेलीफोन कनेक्शन काट दिया जाएगा। इसके बाद उन्हें दूसरे नंबर पर संपर्क करने को कहा गया, जहाँ एक अन्य ठग ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया।

उस ठग ने पीड़ित को बताया कि मुंबई में एक अवैध बैंक खाता खोलने के लिए उनकी निजी जानकारी का दुरुपयोग किया गया है और वह खाता कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग, निवेश धोखाधड़ी और आतंकी वित्तपोषण से जुड़ा है।

फर्जी दस्तावेजों से बनाया दबाव

आरोपों को विश्वसनीय दिखाने के लिए ठगों ने पीड़ित को कई जाली कागजात भेजे। इनमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) का फर्जी गिरफ्तारी वारंट, कथित कोर्ट पेपर, अग्रिम जमानत दस्तावेज और बॉम्बे हाई कोर्ट तथा भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नाम पर बनाए गए जाली संचार शामिल थे। इसके बाद रिटायर्ड कर्नल और उनकी पत्नी को 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा गया — ठगों ने उन पर लगातार मानसिक दबाव बनाए रखा और उनकी बातचीत पर निगरानी रखी।

नेटवर्क का अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन

पुलिस जाँच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी साइबर-फ्रॉड सिंडिकेट के लिए 'म्यूल' बैंक खाते और करंट अकाउंट की व्यवस्था करते थे, जिनका उपयोग ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए होता था। जाँच में यह भी पता चला है कि इस नेटवर्क के तार कथित तौर पर कंबोडिया और यूएई (दुबई सहित) में सक्रिय साइबर-फ्रॉड ऑपरेटरों से जुड़े हैं।

पुलिस के अनुसार, इस मामले में इस्तेमाल बैंक खातों का संबंध राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से दर्ज 17 शिकायतों से है, जिनमें कई करोड़ रुपये के फर्जी लेन-देन शामिल हैं।

शिकायत के बाद पुलिस की कार्रवाई

पीड़ित से उनकी संपत्ति की जानकारी लेने के बाद ठगों ने कथित 'RBI निर्देशों' का हवाला देते हुए उनसे ₹15.50 लाख ट्रांसफर करवाए। शिकायत दर्ज होने के बाद दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर पुलिस स्टेशन ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू की, जिसके परिणामस्वरूप पंजाब और राजस्थान से चार आरोपी पकड़े गए।

आगे क्या होगा

पुलिस अभी इस नेटवर्क के विदेशी ऑपरेटरों तक पहुँचने के लिए जाँच जारी रखे हुए है। यह मामला 'डिजिटल अरेस्ट' घोटालों की बढ़ती श्रृंखला में एक और कड़ी है, जो वरिष्ठ नागरिकों और सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों को विशेष रूप से निशाना बनाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसके ऑपरेशन सेंटर कंबोडिया और दुबई जैसे देशों में हैं और भारत में 'म्यूल' खाताधारक उनकी आपूर्ति श्रृंखला चलाते हैं। एक रिटायर्ड सेना अधिकारी जैसे सतर्क और अनुभवी व्यक्ति का शिकार होना यह बताता है कि इन ठगों की मनोवैज्ञानिक रणनीति कितनी परिष्कृत हो चुकी है। 17 शिकायतों और कई करोड़ के फर्जी लेन-देन का एक ही नेटवर्क से जुड़ाव यह भी दर्शाता है कि चार गिरफ्तारियाँ हिमशैल की नोक मात्र हैं — असली सवाल यह है कि विदेशी ऑपरेटरों तक जाँच कब और कैसे पहुँचेगी।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम क्या होता है?
'डिजिटल अरेस्ट' एक साइबर ठगी है जिसमें जालसाज खुद को पुलिस, ED या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर पीड़ित को वीडियो या फोन कॉल पर 'हिरासत में' रखने का नाटक करते हैं। पीड़ित पर मानसिक दबाव बनाकर उनसे पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं।
दिल्ली के रिटायर्ड कर्नल के साथ ठगी कैसे हुई?
15 अप्रैल को पीड़ित को कॉल आई जिसमें महाराष्ट्र पुलिस के नाम पर उनका फोन काटने की धमकी दी गई। इसके बाद ठगों ने ED वारंट, बॉम्बे हाई कोर्ट और RBI के जाली दस्तावेज भेजकर उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा और ₹15.50 लाख ट्रांसफर करवाए।
इस मामले में कितने और किन राज्यों से आरोपी पकड़े गए?
दिल्ली साउथ-वेस्ट जिला साइबर पुलिस ने पंजाब और राजस्थान से कुल 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी साइबर-फ्रॉड सिंडिकेट के लिए 'म्यूल' बैंक खाते उपलब्ध कराते थे।
क्या इस नेटवर्क का विदेशों से भी संबंध है?
जाँच में कथित तौर पर सामने आया है कि इस नेटवर्क के तार कंबोडिया और यूएई (दुबई सहित) में सक्रिय साइबर-फ्रॉड ऑपरेटरों से जुड़े हैं। पुलिस इन अंतरराष्ट्रीय कनेक्शनों की जाँच जारी रखे हुए है।
'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम से कैसे बचें?
कोई भी वास्तविक सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती। ऐसी किसी भी कॉल पर पैसे ट्रांसफर न करें और तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले