जयपुर पुलिस आयुक्त ने चुनाव ड्यूटी से गायब 4 कांस्टेबलों को बर्खास्त किया, सचिन मित्तल का सख्त संदेश
सारांश
मुख्य बातें
जयपुर पुलिस आयुक्त सचिन मित्तल ने 30 अक्टूबर 2026 को अनुशासन के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए चार नवनियुक्त कांस्टेबलों को सेवा से बर्खास्त कर दिया। इन कर्मियों पर आरोप है कि वे बिना किसी आधिकारिक अनुमति के लंबे समय तक अनुपस्थित रहे और विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद चुनाव ड्यूटी सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्यों पर हाज़िर नहीं हुए। यह कार्रवाई जयपुर पुलिस आयुक्त कार्यालय की अनुशासन और जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
बर्खास्त कांस्टेबलों की पहचान
औपचारिक बर्खास्तगी आदेश पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) अनुष्ठा कालिया द्वारा जारी किए गए। सेवा से हटाए गए चारों कर्मियों की पहचान इस प्रकार है — लोकेश कश्यप (भर्ती कांस्टेबल क्रमांक 10033), विजय सिंह (भर्ती कांस्टेबल क्रमांक 4049), मोहरी लाल (भर्ती कांस्टेबल क्रमांक 7997) और बजरंग लाल (भर्ती कांस्टेबल क्रमांक 7346)।
पुलिस के अनुसार, इन सभी कर्मियों ने अधिकृत अनुमति लिए बिना ड्यूटी से लगातार अनुपस्थिति दर्ज कराई और विभागीय आदेशों की अनदेखी की।
पुलिस आयुक्त की सख्त चेतावनी
पुलिस आयुक्त सचिन मित्तल ने कहा कि पुलिस बल में अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रत्येक कर्मी को आधिकारिक आदेशों का अनुपालन करना तथा जिम्मेदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 'चुनाव ड्यूटी जैसे महत्वपूर्ण कार्य पर उपस्थित न होना गंभीर अनुशासनहीनता है।'
मित्तल ने यह भी रेखांकित किया कि अनधिकृत अनुपस्थिति केवल व्यक्तिगत लापरवाही नहीं है — यह समूचे बल की परिचालन क्षमता और कार्यकुशलता पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। उनके अनुसार, कानून व्यवस्था बनाए रखने और चुनाव संचालन जैसी जनसेवाओं को सुचारू रखने के लिए तैनात कर्मियों की अनुपस्थिति किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
चुनाव ड्यूटी में अनुशासन का महत्व
गौरतलब है कि चुनाव जैसे संवेदनशील राष्ट्रीय अभियानों के दौरान पुलिस तैनाती की सुनियोजित व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। किसी भी कर्मी की अनुपस्थिति न केवल मतदान केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को कमज़ोर कर सकती है, बल्कि समूची चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और सुरक्षा पर भी असर डाल सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग तैनात पुलिस बल से अधिकतम सतर्कता और उपस्थिति की अपेक्षा रखता है।
जयपुर पुलिस का यह कदम राज्य के अन्य पुलिस जिलों के लिए भी एक नज़ीर के रूप में देखा जा रहा है।
आगे की कार्रवाई और संदेश
जयपुर पुलिस आयुक्त कार्यालय ने दोहराया है कि बल के भीतर अनुशासन और जवाबदेही को कोई समझौता नहीं किया जाएगा। लापरवाही, दीर्घकालिक अनधिकृत अनुपस्थिति और आधिकारिक आदेशों की अवज्ञा करने पर भविष्य में भी इसी प्रकार की सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह बर्खास्तगी आने वाले समय में पुलिस बल में अनुशासन की संस्कृति को मज़बूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है।