31 अक्टूबर 2026
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जयपुर पुलिस आयुक्त ने चुनाव ड्यूटी से गायब 4 कांस्टेबलों को बर्खास्त किया, सचिन मित्तल का सख्त संदेश

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जयपुर पुलिस आयुक्त ने चुनाव ड्यूटी से गायब 4 कांस्टेबलों को बर्खास्त किया, सचिन मित्तल का सख्त संदेश

सारांश

जयपुर पुलिस आयुक्त सचिन मित्तल ने चुनाव ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले चार कांस्टेबलों को बर्खास्त कर बल में कड़ा संदेश दिया है। लोकेश कश्यप, विजय सिंह, मोहरी लाल और बजरंग लाल की नौकरी गई — यह कार्रवाई पुलिस अनुशासन में ज़ीरो टॉलरेंस का स्पष्ट संकेत है।

मुख्य बातें

जयपुर पुलिस आयुक्त सचिन मित्तल ने 30 अक्टूबर 2026 को चार कांस्टेबलों को सेवा से बर्खास्त किया।
बर्खास्त कांस्टेबल — लोकेश कश्यप (क्र.
10033), विजय सिंह (क्र.
4049), मोहरी लाल (क्र.
7997) और बजरंग लाल (क्र.
आरोप: बिना अनुमति लंबे समय तक अनुपस्थिति और चुनाव ड्यूटी पर हाज़िर न होना।
औपचारिक बर्खास्तगी आदेश पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) अनुष्ठा कालिया ने जारी किए।
पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि अनुशासनहीनता पर भविष्य में भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

जयपुर पुलिस आयुक्त सचिन मित्तल ने 30 अक्टूबर 2026 को अनुशासन के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए चार नवनियुक्त कांस्टेबलों को सेवा से बर्खास्त कर दिया। इन कर्मियों पर आरोप है कि वे बिना किसी आधिकारिक अनुमति के लंबे समय तक अनुपस्थित रहे और विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद चुनाव ड्यूटी सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्यों पर हाज़िर नहीं हुए। यह कार्रवाई जयपुर पुलिस आयुक्त कार्यालय की अनुशासन और जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

बर्खास्त कांस्टेबलों की पहचान

औपचारिक बर्खास्तगी आदेश पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) अनुष्ठा कालिया द्वारा जारी किए गए। सेवा से हटाए गए चारों कर्मियों की पहचान इस प्रकार है — लोकेश कश्यप (भर्ती कांस्टेबल क्रमांक 10033), विजय सिंह (भर्ती कांस्टेबल क्रमांक 4049), मोहरी लाल (भर्ती कांस्टेबल क्रमांक 7997) और बजरंग लाल (भर्ती कांस्टेबल क्रमांक 7346)।

पुलिस के अनुसार, इन सभी कर्मियों ने अधिकृत अनुमति लिए बिना ड्यूटी से लगातार अनुपस्थिति दर्ज कराई और विभागीय आदेशों की अनदेखी की।

पुलिस आयुक्त की सख्त चेतावनी

पुलिस आयुक्त सचिन मित्तल ने कहा कि पुलिस बल में अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रत्येक कर्मी को आधिकारिक आदेशों का अनुपालन करना तथा जिम्मेदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 'चुनाव ड्यूटी जैसे महत्वपूर्ण कार्य पर उपस्थित न होना गंभीर अनुशासनहीनता है।'

मित्तल ने यह भी रेखांकित किया कि अनधिकृत अनुपस्थिति केवल व्यक्तिगत लापरवाही नहीं है — यह समूचे बल की परिचालन क्षमता और कार्यकुशलता पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। उनके अनुसार, कानून व्यवस्था बनाए रखने और चुनाव संचालन जैसी जनसेवाओं को सुचारू रखने के लिए तैनात कर्मियों की अनुपस्थिति किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

चुनाव ड्यूटी में अनुशासन का महत्व

गौरतलब है कि चुनाव जैसे संवेदनशील राष्ट्रीय अभियानों के दौरान पुलिस तैनाती की सुनियोजित व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। किसी भी कर्मी की अनुपस्थिति न केवल मतदान केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को कमज़ोर कर सकती है, बल्कि समूची चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और सुरक्षा पर भी असर डाल सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग तैनात पुलिस बल से अधिकतम सतर्कता और उपस्थिति की अपेक्षा रखता है।

जयपुर पुलिस का यह कदम राज्य के अन्य पुलिस जिलों के लिए भी एक नज़ीर के रूप में देखा जा रहा है।

आगे की कार्रवाई और संदेश

जयपुर पुलिस आयुक्त कार्यालय ने दोहराया है कि बल के भीतर अनुशासन और जवाबदेही को कोई समझौता नहीं किया जाएगा। लापरवाही, दीर्घकालिक अनधिकृत अनुपस्थिति और आधिकारिक आदेशों की अवज्ञा करने पर भविष्य में भी इसी प्रकार की सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह बर्खास्तगी आने वाले समय में पुलिस बल में अनुशासन की संस्कृति को मज़बूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल की ओर भी इशारा करती है — क्या भर्ती और प्रशिक्षण प्रक्रिया में कोई कमी है जो नवनियुक्त कर्मियों को चुनाव जैसे संवेदनशील अभियानों को गंभीरता से लेने से रोकती है? राजस्थान में इससे पहले भी पुलिस कर्मियों की अनधिकृत अनुपस्थिति के मामले सामने आ चुके हैं, पर बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई अपेक्षाकृत दुर्लभ रही है। सचिन मित्तल का यह कदम ज़ीरो-टॉलरेंस नीति का संकेत तो देता है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह कार्रवाई एकबारगी उदाहरण बनकर रह जाती है या बल में दीर्घकालिक अनुशासन की संस्कृति का आधार बनती है।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयपुर पुलिस ने किन कांस्टेबलों को बर्खास्त किया और क्यों?
जयपुर पुलिस आयुक्त सचिन मित्तल ने लोकेश कश्यप, विजय सिंह, मोहरी लाल और बजरंग लाल को सेवा से बर्खास्त किया। इन चारों पर बिना अनुमति लंबे समय तक अनुपस्थित रहने और चुनाव ड्यूटी सहित महत्वपूर्ण कार्यों पर उपस्थित न होने का आरोप है।
बर्खास्तगी का आदेश किसने जारी किया?
औपचारिक बर्खास्तगी आदेश पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) अनुष्ठा कालिया द्वारा जारी किए गए, जबकि यह निर्णय पुलिस आयुक्त सचिन मित्तल ने लिया।
चुनाव ड्यूटी पर अनुपस्थिति को इतना गंभीर क्यों माना गया?
पुलिस आयुक्त के अनुसार, चुनाव ड्यूटी जैसे अभियानों के दौरान हर कर्मी की तैनाती अनिवार्य होती है क्योंकि इससे मतदान केंद्रों की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित होती है। किसी भी कर्मी की अनुपस्थिति पूरी परिचालन व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
इस कार्रवाई से जयपुर पुलिस बल को क्या संदेश मिलता है?
जयपुर पुलिस आयुक्त कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि अनधिकृत अनुपस्थिति और आधिकारिक आदेशों की अवज्ञा पर भविष्य में भी इसी प्रकार की सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह बर्खास्तगी बल में जवाबदेही की संस्कृति को मज़बूत करने का प्रयास है।
क्या राजस्थान में पुलिस अनुपस्थिति के ऐसे मामले पहले भी सामने आए हैं?
राजस्थान पुलिस में अनधिकृत अनुपस्थिति के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं, लेकिन बर्खास्तगी जैसी कठोर कार्रवाई अपेक्षाकृत कम देखने को मिलती है। यह कदम विभागीय अनुशासन को लेकर एक नई मिसाल कायम करता है।
राष्ट्र प्रेस
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