7 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जयपुर में 'हाई-टेक सिटी' और 'मेडी-सिटी': CM भजनलाल शर्मा ने JDA समीक्षा में दिए बड़े निर्देश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जयपुर में 'हाई-टेक सिटी' और 'मेडी-सिटी': CM भजनलाल शर्मा ने JDA समीक्षा में दिए बड़े निर्देश

सारांश

राजस्थान के CM भजनलाल शर्मा ने JDA समीक्षा बैठक में 'हाई-टेक सिटी' और 'मेडी-सिटी' को 'नए जयपुर' की पहचान बनाने का आह्वान किया — साथ ही यातायात सुधार, समयबद्ध क्रियान्वयन और देरी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

मुख्य बातें

CM भजनलाल शर्मा ने 6 नवंबर 2026 को जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
'हाई-टेक सिटी' और 'मेडी-सिटी' को 'नए जयपुर' की प्रमुख पहचानी परियोजनाओं के रूप में विकसित करने का निर्देश।
जवाहरलाल नेहरू मार्ग के प्रमुख चौराहों को सिग्नल-मुक्त करने की योजना बनाने के निर्देश दिए गए।
परियोजनाओं में देरी, लापरवाही या ढिलाई पर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का निर्देश।
बैठक में मुख्य सचिव वी.
श्रीनिवास , JDA आयुक्त सिद्धार्थ महाजन सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने 6 नवंबर 2026 को जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि 'हाई-टेक सिटी' और 'मेडी-सिटी' परियोजनाओं को 'नए जयपुर' की पहचान बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शहर के विकास की योजना वर्तमान और भविष्य की दोनों ज़रूरतों को ध्यान में रखकर तैयार होनी चाहिए।

हाई-टेक सिटी और मेडी-सिटी: क्या है परिकल्पना

मुख्यमंत्री शर्मा ने प्रस्तावित 'हाई-टेक सिटी' की समीक्षा करते हुए कहा कि दिल्ली से निकटता और पूरे भारत तथा विदेशों में राजस्थानियों की व्यापक उपस्थिति को देखते हुए जयपुर में निवेश और विकास की असीमित संभावनाएँ हैं। उन्होंने आधुनिक तकनीक, उन्नत बुनियादी ढाँचे और विश्वस्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित एक अत्याधुनिक शहरी इकाई विकसित करने का आह्वान किया।

'मेडी-सिटी' की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने आधुनिक चिकित्सा अवसंरचना और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं को इसमें अनिवार्य रूप से शामिल करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि ये दोनों परियोजनाएँ महज़ इमारतें नहीं, बल्कि नए जयपुर की प्रतीक पहचान बनें।

यातायात प्रबंधन पर सख्त निर्देश

बैठक में मुख्यमंत्री ने शहर में वाहनों के बढ़ते दबाव का मुद्दा उठाते हुए एक व्यापक यातायात कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को जवाहरलाल नेहरू मार्ग के प्रमुख चौराहों को सिग्नल-मुक्त करने की योजना तैयार करने को कहा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यातायात प्रबंधन के उपायों में पैदल यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और पर्याप्त पार्किंग सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित हो।

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे संबंधित स्थलों का मौके पर भ्रमण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करें और आवश्यक कदम चिह्नित करें।

समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर

मुख्यमंत्री ने बैठक में सभी विकास परियोजनाओं को तय समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने का कड़ा निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परियोजना के लिए स्पष्ट डेडलाइन निर्धारित हो और उसकी प्रगति की नियमित निगरानी की जाए। किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी, लापरवाही या ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह बैठक ऐसे समय में आई है जब जयपुर तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण के दबाव का सामना कर रहा है। गौरतलब है कि राज्य सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य जयपुर को शहरी विकास के एक आदर्श मॉडल के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना है।

बैठक में कौन-कौन शामिल हुए

इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोड़ा, शहरी विकास एवं आवास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक गुप्ता, प्रमुख सचिव (वित्त) वैभव गालरिया, जयपुर विकास प्राधिकरण के आयुक्त सिद्धार्थ महाजन तथा अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

आगे की राह

'हाई-टेक सिटी' और 'मेडी-सिटी' की विस्तृत योजनाओं पर काम आगे बढ़ेगा, और अधिकारियों को प्रत्येक परियोजना की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। यदि ये परियोजनाएँ समयबद्ध तरीके से साकार होती हैं, तो जयपुर देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो सकता है जहाँ प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य अवसंरचना एक ही नियोजित ढाँचे में एकीकृत हों।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राजस्थान में बड़े शहरी प्रोजेक्ट्स का इतिहास समयबद्ध क्रियान्वयन के मामले में उत्साहजनक नहीं रहा है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या इन परियोजनाओं के लिए बजट आवंटन, भू-अधिग्रहण और पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ उसी गति से आगे बढ़ती हैं जिस गति से समीक्षा बैठकें होती हैं। जयपुर पहले भी स्मार्ट सिटी मिशन के तहत कई महत्वाकांक्षी घोषणाओं का साक्षी रहा है, जिनमें से अनेक अभी भी अधूरी हैं। सख्त कार्रवाई की चेतावनी तभी विश्वसनीय बनेगी जब जवाबदेही का ढाँचा केवल बैठकों तक सीमित न रहे।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयपुर की 'हाई-टेक सिटी' परियोजना क्या है?
यह राजस्थान सरकार की एक प्रस्तावित परियोजना है जिसमें जयपुर में आधुनिक तकनीक, उन्नत बुनियादी ढाँचे और विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त एक नया शहरी क्षेत्र विकसित किया जाएगा। CM भजनलाल शर्मा ने इसे 'नए जयपुर' की पहचान बनाने का लक्ष्य रखा है।
'मेडी-सिटी' जयपुर में क्या होगा?
'मेडी-सिटी' एक प्रस्तावित स्वास्थ्य अवसंरचना परियोजना है जिसमें आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ और विश्वस्तरीय हेल्थकेयर एकत्रित की जाएँगी। मुख्यमंत्री ने इसे 'हाई-टेक सिटी' के साथ जयपुर के दो प्रमुख पहचान-स्तंभों में से एक बताया।
जयपुर के जवाहरलाल नेहरू मार्ग को सिग्नल-मुक्त क्यों बनाया जाएगा?
शहर में वाहनों का दबाव तेज़ी से बढ़ रहा है और प्रमुख मार्गों पर यातायात जाम एक बड़ी समस्या बन चुकी है। CM शर्मा ने JDA को JLN मार्ग के प्रमुख चौराहों को सिग्नल-मुक्त करने की योजना बनाने के निर्देश दिए ताकि यातायात का प्रवाह सुचारू हो सके।
JDA समीक्षा बैठक में कौन-से मुख्य निर्देश दिए गए?
मुख्यमंत्री ने 'हाई-टेक सिटी' व 'मेडी-सिटी' की प्रगति समीक्षा के साथ-साथ सभी परियोजनाओं के लिए स्पष्ट डेडलाइन, नियमित निगरानी और देरी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। पैदल यात्रियों की सुरक्षा और पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था पर भी विशेष ज़ोर दिया गया।
जयपुर के विकास में दिल्ली की निकटता कैसे फायदेमंद है?
CM शर्मा के अनुसार, दिल्ली से निकटता और दुनिया भर में राजस्थानियों की बड़ी उपस्थिति जयपुर को निवेश आकर्षण के लिहाज़ से विशेष स्थिति में रखती है। इन्हीं संभावनाओं को भुनाने के लिए 'हाई-टेक सिटी' जैसी परियोजनाएँ प्रस्तावित की गई हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले